विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित 'द्वितीय भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक' को संबोधित करते हुए वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद पर कड़ा संदेश दिया. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद से प्रभावित देशों और समाजों को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है.
जयशंकर ने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों ने भारत और अरब देशों के बीच घनिष्ठ तालमेल को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है. जयशंकर का यह बयान पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और भारत की सीमा पार आतंकवाद के प्रति सख्त नीति को दर्शाता है. जयशंकर ने आतंकवाद को भारत और अरब जगत दोनों के लिए साझा खतरा बताया.
जयशंकर ने कहा कि राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और जनसांख्यिकीय बदलाव वैश्विक परिदृश्य को नया आकार दे रहे हैं, जिसमें पिछले एक साल में पश्चिम एशिया में विशेष रूप से नाटकीय बदलाव देखे गए हैं, जिसका भारत और अरब देशों के साथ उसके जुड़ाव पर सीधा असर पड़ा
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उन्होंने कहा कि "सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है. आतंकवाद के सभी रूपों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' का अंतरराष्ट्रीय मानक मजबूत होना चाहिए." उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और वैश्विक सहयोग को इसे खत्म करने के लिए अडिग रहना होगा.
क्षेत्रीय फ्लैशपॉइंट्स पर चिंता
गाजा संघर्ष पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करते हुए जयशंकर ने अक्टूबर 2025 के शर्म-अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन और नवंबर के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को याद किया. उन्होंने कहा कि गाजा में युद्ध का खात्मा अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकता है. इसके अलावा उन्होंने सूडान का गृहयुद्ध, यमन की समुद्री सुरक्षा, लेबनान की अस्थिरता और सीरिया-लीबिया की राजनीतिक स्थितियों पर भी चिंता जताई, जहां भारतीय सैनिक UNIFIL के तहत तैनात हैं.
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लीग ऑफ अरब स्टेट्स (LAS) के सदस्यों के साथ भारत की मजबूत साझेदारी पर प्रकाश डालते हुए, जयशंकर ने 2026-28 का रोडमैप पेश किया. इसमें ऊर्जा, कृषि और पर्यटन के साथ-साथ डिजिटल तकनीक, स्पेस रिसर्च, स्टार्टअप और इनोवेशन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की बात कही गई है.