केंद्रीय वक्फ बोर्ड, वक्फ अधिनियम 1995 की एक उपधारा है जो भारत सरकार द्वारा स्थापित एक वैधानिक निकाय है. इसकी स्थापना राज्य वक्फ बोर्डों के कामकाज से संबंधित मामलों पर सलाह देने के उद्देश्य से की गई थी (Waqf Board). खबरों के मुताबिक तीन दिन पहले 2 अगस्त को कैबिनेट ने वक्फ एक्ट में कुल 40 संशोधनों को मंजूरी दी है. इन संशोधनों के पारित होने के बाद वक्फ बोर्ड की शक्तियां सीमित हो जाएंगी. इन संशोधनों का उद्देश्य किसी भी संपत्ति को 'वक्फ संपत्ति' के रूप में नामित करने के वक्फ बोर्ड के अधिकार को प्रतिबंधित करना है.
शिया वक्फ बोर्ड से जुड़े आरोपों की जांच पर राजनीतिक आरोप अलग हैं लेकिन जांच जरूरी है. कुछ मामलों को छोड़कर कोई गंभीर जांच अब तक नहीं हुई है. अन्य धर्म स्थलों पर भी गड़बड़ियों की जांच होनी चाहिए और सुधार किए जाने चाहिए. बयानबाजी नहीं बल्कि कोई प्रमाण हो तो उसे सामने लाना चाहिए.
यूपी की सियासत में अब वक्फ बोर्ड में चोरी का नया मुद्दा गर्म हो गया है. उधर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में अयोध्या की तरह कारसेवा की घोषणा कर दी है. 9 अगस्त को इस कारसेवा का एलान हुआ है. तो क्या अब अयोध्या की तरह ही मथुरा की बारी आने वाली है?
बरेली से ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बताया कि राम मंदिर चढ़ावा घोटाला करोड़ों में है. वहीं वक्फ संपत्तियों का घोटाला अरबों और खरबों में है. यह मामला काफी चिंताजनक है क्योंकि वक्फ संपत्ति मुस्लिम समुदाय की महत्वपूर्ण जायदाद होती है. यह घोटाला न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है बल्कि समुदाय में असमंजस भी बढ़ाता है.
राममंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अभी चल ही रहा है कि बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के एक दावे से नई खलबली मच गई है. रिजवी ने दावा किया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी से भी बड़ा घोटाला वक्फ संपत्तियों का है. ये घोटाला अरबों-खरबों में है. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है. उन्होंने घोटाले का आरोप लगाते हुए सीएम योगी को पत्र लिखा है और जांच की मांग की है.
बरेली में मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने Sunni Central Waqf Board पर वक्फ जमीनों में अरबों के घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने Yogi Adityanath से जांच की मांग की और कहा कि संपत्तियों का दुरुपयोग हो रहा है, जिसकी सच्चाई जांच के बाद स्पष्ट होगी।
नई व्यवस्था के तहत वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर मुस्लिम सदस्य शामिल करना अनिवार्य किया गया है. इसके साथ ही बोर्ड में दो मुस्लिम महिला सदस्यों की भूमिका भी सुनिश्चित की गई है. पदाधिकारी, सांसद, विधायक और बार काउंसिल के सदस्यों में से एक-एक सदस्य का सीधे मनोनयन किया जाएगा.
राम मंदिर की चढ़ावा चोरी पर शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई की आंच अब वक्फ तक पहुंच गई है. एक ओर योगी आदित्यनाथ ने हुंकार भरी है कि आखिर विपक्ष वक्फ की चोरी पर क्यों मौन साधता है, तो दूसरी ओर मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने वक्फ बोर्ड में 2 हिंदू सदस्यों की नियुक्ति कर दी है. सवाल ये है कि क्या बीजेपी के इस दांव से विपक्ष को घेरने की ऐसी कोशिश हुई, जिसका असर उनके मुस्लिम वोट बैंक पर पड़ेगा? देखें हल्ला बोेल.
मद्रास हाई कोर्ट ने वक्फ संपत्तियों को लेकर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि किसी भी मुस्लिम धार्मिक संस्था की संपत्ति पर वक्फ बोर्ड खुद से अपना अधिकार नहीं जमा सकता है. यह तभी होगा जब वह सरकारी अधिसूचना के अनुसार संपत्ति बोर्ड के नाम पर रजिस्टर्ड हो.
उत्तर प्रदेश में उम्मीद पोर्टल पर 31 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया है, कुल 1,18,302 रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए.
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने 26 जनवरी पर सभी मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने का निर्देश दिया है. बोर्ड ने संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता के सम्मान के लिए ये कदम उठाया है.
वक्फ प्रॉपर्टीज़ के डिजिटल रजिस्ट्रेशन में उत्तर प्रदेश ने टॉप किया है. राज्य ने केंद्र के उम्मीद पोर्टल पर 92,832 प्रॉपर्टीज़ का प्रोसेस पूरा किया है. वहीं सुन्नी वक़्फ़ कैटेगरी में बाराबंकी 4,940 रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी के साथ लिस्ट में सबसे ऊपर है.
केरल स्थानीय निकाय चुनावों में मुनंबम की जीत ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. वक्फ विवाद से जुड़े इस इलाके में NDA की सफलता को बीजेपी ईसाई समुदाय के बढ़ते समर्थन के तौर पर देख रही है. सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति आदेश के बीच यह मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वक्फ संपत्तियों को UMEED पोर्टल पर छह महीने के भीतर रजिस्टर करना अनिवार्य है और इस डेडलाइन को किसी भी सूरत में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि डेडलाइन के बाद ट्रिब्यूनल के पास जाने का विकल्प उपलब्ध है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य याचिकाकर्ताओं ने डेडलाइन बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया.
बंगाल में कम से कम 27 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स हैं. कम से कम 100 सीट ऐसी हैं जहां ममता बनर्जी मुसलमानों के सहयोग के बिना चुनाव जीत ही नहीं सकती हैं. ऐन चुनावों के पहले कोई भी जनाधार वाला नेता नहीं चाहेगा कि उसके कोर वोटर्स उनसे खफा हो जाएं. जाहिर है कि पूरे देश को यह जिज्ञासा है कि ममता ऐसा क्यों कर रही हैं?
आज तक की एंकर अर्पिता आर्या के साथ तीखी बहस में AIMIM नेता वारिस पठान वक्फ बोर्ड से मुसलमानों को मिलने वाले फायदों पर सही आंकड़े देने में विफल रहे. एक अन्य मेहमान कन्हैया बेलियारी ने कहा कि 'झूठ की बुनियाद पर राजनीति करने का एकाधिकार किसी एक पार्टी को नहीं है, सब करते हैं.'
उत्तर प्रदेश के वक्फ बोर्ड के 'उम्मीद पोर्टल' पर हिंदुओं और बेनामी संपत्तियों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध रूप से वक्फ में दर्ज करने की शिकायत जताई गई है. जितेंद्र नारायण सिंह उर्फ वसीम रिजवी ने सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पत्र लिखकर इस गड़बड़ी की शिकायत की है.
वक्फ संपत्तियों के उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 6 दिसंबर है. समय सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसे मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है.
कांग्रेस स्पोक्सपर्सन सैयद निज़ामुद्दीन ने दो अहम मुद्दों पर बात की. पहला मुद्दा वक्फ बोर्ड की जमीन से जुड़ा है. उन्होंने बताया कि खाना मस्जिद की जमीन, जो 2003 से वक्फ बोर्ड की गजटेड लैंड है, उस पर डिफेंस अपना दावा कर रहा है. यह जमीन 1 एकड़ 5 गुंटा है, जिसमें से 2500 वर्ग गज गजटेड है.
यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सभी मुतवल्ली समितियों से 5 दिसंबर की तय तारीख से पहले उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का पूरा विवरण अपलोड करने के लिए कहा है. ऐसा नहीं करने पर मुतवल्ली के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को आंशिक राहत बताते हुए कई प्रावधानों पर निराशा जताई है. बोर्ड ने कलेक्टरों की शक्तियों पर रोक और "वक्फ बाय यूजर" को सुरक्षित रखने का स्वागत किया, लेकिन कानून की कई धाराओं को असंवैधानिक बताया.
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर अंतरिम आदेश दिया है, जिसमें याचिकाकर्ताओं की कानून पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया गया है. इस फैसले को वक्फ बोर्ड के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. इसपर AIMIM चीफ ओवैसी ने कहा, 'ये सेट बेक है, वर्क बोर्ड के लिए ये सेट बेक है. वर्क प्रॉपर्टीस के डेवलपमेंट प्रोटेक्शन और इल्लीगल एंकरोचेर्स से हटाने के लिए'. सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एएसआई संरक्षित स्मारक और सरकारी जमीन पर वक्फ का कब्जा नहीं माना जाएगा.