दिल्ली सरकार ने राजधानी के पुराने फ्लाईओवरों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के निर्देश पर 15 वर्ष से अधिक पुराने 44 फ्लाईओवरों का व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा. इस ऑडिट की खास बात यह है कि पहली बार फ्लाईओवरों की संरचना के साथ-साथ उनकी नींव, आसपास की जमीन, मिट्टी और चट्टानों की गुणवत्ता की भी वैज्ञानिक जांच की जाएगी.
सरकार का मानना है कि दिल्ली के कई फ्लाईओवर वर्षों से भारी यातायात का दबाव झेल रहे हैं. ऐसे में उनकी वर्तमान स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन करना आवश्यक हो गया है, ताकि किसी संभावित खतरे की समय रहते पहचान की जा सके और जरूरी मरम्मत का कार्य किया जा सके.
ऑडिट के दायरे में राजधानी के कई महत्वपूर्ण और पुराने फ्लाईओवर शामिल किए गए हैं. इनमें 1982 में बने आईपी एस्टेट और सराय काले खां फ्लाईओवर, 1990 का नागिया पार्क फ्लाईओवर, मंगोलपुरी, लाजपत नगर, नीला हौज, गाजीपुर, अक्षरधाम, अप्सरा बॉर्डर, श्याम लाल कॉलेज और यूपी लिंक रोड जैसे प्रमुख फ्लाईओवर शामिल हैं.
PWD अधिकारियों के अनुसार ऑडिट के दौरान फ्लाईओवरों के मूल डिजाइन, वर्तमान संरचनात्मक स्थिति और नींव की मजबूती का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा. साथ ही आसपास की मिट्टी और भूगर्भीय परिस्थितियों के नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जाएगा. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि वर्षों के दौरान जमीन या नींव में कोई बदलाव तो नहीं आया है, जिसका असर फ्लाईओवर की स्थिरता पर पड़ सकता है.
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए किसी दुर्घटना या संकट का इंतजार नहीं किया जा सकता. दिल्ली के कई फ्लाईओवर प्रतिदिन लाखों यात्रियों का भार उठाते हैं और लंबे समय से उपयोग में हैं. ऐसे में उनकी नियमित और वैज्ञानिक जांच बेहद जरूरी है. उनका कहना है कि यह ऑडिट संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में मदद करेगा.
बता दें कि दिल्ली में PWD लगभग 100 फ्लाईओवरों और करीब 1,400 किलोमीटर लंबी प्रमुख सड़कों का रखरखाव करता है. सरकार का दावा है कि इस व्यापक ऑडिट और उसके बाद होने वाले मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों से राजधानी का यातायात ढांचा अधिक सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ बनेगा. साथ ही भविष्य में यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर का अनुभव मिलेगा.