रेगिस्तान- Desert पृथ्वी का वैसा भाग है जहां की जमीन बंजर है, जहां बहुत कम वर्षा होती है. जिसके कारण रहने की स्थितियां, पौधों और जानवरों के जीवन के लिए प्रतिकूल होती हैं. वनस्पति की कमी से भूमि की असुरक्षित सतह अनाच्छादित हो जाती है.
पृथ्वी की लगभग एक-तिहाई भूमि शुष्क या अर्ध-शुष्क है. इसमें अधिकांश ध्रुवीय क्षेत्र शामिल हैं, जहां कम वर्षा होती है और जिन्हें कभी-कभी ध्रुवीय रेगिस्तान या ठंडा रेगिस्तान' भी कहा जाता है. रेगिस्तानों को वर्षा की मात्रा, तापमान, मरुस्थलीकरण की भौगोलिक स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है.
रेगिस्तानों का निर्माण मौसम संबंधी प्रक्रियाओं से होता है क्योंकि दिन और रात के बीच तापमान में बड़े बदलाव से चट्टानों पर दबाव पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप वे टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं. हालांकि रेगिस्तानों में बारिश कम ही होती है, फिर भी कभी-कभार भारी बारिश होती है जिसके परिणामस्वरूप अचानक बाढ़ आ सकती है.
विश्वभर के रेगिस्तान क्षेत्रों में अंटार्कटिक रेगिस्तान (14,200,000 वर्ग किमी), आर्कटिक रेगिस्तान (13,900,000 5 वर्ग किमी), सहारा रेगिस्तान (अफ्रीका) (9,200,000 वर्ग किमी), ऑस्ट्रेलियाई रेगिस्तान (2,700,000 वर्ग किमी), अरब रेगिस्तान (मध्य पूर्व) (2,330,000 वर्ग किमी), गोबी रेगिस्तान (एशिया) (1,295,000 वर्ग किमी), कालाहारी रेगिस्तान (अफ्रीका) (900,000 347 वर्ग किमी), पैटागोनियन रेगिस्तान (दक्षिण अमेरिका) (673,000 वर्ग किमी), सीरियाई रेगिस्तान (मध्य पूर्व) (500,000 वर्ग किमी), ग्रेट बेसिन रेगिस्तान (उत्तरी अमेरिका) (490,000 वर्ग किमी) शामिल है- Number of Deserts.
Negev desert में Dimona के पास 4.2 magnitude earthquake से Israel में हलचल. Nuclear reactor के करीब झटके के बाद social media पर nuclear test की चर्चाएं तेज, अधिकारियों ने बताया प्राकृतिक.
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा पर चिंता जताई है. 20 नवंबर के फैसले को 21 जनवरी तक लागू करने पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने केंद्र से सवाल किए कि 500 मीटर गैप वाली परिभाषा से संरक्षण क्षेत्र कम तो नहीं होगा? खनन से इकोलॉजिकल कनेक्टिविटी कैसे बचेगी? नई हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनेगी.
सऊदी अरब के रेगिस्तान में दुर्लभ बर्फबारी ने जलवायु परिवर्तन की बड़ी चेतावनी दी है. ताबुक जैसे इलाकों में बर्फ से ढके पहाड़ और ऊंट वायरल हो रहे हैं. ऊंट ठंड में भी आराम से जीवित रहते हैं. भारत के लिए यह संकेत है कि अजीब मौसम से निपटने के लिए सख्त नियम जरूरी है.
देश में अरावली पर्वतमाला को लेकर काफी बहस छिड़ी हुई है. भारत की इस सबसे पुरानी पर्वतमाला को लेकर #Savearavali मूवमेंट भी शुरू किया जा चुका है. लेकिन पर्यावरणविदों की इसे लेकर जताई जा रही फिक्र कितनी गंभीर है, क्या वाकई अरावली संकट के साथ कुछ बड़े खतरे भी जुड़े हुए हैं, जिनके बारे में हम सबको आगाह होना जरूरी है? ये सब जानने के लिए aajtak.in ने बात की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) नई दिल्ली के 'स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट साइंसेस' के प्रोफेसर डॉ सुदेश यादव और IIT के अर्थ साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव से.
Aravali पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे पुरानी mountain range है. 250 crore साल पुरानी यह प्राकृतिक दीवार desertification रोकती है, लेकिन illegal mining और urbanisation से इसका वजूद संकट में है.
अरंडी की खेती ने राजस्थान के रेगिस्तान को नई पहचान देने में मदद की है. जहां कभी खेती मुश्किल थी, वहां अब किसान अरंडी की फसल को उगा पा रहे हैं.
दुनिया में आप कई बड़े रेगिस्तानों का नाम सुने होंगे, लेकिन एक ऐसा भी रेगिस्तान है जो अपने छोटे से स्वरूप के लिए मशहूर है. सिर्फ 2.6 किलोमीटर में फैला यह अनोखा रेतीला इलाका हर किसी को चौंका देता है. कैसे बना यह छोटा सा रेगिस्तान और इसकी क्या खासियत है? जानिए यहां...
सहारा रेगिस्तान का Chinguetti शहर तेजी से रेत में दफन हो रहा है. सदियों पुराने लाइब्रेरी, UNESCO heritage और प्राचीन manuscripts खतरे में हैं.
चिली के अटाकामा रेगिस्तान में सिस्टैंथे लॉन्गिस्कापा नाम का छोटा गुलाबी फूल उगता है. ये सूखे वातावरण, UV किरणों और नमकीन मिट्टी में फलता है. एंड्रेस बेलो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक इसका जीनोम सीक्वेंस कर रहे. ताकि मजबूत जीन ढूंढकर गेहूं-चावल जैसी फसलों में डालना, ताकि जलवायु परिवर्तन से होने वाले सूखे को झेल सकें. खेती के लिए ये एक नई उम्मीद है.
चिली के अटाकामा रेगिस्तान में सिस्टैंथे लॉन्गिस्कापा नाम का गुलाबी फूल तेज़ UV किरणों, सूखे और नमकीन मिट्टी में भी खिल रहा है. वैज्ञानिक इसका जीनोम पढ़कर ऐसे जीन ढूंढ रहे हैं जो फसलों को सूखा-सहन करने में मदद कर सकें.
थार रेगिस्तान सिर्फ रेत का समंदर नहीं, बल्कि रोमांच और सुकून का अद्भुत संगम है. यह स्थान रेगिस्तान पर्यटकों को एक ऐसा सफर देता है, जो उन्हें हमेशा याद रहेगा.
दक्षिणी पेरू में उठी तेज हवाओं से रेत और धूल का एक बड़ा तूफान पैदा कर दिया. पेरू की राष्ट्रीय मौसम सेवा ने बताया कि लीमा से लगभग 400 किलोमीटर दक्षिण में स्थित इका में हवा की गति 50 किमी प्रति घंटे तक रिकॅार्ड की गई. इका में आए तूफान के कारण राजमार्गों पर यातायात ठप हो गया और पर्यटन गतिविधियां लगभग 3 घंटे तक रूकी रहीं.
पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति एक दोधारी तलवार है. बाढ़, भूकंप, रेगिस्तान और क्षेत्रीय अशांति जैसे खतरों का सामना करने के लिए मजबूर करती है. बलूचिस्तान की अशांति, बाढ़ की तबाही, रेगिस्तानी क्षेत्रों की चुनौतियां और रिहायशी इलाकों की समस्याएं पाकिस्तान की स्थिति को और जटिल बनाती हैं. भारत के लिए यह स्थिति रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक अवसर प्रदान करती है.
50 साल में पहली बार सहारा रेगिस्तान में बाढ़ आई. दुर्लभ बारिश हुई है. दो दिन तक मोरक्को के आसपास बारिश होती रही. इस अजीबो-गरीब मौसम को देख कर पूरी दुनिया हैरान है. यहां तस्वीरों में आपको खूबसूरती दिखेगी... लेकिन ये एक भयावह आपदा की निशानी है.
रेगिस्तान के लिए मशहूर राजस्थान में बारिश थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. क्या यहां से खूबसूरत रेगिस्तान खत्म हो जाएंगे? पश्चिमी राजस्थान जहां सबसे ज्यादा रेगिस्तान हैं, वहां इस बार सामान्य से 58% ज्यादा बारिश हो चुकी है. हैरान करने वाले आंकड़ें तो जैसलमेर से आए हैं, जहां सबसे ज्यादा रेगिस्तान ही है.
Radio Luxembourg Challenge: एक बार रेडियो चैनल रेडियो लक्समबर्ग ने आईस चैलेंज शुरू किया था, जिसमें बर्फ को एक रेगिस्तान से होते हुए करीब 8500 किलोमीटर लेकर जाना था और इसके लिए फ्रिज का इस्तेमाल नहीं करना था. फिर एक शख्स ने इसे पूरा भी कर दिया.
महिपाल की इस कामयाबी से एक तरफ जहां परिवार में खुशी है तो अब रिश्तेदार और आसपास के लोग भी महिपाल को बधाई देने उनके घर पहुंच रहें हैं. महिपाल बाड़मेर शहर के तिलकनगर के निवासी है. बाड़मेर में ही उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई. दसवीं जोधपुर के करने के बाद महिपाल में कोटा में प्रवेश लिया.
रेगिस्तानी देशों में से एक सऊदी अरब में आमतौर पर बारिश कम ही देखने को मिलती है. लेकिन इन दिनों वहां के मौसम में अजीब बदलाव देखने को मिल रहा है.