गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) भारत में हर साल 2 अक्टूबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय दिवस है. यह दिन महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है. महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था. उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह को संघर्ष के प्रमुख साधन के रूप में अपनाया.
गांधी जयंती भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में शामिल है. इस दिन देश के अलग अलग हिस्सों में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी जाती है. नई दिल्ली स्थित राजघाट पर विशेष प्रार्थना सभा और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. राजघाट वही स्थान है जहां 1948 में महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार किया गया था.
गांधी जयंती के अवसर पर स्कूल, कॉलेज, सरकारी संस्थान और विभिन्न सामाजिक संगठन कार्यक्रम आयोजित करते हैं. इन कार्यक्रमों में प्रार्थना सभा, भाषण, निबंध लेखन, चित्रकला, स्वच्छता अभियान और अन्य गतिविधियां शामिल हो सकती हैं. कई स्थानों पर महात्मा गांधी के जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं.
इस दिन महात्मा गांधी से जुड़े स्थानों और उनकी प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए जाते हैं. देश के कई हिस्सों में उनकी स्मृति में प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं. गांधी जी का प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम भी कई कार्यक्रमों में गाया जाता है.
गांधी जयंती का संबंध केवल भारत तक सीमित नहीं है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया था. इसके बाद यह दिन दुनिया के कई हिस्सों में अहिंसा और शांति के संदेश से जुड़े अवसर के रूप में भी मनाया जाने लगा.
भारत में गांधी जयंती के दिन सार्वजनिक अवकाश रहता है. सरकारी कार्यालय, बैंक और डाकघर आम तौर पर बंद रहते हैं. विभिन्न संस्थानों में इस अवसर पर सामाजिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं.
गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है. 2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी. इसके बाद इस दिन देश के कई हिस्सों में स्वच्छता अभियान आयोजित किए जाने लगे.
इस तरह गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती, उनके स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े योगदान और अहिंसा के विचारों को याद करने के अवसर के रूप में मनाई जाती है.
'दृश्यम' ने 2 अक्टूबर की तारीख को एक नई पहचान दी है. विजय सलगांवकर की कहानी, पणजी, सत्संग और पाव भाजी के संदर्भ हर साल सोशल मीडिया पर मीम्स के जरिए लौटते हैं. जानिए कैसे फिल्म का एक डायलॉग भारतीय पॉप कल्चर का हिस्सा बन गया. वीडियो में जानें डिटेल्स.
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को आंदोलनकारी के रूप में, अहिंसक क्रांति के अग्रदूत और सत्याग्रह के पुजारी के रूप में तो सब जानते हैं लेकिन उनके जीवन के आध्यात्मिक पहलू कम अहम नहीं है. गांधी के जीवन का एक सिरा भारत की सनातन परंपरा और अध्यात्म से भी उतना ही जुड़ा हुआ था, जितना कि आजादी के आंदोलन से. बल्कि अहिंसक क्रांति की प्रेरणा के लिए गांधी हमेशा अध्यात्म को अपना पावरहाउस मानते थे.