पासपोर्ट (Paasport) एक सरकारी दस्तावेज होता है जो किसी नागरिक की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि करता है, विशेषकर जब वह व्यक्ति विदेश यात्रा करता है. यह दस्तावेज दुनिया के किसी भी कोने में आपकी पहचान और देश की ओर से मिली अनुमति का प्रमाण होता है.
पासपोर्ट के बिना कोई भी व्यक्ति कानूनी रूप से एक देश से दूसरे देश में यात्रा नहीं कर सकता. यह न केवल आपकी यात्रा को वैध बनाता है, बल्कि यह विदेशों में किसी भी आपात स्थिति में भारतीय दूतावास से सहायता पाने का अधिकार भी देता है.
भारत में मुख्यतः तीन प्रकार के पासपोर्ट जारी किए जाते हैं- सामान्य पासपोर्ट (नीला रंग) - आम नागरिकों के लिए
राजनयिक पासपोर्ट (गहरा लाल रंग) - राजनयिकों और उच्च अधिकारियों के लिए
आधिकारिक पासपोर्ट (सफेद रंग) – सरकारी कार्यों पर यात्रा करने वालों के लिए
पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया कुछ इस तरह है.
ऑनलाइन आवेदन – passportindia.gov.in पर जाकर आवेदन फॉर्म भरें. अपने दस्तावेज अपलोड करें जैसे पहचान, निवास और जन्म तिथि से संबंधित प्रमाण पत्र अपलोड करें. श्रेणी के अनुसार ऑनलाइन शुल्क भुगतान करें. पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) पर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करवाएं. फिर पुलिस वेरिफिकेशन किया जाता है जो आपके निवास स्थान पर पुलिस आकर जांच करती है. बाद में सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने पर पासपोर्ट डाक द्वारा भेजा जाता है.
पासपोर्ट बनवाने के लिए सरकार की ओर से 2500 रुपये लिए जाते हैं. सरकार ने बताया कि एक पासपोर्ट बनाने में कितने तरह के खर्चे होते हैं.
पासपोर्ट बनाने या उसके नवीनीकरण में SIR डाटा का इस्तेमाल किया जाता है. राज्यसभा में उठाए गए इस सवाल का केंद्र सरकार ने जबाव दिया है. सरकार का कहना है कि पासपोर्ट बनाने या उसे रिन्यू करने में इस डेटा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
यूएई में भारतीयों के लिए पासपोर्ट, वीजा और दस्तावेज सत्यापन सेवाएं फिर शुरू हो गई हैं. सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों के बाद अब ये सेवाएं 16 नए कांसुलर केंद्रों के जरिए दी जा रही हैं.
पाकिस्तान से आए कई हिंदू परिवार भारत में नागरिकता, LTV, आधार और अन्य दस्तावेजों की प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. इन परिवारों और उनके लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होने तक बैंक खाता खोलने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में कई व्यावहारिक चुनौतियां आती हैं. जानिए उनकी कहानी और प्रमुख मांगें.
1 जुलाई से देशभर में कई अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है. एलपीजी, आधार, रेलवे, आयकर, पासपोर्ट, क्रेडिट कार्ड, पेट्रोल-डीजल और वाहन कीमतों समेत कई क्षेत्रों में नए नियम प्रभावी हो सकते हैं. ऐसे में किसी भी परेशानी या अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए इन बदलावों की जानकारी पहले से होना जरूरी है.
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, जिससे यह बहस फिर शुरू हो गई कि भारत में नागरिकता किस डॉक्यूमेंट से साबित होती है. सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह कोई नया फैसला नहीं बल्कि पुरानी स्थिति ही है. पासपोर्ट एक्ट की धारा 20 के चलते पासपोर्ट को कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता.
विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता की पहचान नहीं है. अब सियासी दल फिर से सवाल उठाने लगे कि फिर भारतीयता की पहचान क्या है.
केंद्र सरकार ने पासपोर्ट सेवाओं की फीस में 14 साल बाद संशोधन किया है. 1 जुलाई 2026 से नया पासपोर्ट, रिन्यूअल और खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं के लिए अधिक शुल्क देना होगा. वहीं, 18 साल से कम उम्र के बच्चों के पासपोर्ट और नाबालिगों के खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट के लिए भी नई फीस लागू होगी.
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट सिर्फ यात्रा दस्तावेज है. नागरिकता का प्रमाण नहीं. इस बयान से विपक्षी दलों में तूफान खड़ा हो गया. विपक्ष ने पूछा कि फिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज पर्याप्त है.
क्या भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है? विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर यही सवाल छाया हुआ है. अगर पासपोर्ट सिर्फ ट्रैवल डॉक्यूमेंट है तो पुलिस वेरिफिकेशन क्यों होता है? विदेशी नागरिकता लेने पर पासपोर्ट वापस क्यों लेना पड़ता है? और सबसे बड़ा सवाल—आखिर भारतीय नागरिकता का असली सबूत क्या है? इस वीडियो में आसान भाषा में समझिए पूरा विवाद और नागरिकता कानून की सच्चाई.
भारत की अधिकांश जनता के पास आज एक ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है जो साबित करे कि वो भारत का नागरिक है...क्योंकि आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट ये सब देश के अलग अलग कानूनों के हिसाब से बने पहचान पत्र हैं...लेकिन नागरिकता की पहचान नहीं...यही बखेड़ा फिर खडा हुआ है...दरअसल विदेश मंत्रालय ने कह दिया कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता की पहचान नहीं है...अब सियासी दल फिर से सवाल उठाने लगे कि फिर भारतीयता की पहचान क्या है. देखें दंगल.
विदेश मंत्रालय ने बताया है कि पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं. इस बयान पर कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि फिर नागरिकता का सबूत क्या है और इसे वोट के अधिकार से जोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही. जावेद अख्तर ने भी इस बयान को बेतुका बताया और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए.
विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पासपोर्ट सिर्फ विदेश यात्रा के लिए जारी होने वाला एक दस्तावेज है, यह नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है. इससे पहले कोर्ट भी आधार और वोटर आईडी को नागरिकता का ठोस दस्तावेज मानने से इनकार कर चुका है.
आधार कार्ड के बाद पासपोर्ट को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ये नागरिकता का डॉक्यूमेंट नहीं है. ऐसे में सवाल है कि फिर नागरिकता का दस्तावेज किसे माना जाएगा?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता नियमों में संशोधन करते हुए नया नोटिफिकेशन जारी किया है. आवेदकों के लिए पासपोर्ट की जानकारी साझा करना और नागरिकता मिलने के बाद उसे सरेंडर करना जरूरी कर दिया गया है.
अगर किसी नाबालिग के पास इंडियन पासपोर्ट है तो वह उसी समय किसी दूसरे देश का पासपोर्ट नहीं रख सकता है. गृह मंत्रालय ने नागरिकता और OCI कार्ड से जुड़े नियमों में बदलावों को लागू कर दिया है. सरकार ने ये बदलाव दोहरी नागरिकता से जुड़े विवादों को दूर करने के लिए किया है.
केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिसके तहत OCI कार्ड पंजीकरण अब पूरी तरह डिजिटल होगा. नए नियमों में e-OCI, बायोमेट्रिक आधारित फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन और नाबालिगों के लिए दोहरे पासपोर्ट पर पाबंदी जैसे प्रावधान शामिल हैं
भारत सरकार ने नागरिकता से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है. अब OCI कार्ड से जुड़े आवेदन, त्याग और रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन होंगे. e-OCI जैसी नई सुविधा से पारदर्शिता और तेजी आएगी. साथ ही नाबालिगों के पासपोर्ट और दस्तावेजों को लेकर नियम सख्त किए गए हैं, जिससे प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित हो सकेगी.
अमेरिका 250वीं आजादी की सालगिरह पर लिमिटेड एडिशन पासपोर्ट लाने की तैयारी में है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप की फोटो शामिल हो सकती है. इस प्रस्ताव को लेकर देश में बहस भी तेज हो गई है.
वियतनाम घूमने गए कई भारतीय पर्यटकों ने खराब अनुभव साझा किए हैं. कुछ ने दुकानदारों के भेदभावपूर्ण और रूखे व्यवहार की शिकायत की, तो कहीं मोलभाव को लेकर विवाद सामने आए. बढ़ती टूरिस्ट संख्या के बीच यह मुद्दा चर्चा में है, हालांकि कई जगह भारतीयों का स्वागत भी किया जा रहा है.
टिकट बुक है, वीजा भी आ गया और पासपोर्ट की डेट भी सही है. फिर भी आपको एयरपोर्ट से वापस घर भेजा जा सकता है. आखिर पासपोर्ट से जुड़ी वो कौन सी छोटी सी गलती है जो आपकी पूरी विदेश यात्रा पर पानी फेर सकती है. इमिग्रेशन में फंसने से पहले जान लें ये जरूरी नियम.