पटाखे (Crackers) का इस्तेमाल त्योहारों, शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों और विशेष उत्सवों के दौरान किया जाता है. पटाखे जलाने पर तेज आवाज, रोशनी और रंग-बिरंगे दृश्य उत्पन्न होते हैं. भारत में दिवाली के दौरान पटाखों का इस्तेमाल काफी प्रचलित रहा है. इसके अलावा नए साल, दशहरा और अन्य खुशी के अवसरों पर भी आतिशबाजी की जाती है.
पटाखों का इतिहास काफी पुराना है. माना जाता है कि आतिशबाजी की शुरुआत चीन में हुई थी. चीन में प्राचीन समय में बांस को आग में डालने से तेज आवाज निकलती थी. बाद में बारूद के इस्तेमाल से आतिशबाजी के अलग-अलग रूप विकसित हुए. चीन से आतिशबाजी की तकनीक धीरे-धीरे दुनिया के अन्य हिस्सों तक पहुंची. भारत में भी समय के साथ पटाखों का चलन बढ़ा.
पटाखे कई प्रकार के होते हैं. इनमें फुलझड़ी, अनार, रॉकेट, चकरी, बम और रंगीन आतिशबाजी शामिल हैं. फुलझड़ी से चमकदार रोशनी निकलती है, जबकि अनार जमीन पर रखकर जलाया जाता है और उससे ऊपर की ओर रंगीन चिंगारियां निकलती हैं. चकरी जमीन पर घूमती है और रॉकेट आसमान में जाकर रोशनी फैलाता है. अलग-अलग पटाखों की आवाज, रोशनी और जलने का तरीका अलग होता है.
पटाखों का निर्माण मुख्य रूप से कागज, बारूद और विभिन्न रासायनिक पदार्थों की सहायता से किया जाता है. इनके निर्माण और बिक्री के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी होता है. पटाखों को खुले स्थान पर और सावधानी के साथ जलाना चाहिए.
पटाखों से होने वाला ध्वनि और वायु प्रदूषण एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है. इनके जलने से हवा में धुआं, सूक्ष्म कण और विभिन्न हानिकारक गैसें फैल सकती हैं. तेज आवाज से बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और पालतू जानवरों को परेशानी हो सकती है. इसके अलावा पटाखों से आग लगने और जलने की घटनाएं भी हो सकती हैं.
आजकल पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कम प्रदूषण वाले पटाखों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है. त्योहारों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी बरतना आवश्यक है. पटाखों का उपयोग सावधानी से करने से दुर्घटनाओं और प्रदूषण को कम किया जा सकता है.
गुरुग्राम जिला प्रशासन ने 23 तय जगहों पर लाइसेंसधारी व्यापारियों को 6 नवंबर 2026 तक प्रमाणित ग्रीन पटाखे बेचने की मंजूरी दी है. लोग 7 और 8 नवंबर को तय घंटों में इन्हें चला सकेंगे, जबकि 9 नवंबर 2026 से पूरे जिले में सभी पटाखों पर पूर्ण रोक लौट आएगी.
दीया मिर्जा ने जहां एक तरफ दिवाली पर पटाखे ना जलाने की अपील से लोगों को नाराज किया. वहीं दूसरी ओर गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा ने भी कुछ ऐसी ही रिक्वेस्ट की है. दिवाली के मौके पर पटाखों से दूरी बनाए रखने पर सुनीता ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर नियमों का पालन न कराने के लिए दिल्ली सरकार और CAQM को फटकार लगाई. बेंच ने कहा कि आदेश सिर्फ अकादमिक बन गए हैं. कोर्ट ने पूछा कि प्रवर्तन टीमें इलाकों में गईं या नहीं और क्या आंकड़े जुटाए गए. कोर्ट ने जागरूकता के लिए विराट कोहली जैसी हस्तियों की मदद लेने को भी कहा.
रजनीकांत की फिल्म जेलर 2 आखिरकार रिलीज हो गई है, जिसे फैंस ने बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया. भारत के कई शहरों और विदेशों में थिएटरों के बाहर जश्न देखने को मिला, जहां फैंस ने नाच-गाना किया, पटाखे फोड़े.
फरीदाबाद के ओल्ड खेड़ी रोड पर एक गोदाम में बिना वैध परमिट के 7,270 किलो अवैध पटाखे पाए गए. पुलिस ने आरोपी हेमंत वधवा के किराए पर लिए गए गोदाम पर छापा मारा, जहां भारी मात्रा में फुलझड़ी, अनार, बम, चक्कर, स्काई शॉट, बुलेट बम और मैजिक पेपर शॉट जैसे पटाखे मिले.
प्रकृति ऐसे अजीबोगरीब क्रिएचर्स से भरी पड़ी है, जिनमें से कईयों बारे में हमने न तो सुना होगा, ना देखा होगा. इस धरती पर एक ऐसा भी पेड़ है, जिस पर धमाके होते रहते हैं.