सुभाष चंद्रा (Subhash Chandra) भारत के मीडिया कारोबारी और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन हैं. वह जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज से भी लंबे समय तक जुड़े रहे हैं. सुभाष चंद्रा ने भारत में निजी टेलीविजन और सैटेलाइट टेलीविजन के विस्तार में कारोबार किया है.
सुभाष चंद्रा का जन्म 30 नवंबर 1950 को हरियाणा के हिसार जिले के आदमपुर में एक कारोबारी परिवार में हुआ था. वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके और 1965 में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और परिवार के कारोबार में शामिल हो गए. उस समय परिवार खाद्य निगम के लिए चावल की खरीद और आपूर्ति से जुड़े काम करता था.
वर्ष 1981 में सुभाष चंद्रा ने एस्सेल प्रोपैक की स्थापना की. कंपनी ने भारत में लेमिनेटेड ट्यूब बनाने का काम शुरू किया. बाद में कंपनी का नाम ईपीएल लिमिटेड हुआ और वर्ष 2019 में इसे ब्लैकस्टोन ने अधिग्रहित किया.
उन्होंने साल 1989 में उन्होंने एस्सेल वर्ल्ड और वाटर किंगडम जैसे मनोरंजन केंद्रों की शुरुआत की. वर्ष 1992 में उन्होंने 'जी टीवी' लॉन्च किया. यह भारत के शुरुआती निजी व्यावसायिक टेलीविजन चैनलों में शामिल था. वर्ष 1999 में जी न्यूज की शुरुआत हुई. वर्ष 2003 में उन्होंने डिश टीवी शुरू किया, जिसे भारत की शुरुआती सैटेलाइट टेलीविजन सेवाओं में गिना जाता है.
साल 1994 में सुभाष चंद्रा ने सिटी नेटवर्क्स की स्थापना की. वर्ष 2005 में डेनिक भास्कर समूह के साथ मिलकर उन्होंने मुंबई से अंग्रेजी अखबार डीएनए शुरू किया. बाद में अक्टूबर 2019 में डीएनए का प्रकाशन बंद हो गया.
नवंबर 2019 में सुभाष चंद्रा ने जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया. अगस्त 2020 में उन्हें कंपनी का चेयरमैन एमेरिटस नियुक्त किया गया. इसके बाद भी वह एस्सेल ग्रुप से जुड़े रहे.
राजनीति के क्षेत्र में सुभाष चंद्रा 2016 में हरियाणा से राज्यसभा के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए थे. उन्हें भारतीय जनता पार्टी के विधायकों का समर्थन मिला था. मई 2022 में उन्होंने राजस्थान से राज्यसभा चुनाव के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया, लेकिन वह चुनाव हार गए.
कभी देश की इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बेताज बादशाह रहे ज़ी ग्रुप के फाऊंडर सुभाष चंद्रा आज दीवालिया हो गए हैं. अनजाने सेक्टर्स में एंट्री का भारीभरकम रिस्क, गिरवी शेयरों की बदौलत शुरू हुआ यह कर्जसंकट उनकी 'पर्सनल गारंटी' पर आकर आत्मघाती बन गया. उनके बुरे वक्त का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि NCLT ने उन्हें 99.97% कर्जमाफी देकर रियायत दी तो वह भी विवादों में आ गया.
मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज को महज 6.5 करोड़ रुपये में सैटल करने के मामले में पेंच फंसा नजर आ रहा है. इंसॉल्वेंसी कानून के तहत मिले 99.97% 'हेयरकट' मामले में अब NCLT में दोबारा सुनवाई होगी.
एनसीएलटी की स्पेशल बेंच ने सुभाष चंद्रा को लेकर पुराने आदेश पर स्टे लगा दिया है. अब सुभाष चंद्रा किसी भी तरह की प्रॉपर्टी नहीं बेच सकते हैं और 6.5 करोड़ रुपये में लोन पे ऑर्डर पर भी रोक लगाई है.
मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज को महज 6.5 करोड़ रुपये में सैटल करने के NCLT फैसले ने देश के बैंकिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इंसॉल्वेंसी कानून के तहत मिले 99.97% 'हेयरकट' पर विजय माल्या के तंज और कांग्रेस नेता जयराम रमेश के 'मुंडन' वाले बयान ने इस विवाद को और गरमा दिया है.