डाबर लिमिटेड (Dabur Ltd) एक भारतीय बहुराष्ट्रीय उपभोक्ता वस्तु कंपनी है, जिसकी स्थापना एस. के. बर्मन (A K Burman) ने की थी (Founder of Dabur). इसका मुख्यालय गाजियाबाद में है (Headquarter of Dabur). यह आयुर्वेदिक दवा और प्राकृतिक उपभोक्ता उत्पादों का निर्माण करता है. यह भारत में सबसे बड़ी तेजी से चलने वाली उपभोक्ता वस्तुओं (FMCG) कंपनियों में से एक है. डाबर अपने राजस्व का लगभग 60% उपभोक्ता देखभाल व्यवसाय से प्राप्त करता है, 11% खाद्य व्यवसाय से और शेष अंतर्राष्ट्रीय व्यापार इकाई से प्राप्त करता है.
डाबर की स्थापना 1884 में डॉ. एस. के. बर्मन ने कोलकाता में की थी. 1880 के दशक के मध्य में, कोलकाता में एक आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में, उन्होंने हैजा, कब्ज और मलेरिया जैसी बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक दवाएं तैयार कीं. एक योग्य चिकित्सक के रूप में, वे साइकिल पर बंगाल में अपनी दवाएं बेचते थे. उनके रोगियों ने उन्हें और उनकी दवाओं को "डाबर" के रूप में संदर्भित करना शुरू कर दिया, जो कि डाकर यानी डॉक्टर कहने लगे. बाद में, उन्होंने अपने आयुर्वेदिक योगों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया (Dabur Ayurvedic Medicine).
वर्तमान में अध्यक्ष डॉ. आनंद बर्मन और उपाध्यक्ष अमित बर्मन परिवार की पांचवीं पीढ़ी का हिस्सा हैं.
Indian Companies Started Before Independence: देश आज आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है. 1947 मे देश को आजादी मिलने से पहले की करीब 70 कंपनियों ने Economy को आगे बढ़ाने में अपना योगदान किया. इनमें से कई का आज भी दुनिया में डंका बजता है.
FMCG Products May Costlier: जून तिमाही में अपने सामनों की कीमतों में बढ़ोतरी कर ग्राहकों को झटका देने के बाद अब एफएमसीजी कंपनियों सितंबर तिमाही में कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं.
दिल्ली हाई कोर्ट ने डाबर इंडिया को बड़ी राहत देते हुए FSSAI के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें कंपनी के कई प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया था. मामला '100% प्योर', '100% नेचुरल' और '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावों से जुड़ा है. डाबर ने FSSAI की कार्रवाई में तय प्रक्रिया का पालन नहीं होने का आरोप लगाया था.
डाबर इंडिया ने अपने फूड प्रोडक्ट्स पर ‘100 परसेंट प्योर’ और ‘100 परसेंट नेचुरल’ जैसे दावों को लेकर FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. कंपनी के शहद और घी समेत कई प्रोडक्ट्स इस विवाद के दायरे में हैं.
FSSAI ने स्पष्ट किया है कि पैकेज्ड फूड पर '100% प्योर' या '100% नेचुरल' जैसे दावे वैज्ञानिक आधार होने पर ही किए जा सकते हैं. जानिए FSSAI लाइसेंस का मतलब क्या है और खरीदारी से पहले किन बातों का ध्यान रखें. प्रोडक्ट्स खरीदने से पहले Ingredients की लिस्ट और FSSAI लाइसेंस नंबर जैसी जानकारी भी जरूर जांचें.
Dabur Products Ban Impact: डाबर इंडिया कंपनी पर 100% शुद्धता के दावों को लेकर FSSAI प्रोडक्ट्स बैन का जो एक्शन लिया है, उसका सीधा असर कंपनी के शेयर में बड़ी गिरावट के रूप में भी देखने को मिला है.
FSSAI ने डाबर इंडिया लिमिटेड के कई प्रोडक्ट्स पर '100 प्रतिशत' प्राकृतिक और जैविक दावों के साथ बिक्री पर रोक लगा दी है. जांच में पाया गया कि डाबर की वेबसाइट और प्रोडक्ट्स पर भ्रामक दावे जैसे '100% नेचुरल', '100% प्योर', '100% ऑर्गेनिक' लगाए गए थे. FSSAI ने इसे खाद्य सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन बताया है.
डाबर च्यवनप्राश की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट में पतंजलि के विज्ञापन के खिलाफ याचिका दायर की गई थी. याचिका में डाबर ने कहा था कि पतंजलि अपने विज्ञापन में उसके च्यवनप्राश को मामूली बता रहा है.
ये एफआईआर सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, डाबर समूह के अध्यक्ष मोहित बर्मन और निदेशक गौरव बर्मन समेत 32 आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई थी. एक सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश बैंकर की शिकायत पर कुर्ला मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर महादेव सट्टेबाजी ऐप के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई थी.
महादेव बेटिंग ऐप पर जांच एजेंसियों का लगातार शिकंजा कसता जा रहा है. मुंबई पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर डाबर ग्रुप के चेयरमैन और डायरेक्टर पर एफआईआर दर्ज की है. इस एफआईआर में मोहित और गौरव बर्मन पर क्रिकेट लीग में मैच फिक्सिंग में शामिल होने का आरोप लगाया गया है. इस मामले में महादेव बुक ऐप और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ भी एफआईआर हुई है. इन लोगों पर चीटिंग करने और जुआ खिलाने के आरोप लगे हैं.
डाबर (Dabur) ने मसाला कारोबार में एंट्री मारते हुए बादशाह मसाला (Badshah Masala) में सबसे ज्यादा 51% हिस्सेदारी हासिल कर इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया है. डाबर ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि बादशाह मसाला कंपनी के मौजूदा प्रमोटर्स और शेयर होल्डर्स के साथ डाबर इंडिया लिमिटेड ने डील पूरी करते हुए 51 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर ली है.
डाबर इंडिया (Dabur India) अब मसालों के कारोबार में उतरने की तैयारी में है. कंपनी ने बादशाह मसाला (Badshah Masala) में 51 फीसदी की हिस्सेदारी खरीद ली है. इससे कंपनी पर अब डाबर का मालिकाना हक हो गया है. हालांकि, सितंबर की तिमाही में कंपनी के मुनाफे में गिरावट आई है.