भारत में ट्रेन का सफर ज्यादातर लोगों की यादों से जुड़ा होता है. बचपन में नानी-दादी के घर जाना हो या परिवार के साथ कहीं घूमने निकलना, ट्रेन की खिड़की से बाहर के नजारे देखते हुए घंटों का सफर कब बीत जाता था, पता ही नहीं चलता था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी ट्रेन भी है, जो करीब 4,000 किलोमीटर का सफर तय करती है और अपनी मंजिल तक पहुंचने में तीन दिन से भी ज्यादा समय लेती है.
इस ट्रेन का नाम है विवेक एक्सप्रेस (Vivek Express). यह असम के डिब्रूगढ़ से चलकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक जाती है. इस दौरान ट्रेन लंबी दूरी तय करते हुए कई राज्यों, शहरों और अलग-अलग संस्कृतियों से होकर गुजरती है. यह सफर उन लोगों के लिए खास हो सकता है, जिन्हें ट्रेन से लंबी यात्रा करना और भारत की विविधता को करीब से देखना पसंद है.
4,000 किमी का सफर, रास्ते में बदलते हैं नजारे
डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक चलने वाली विवेक एक्सप्रेस का सफर लगभग 4,200 किलोमीटर लंबा है. यात्रा में करीब 74 घंटे यानी तीन दिन से ज्यादा समय लगता है. हालांकि,कई बार कुछ हालातों में ट्रेन अपने निर्धारित समय पर स्टेशन पर नहीं पहुंच पाती है. इस लंबे सफर के दौरान यात्रियों को खिड़की से भारत के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं. कहीं दूर तक फैले चाय के बागान नजर आते हैं, तो कहीं बड़े शहरों की हलचल दिखाई देती है. रास्ते में बदलते मौसम, भाषा, खानपान और रहन-सहन इस सफर को खास बनाते हैं.
जनरल कोच में सफर करना आसान नहीं
इस ट्रेन के लंबे सफर का एक्सपीरियंस लेने के लिए कंटेंट क्रिएटर ममता यादव और उनकी टीम ने डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक का सफर किया और वापसी का सफर भी किया. इस जर्नी में जहां रास्ते के खूबसूरत नजारे सेंटर ऑफ अट्रैक्शन थे, वहीं जनरल कोच में यात्रियों की भीड़ ने कई मुश्किलें भी पैदा कीं.
वीडियो में जनरल कोच में काफी भीड़ दिखाई गई. ऐसी स्थिति में यात्रियों को बैठने की जगह पाने और कोच के अंदर आने-जाने में परेशानी हो सकती है. इसके अलावा, टॉयलेट की साफ-सफाई को लेकर भी असुविधा सामने आई.
टीम ने शुरुआती दो दिन जनरल कोच में सफर किया और बाकी दो दिन एसी कोच में यात्रा की. जनरल कोच में सीटें पहले आने वाले यात्रियों को मिलती हैं, इसलिए लंबी दूरी के सफर में आराम से बैठने की जगह मिलना बहुत बड़ा चैलेंज बन सकता है.
कब शुरू हुई थी विवेक एक्सप्रेस?
विवेक एक्सप्रेस की शुरुआत साल 2011-12 के रेल बजट में घोषणा के तहत हुई थी. इसे स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती के मौके पर शुरू किया गया था, इस ट्रेन का नाम भी उन्हीं के सम्मान में रखा गया.
इस ट्रेन में आते हैं 59 स्टेशन
डिब्रूगढ़ और कन्याकुमारी के बीच चलने वाली यह ट्रेन अपने लंबे मार्ग पर कई प्रमुख स्टेशनों से गुजरती है. इसके रास्ते में गुवाहाटी, कोलकाता, भुवनेश्वर और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों के स्टेशन शामिल हैं. पूरे सफर में ट्रेन लगभग 59 स्टेशनों पर रुकती है.