मिराज (Mirage Fighter Jet) फ्रांस में विकसित एक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है. इसे फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने तैयार किया है. मिराज 2000 एक इंजन वाला फोर्थ जेनेरेश चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसके पंख ट्रायएंगल शेप के हैं. इसका इस्तेमाल हवाई सुरक्षा, दुश्मन के विमानों को रोकने और जमीन पर स्थित सैन्य ठिकानों पर हमले जैसे अभियानों में किया जाता है.
मिराज 2000 के विकास की शुरुआत वर्ष 1972 में डेल्टा 1000 परियोजना से हुई थी. उस समय फ्रांस की वायुसेना को मिराज III के स्थान पर एक नए हल्के लड़ाकू विमान की जरूरत थी. इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए दसॉल्ट एविएशन ने अपनी योजना में बदलाव किया और डेल्टा 2000 प्रस्ताव को मिराज 2000 के रूप में विकसित किया.
मार्च 1976 में फ्रांस की वायुसेना ने इस विमान के लिए अपनी आवश्यकताएं निर्धारित कीं. इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाया गया. 10 मार्च 1978 को मिराज 2000 के पहले प्रोटोटाइप ने अपनी पहली उड़ान भरी. इस उड़ान के दौरान विमान ने ध्वनि की गति को पार किया. उड़ान परीक्षणों के लिए तीन प्रोटोटाइप और एक एकल सीट वाला प्रदर्शन विमान तैयार किया गया.
20 नवंबर 1982 को मिराज 2000C के पहले उत्पादन मॉडल ने अपनी पहली उड़ान भरी. वर्ष 1983 में इस विमान की आपूर्ति शुरू हुई. बाद में इसे अलग-अलग सैन्य जरूरतों के अनुसार कई संस्करणों में विकसित किया गया. मिराज 2000N को फ्रांस की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी भूमिका के लिए तैयार किया गया, जबकि मिराज 2000D को जमीन पर स्थित लक्ष्यों पर हमले के लिए विकसित किया गया. इसके अलावा मिराज 2000-5 संस्करण भी सामने आया, जिसका इस्तेमाल निर्यात बाजार में किया गया.
फ्रांस के अलावा भारत, संयुक्त अरब अमीरात, ताइवान और ग्रीस सहित कई देशों ने इस विमान को अपने सैन्य बेड़े में शामिल किया. भारतीय वायुसेना में मिराज 2000 एक महत्वपूर्ण लड़ाकू विमान के रूप में शामिल है. इसका इस्तेमाल कारगिल युद्ध सहित विभिन्न सैन्य अभियानों में किया गया है.
भारतीय मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने कारगिल युद्ध, 2001-2002 के भारत-पाकिस्तान सैन्य गतिरोध, 2020 में भारत और चीन के बीच हुई झड़पों तथा 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई. संयुक्त अरब अमीरात के मिराज 2000 विमानों ने खाड़ी युद्ध और यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व में किए गए सैन्य हस्तक्षेप में हिस्सा लिया. पेरू की वायु सेना ने सेनेपा युद्ध के दौरान अपने मिराज 2000 विमानों को तैनात किया. यूक्रेन की वायु सेना ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इस विमान का इस्तेमाल लड़ाकू अभियानों में किया है.
वर्ष 2000 के दशक में फ्रांस की वायु एवं अंतरिक्ष सेना के प्रमुख अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान के रूप में मिराज 2000 की जगह अधिक आधुनिक दसॉल्ट राफेल ने ले ली.
फ्रांसीसी मिराज 2000 विमानों ने खाड़ी युद्ध, बोस्निया युद्ध, कोसोवो युद्ध और अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया. यूक्रेन ने भी रूस के साथ जारी युद्ध में इस विमान का इस्तेमाल किया है.
23 नवंबर 2007 को ग्रीस की वायुसेना को अंतिम निर्मित मिराज 2000 सौंपा गया. इसके बाद इसका उत्पादन बंद कर दिया गया. विभिन्न देशों के लिए इस विमान की 600 से अधिक इकाइयां बनाई गईं. फ्रांस में बाद के वर्षों में इसकी प्रमुख लड़ाकू भूमिका का स्थान राफेल विमान ने लिया.