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Kartik Swami Mandir: केदारनाथ-बद्रीनाथ नहीं, गर्मी की छुट्टी में इस बार जाएं उत्तराखंड के अनोखे मंदिर में, जहां होती है हड्डियों की पूजा!

गर्मियों की छुट्टियों में परिवार के साथ भीड़भाड़ से दूर सुकून की तलाश है? तो उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर बेस्ट है. कनकचौरी गांव से सिर्फ 3 किमी के आसान ट्रेक के साथ आप 360-डिग्री हिमालयन व्यू, हजारों घंटियों की गूंज और जादुई सनसेट का मजा ले सकते हैं. आइए आपको इस मंदिर की खासियत और यहां जाने के रास्तों के बारे में बताते हैं.

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कार्तिक स्वामी मंदिर जाने के लिए आसान ट्रेक करना होता है. (PHOTO: AI/ ITG)
कार्तिक स्वामी मंदिर जाने के लिए आसान ट्रेक करना होता है. (PHOTO: AI/ ITG)

Kartik Swami Mandir:  गर्मियों की छुट्टियों में लोग परिवार के साथ उत्तराखंड के मंदिरों के दर्शन करने का प्लान बनाते हैं. ऐसे में सबसे पहले लोगों के दिमाग में कैंची धाम, नंदा देवी, बद्रीनाथ, केदारनाथ और पंचकेदार सबसे पहले दिमाग में आते हैं. मगर अब इन जगहों पर भीड़भाड़ और अव्यवस्था ने घेर लिया है. इसलिए अगर आप सच में शांति, सुकून के साथ किसी धार्मिक जगह के दर्शन करना चाहते हैं तो उत्तराखंड का कार्तिक स्वामी मंदिर आपके लिए बेस्ट रहेगा.  

अगर इस बार आप अपनी फैमिली के साथ कुछ ऐसा एक्सपीरियंस करना चाहते हैं, तो देवभूमि का यह मंदिर बहुत ही शानदार रहने वाला है, क्योंकि हिमालय की गोद में बसे इस मंदिर के आसपास का नजारा देखकर आप अपनी पलकें भी नहीं झपका पाएंगे. 

क्यों खास है कार्तिक स्वामी मंदिर?

समुद्र तल से करीब 3,050 मीटर की ऊंचाई पर गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में बसा यह मंदिर एक ऐसी जादुई जगह है, जहां पहुंचकर पैर थामते ही शहरों की सारी थकान और भागदौड़ एक पल में गायब हो जाती है. हर तरफ तैरते हुए बादल, ठंडी हवा के झोंके और चारों ओर फैली हिमालय की बर्फीली चोटियां... यहां खड़े होकर सचमुच ऐसा अहसास होता है जैसे आप धरती पर नहीं, बल्कि स्वर्ग के किसी कोने में आ गए हैं.

किसे समर्पित है ये मंदिर?

यह उत्तर भारत का इकलौता मंदिर है जो भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने ब्रह्मांड के चक्कर लगाने की शर्त रखी थी, तब माता-पिता को ही अपना ब्रह्मांड मानकर भगवान गणेश ने उनकी परिक्रमा की थी. इस बात से रुष्ट होकर कार्तिकेय जी ने अपने शरीर का मांस माता-पिता के चरणों में समर्पित कर दिया था. और हड्डियों के रूप में इस क्रौंच पर्वत पर समाहित हो गए थे, मंदिर के गर्भगृह में आज भी भगवान कार्तिकेय की हड्डियों की पूजा होती है.

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 360-डिग्री हिमालयन व्यू

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका रास्ता और इसकी लोकेशन है. यह एक संकरी चोटी पर बना हुआ है. जब आप मंदिर के प्रांगण में खड़े होते हैं, तो आपको बंदरपूंछ, केदारनाथ, चौखंबा, त्रिशूल और नंदा देवी जैसी बर्फ से ढकी गगनचुंबी हिमालय की चोटियों का 360-डिग्री व्यू मिलता है.

हजारों घंटियों की गूंज

मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको करीब 800 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं. पूरे रास्ते और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा बांधी गई हजारों छोटी-बड़ी घंटियां लगी हैं. जब ठंडी हवाओं के साथ ये घंटियां एक साथ गूंजती हैं, तो वहां का माहौल एकदम जादुई और अलौकिक हो जाता है.

खूबसूरत सनराइज और सनसेट

अगर आप सुबह जल्दी या शाम के वक्त यहां होते हैं, तो बादलों के ऊपर से उगता और डूबता सूरज देखना किसी सपने जैसा लगता है. ऐसा महसूस होता है जैसे आप बादलों के समुद्र के ऊपर तैर रहे हों.

फैमिली के लिए छोटा और आसान ट्रेक

केदारनाथ और रुद्रनाथ की तरह जहां पर आपको मुश्किल चढ़ाई भी नहीं मिलेगी. मंदिर पहुंचने के लिए आपको कनकचौरी गांव से सिर्फ 3 किलोमीटर का आसान ट्रेक ही करना है.

यह पूरा रास्ता बुरांश यानी रोडोडेंड्रोन और घने जंगलों के बीच से होकर गुजरता है. रास्ता काफी अच्छी तरह से बना हुआ है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग भी धीरे-धीरे इस चढ़ाई को आसानी से पूरा कर सकते हैं.

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कैसे पहुंचें कार्तिक स्वामी मंदिर?

कार्तिक स्वामी मंदिर पहुंचने के लिए सबसे पहले आपको रुद्रप्रयाग पहुंचना होगा.

हवाई मार्ग: नजदीकी एयरपोर्ट जौलीग्रांट है, जो रुद्रप्रयाग से करीब 180 किमी दूर है.

रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश / योग नगरी ऋषिकेश है. इसके अलावा न्यू ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के काम के बाद कनेक्टिविटी और बेहतर हो गई है.

सड़क मार्ग: ऋषिकेश या हरिद्वार से रुद्रप्रयाग के लिए सीधी बसें और टैक्सियां मौजूद हैं. रुद्रप्रयाग से करीब 40 किमी की दूरी पर कनकचौरी गांव स्थित है, जो इस ट्रेक का बेस कैंप है. आप रुद्रप्रयाग से लोकल जीप या टैक्सी लेकर कनकचौरी पहुंच सकते हैं.

खाना और होटल की फैसिलिटी

कनकचौरी गांव में पर्यटकों के रुकने के लिए काफी अच्छे और बजट-फ्रेंडली ऑप्शन मिल जाते हैं. कनकचौरी में स्थानीय गढ़वाली संस्कृति का अहसास कराने वाले बेहद खूबसूरत होमस्टे और इको-कॉटेज भी हैं. यहां आपको एकदम फ्रेश, पहाड़ी और सात्विक खाना भी मिलेगा.

प्रो टिप: गर्मियों के दिनों में भी यहां शाम के वक्त अच्छी-खासी ठंड हो जाती है, इसलिए अपनी फैमिली के साथ जाते समय हल्के ऊनी कपड़े और विंडचीटर साथ ले जाना बिल्कुल न भूलें.

 

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