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डाकिया पासपोर्ट लाया… एक ही पते पर जारी हो गए 22 पासपोर्ट, जबकि वहां रहता कोई भी नहीं

गाजियाबाद में फर्जी पते दिखाकर एक ही पते पर 22 से अधिक पासपोर्ट जारी कराने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है. इस मामले में डाकिया समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. जांच में सामने आया कि पासपोर्ट की डिलीवरी के बदले 2,000 रुपये लिए जाते थे. दिल्ली पासपोर्ट कार्यालय की शिकायत पर शुरू हुई जांच में बड़े नेटवर्क की आशंका जताई गई है.

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गाजियाबाद में एक ही पते पर 22 पासपोर्ट जारी होने का मामला सामने आया है (File Photo ITG)
गाजियाबाद में एक ही पते पर 22 पासपोर्ट जारी होने का मामला सामने आया है (File Photo ITG)

कभी-कभी किसी बड़े अपराध का खुलासा बेहद साधारण-सी जानकारी से होता है. गाजियाबाद में सामने आया फर्जी पासपोर्ट का यह मामला भी कुछ ऐसा ही है. एक ही पते पर बार-बार पासपोर्ट जारी होने और एक ही मोबाइल नंबर के इस्तेमाल ने पूरे सिस्टम की नींद उड़ा दी. जब परतें खुलीं, तो पता चला कि जिन घरों के पते पर 22 से ज्यादा पासपोर्ट जारी हो गए, वहां न तो कोई रहता था और न ही उन नामों का कोई व्यक्ति कभी दिखा.

गाजियाबाद पुलिस ने इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक डाकिया समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. इस नेटवर्क में कुल 26 लोग शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल फर्जी पते तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कहीं ज्यादा गहरे हो सकते हैं.

ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज

न्यूज एजेंसी के मुताबिक पूरा मामला तब सामने आया, जब पिछले साल दिसंबर में दिल्ली पासपोर्ट कार्यालय के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने गाजियाबाद पुलिस को एक पत्र लिखा. पत्र में कुछ आवेदनों को संदिग्ध बताते हुए जानकारी दी गई थी कि एक ही पते पर लगातार कई पासपोर्ट जारी हो रहे हैं. इतना ही नहीं, इन सभी आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर बार-बार दर्ज किया गया था. पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज में इस तरह की समानताएं अधिकारियों को खटकने लगीं. क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी की शिकायत के बाद गाजियाबाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. शुरुआती जांच में ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे.

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पते थे, लेकिन लोग नहीं

पुलिस टीम जब बताए गए पतों पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए. जिन मकानों के पते पर पासपोर्ट जारी हुए थे, वहां न तो आवेदकों का नाम जानने वाला कोई मिला और न ही ऐसा कोई सबूत, जिससे यह साबित हो सके कि वे लोग कभी वहां रहे हों. ग्रामीण क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त सुरेंद्र नाथ तिवारी के मुताबिक, जांच में साफ हो गया कि सभी पते फर्जी थे. आवेदक उन जगहों पर कभी रहे ही नहीं. यह बात सामने आते ही पुलिस को यकीन हो गया कि यह एक संगठित गिरोह का काम है, जो पासपोर्ट जैसी अहम सरकारी पहचान को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा था.

डाकिया बना कड़ी

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस की नजर एक ऐसे व्यक्ति पर गई, जो इस पूरे फर्जीवाड़े की अहम कड़ी साबित हुआ. वह था स्थानीय डाकघर में तैनात डाकिया अरुण कुमार. पुलिस के अनुसार, अरुण कुमार ने अपने पद और जिम्मेदारी का गलत इस्तेमाल किया. आरोप है कि अरुण कुमार हर पासपोर्ट के बदले 2,000 रुपये लेकर दस्तावेजों को तय पते पर पहुंचाने के बजाय सीधे गिरोह के सदस्यों को सौंप देता था. इस तरह पासपोर्ट की डिलीवरी का अंतिम और सबसे अहम चरण भी गिरोह के नियंत्रण में आ गया था.

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कैसे हुई सौदेबाजी

पूछताछ के दौरान अरुण कुमार ने कई अहम खुलासे किए. उसने बताया कि करीब पांच महीने पहले प्रकाश सुब्बा और विवेक नाम के दो लोग उसके संपर्क में आए थे. दोनों ने उसे हर पासपोर्ट के बदले 2,000 रुपये देने का ऑफर दिया. बदले में शर्त सिर्फ इतनी थी कि जैसे ही पासपोर्ट आए, वह उसे तय पते पर न देकर सीधे उन्हें सौंप दे. शुरुआत में अरुण कुमार को यह काम आसान और बिना जोखिम का लगा. धीरे-धीरे वह इस नेटवर्क का हिस्सा बनता चला गया. पुलिस के अनुसार, इसी मिलीभगत के चलते एक ही पते पर दर्जनों पासपोर्ट बिना किसी परेशानी के जारी होते चले गए.

26 लोगों पर एफआईआर

पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत कुल 26 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिनके नाम पर पासपोर्ट बनवाए गए, और वे भी, जिन्होंने इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने में मदद की. अब तक डाकिया अरुण कुमार समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि कई आरोपी शहर से बाहर भी हो सकते हैं.

खुफिया एजेंसियां भी सतर्क

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मामले की गंभीरता को देखते हुए खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं. पुलिस उपायुक्त सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि यह जांच की जा रही है कि कहीं इस फर्जीवाड़े के तार किसी बड़े नेटवर्क या देशविरोधी गतिविधियों से तो नहीं जुड़े हैं. पासपोर्ट एक अंतरराष्ट्रीय पहचान पत्र होता है. अगर यह गलत हाथों में चला जाए, तो इसका इस्तेमाल अवैध यात्रा, मानव तस्करी, आर्थिक अपराध या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी किया जा सकता है. इसी आशंका को देखते हुए जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया जा रहा है.

सिस्टम की खामियां भी आईं सामने

इस पूरे मामले ने पासपोर्ट सत्यापन और डिलीवरी प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ही पते पर 22 से ज्यादा पासपोर्ट जारी हो जाना और किसी स्तर पर आपत्ति न उठना, सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा. डाक वितरण से लेकर पुलिस वेरिफिकेशन तक हर चरण की दोबारा समीक्षा की जा रही है.

फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि अब तक कितने पासपोर्ट इस तरह से गलत तरीके से जारी हुए और वे कहां-कहां इस्तेमाल किए गए. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह का मास्टरमाइंड कौन है और इसका नेटवर्क कितनी दूर तक फैला हुआ है. गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

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