सी-वोटर (C-Voter) भारत की जानी-मानी चुनावी सर्वे और जनमत सर्वेक्षण एजेंसियों में शामिल है. इसका पूरा नाम Centre for Voting Opinion & Trends in Election Research है. यह संस्था चुनावों से जुड़े मतदाताओं के रुझान, जनमत और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर सर्वे करने के लिए जानी जाती है.
सी-वोटर की स्थापना 1993 में हुई थी. इसके संस्थापक यशवंत देशमुख हैं. संस्था का काम अलग-अलग मुद्दों पर लोगों की राय को सर्वे के जरिए समझना और उसके आंकड़ों का विश्लेषण करना है. चुनावों के दौरान सी-वोटर के सर्वे और ओपिनियन पोल अक्सर चर्चा में रहते हैं.
सी-वोटर देश के अलग-अलग हिस्सों में सर्वे करता है. इसके लिए मतदाताओं और आम लोगों से सवाल पूछे जाते हैं. सर्वे में चुनावी पसंद के अलावा सरकार के कामकाज, राजनीतिक मुद्दों, सामाजिक विषयों और जनमत से जुड़े दूसरे सवाल भी शामिल हो सकते हैं.
चुनावी सर्वे के दौरान सैंपल का चयन, सवालों की भाषा, सर्वे का समय और आंकड़ों का विश्लेषण काफी महत्वपूर्ण होता है. किसी भी ओपिनियन पोल को चुनाव का अंतिम परिणाम नहीं माना जाता. यह उस समय किए गए सर्वे के आधार पर मतदाताओं के रुझान का अनुमान होता है. वास्तविक चुनाव परिणाम इससे अलग हो सकते हैं.
सी-वोटर समय-समय पर मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर चुनावी सर्वे और चुनाव परिणामों से जुड़े विश्लेषण भी करता रहा है. इसके आंकड़ों का इस्तेमाल टीवी चैनलों, समाचार वेबसाइटों और दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म पर चुनावी चर्चा के दौरान किया जाता है.
भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के अलावा सी-वोटर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी जनमत सर्वे करता है. इसके सर्वे राजनीतिक दलों, मीडिया और आम लोगों के बीच चुनावी माहौल को समझने का एक माध्यम बनते हैं.
सी-वोटर की पहचान मुख्य रूप से चुनावी सर्वे, ओपिनियन पोल और जनमत से जुड़े शोध के लिए बनी है. हालांकि किसी भी सर्वे के आंकड़ों को समझते समय उसके सैंपल साइज, सर्वे की तारीख, क्षेत्र, पद्धति और संभावित त्रुटि के मार्जिन को ध्यान में रखना जरूरी होता है.
'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के आंकड़े बीजेपी के डबल इंजन मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत साख मजबूत बनी हुई है, लेकिन राज्यों के स्तर पर पार्टी की पकड़ ढीली पड़ रही है. हिंदी पट्टी और पारंपरिक गढ़ों में सीटों का नुकसान बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है, जिसकी भरपाई केवल एक बंगाल से संभव नहीं है.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में Gen Z के मुद्दों को जानने की कोशिश की गई. सर्वे में पूछा गया कि Gen-Z के लिए सबसे अहम मुद्दा क्या है, तो सबसे बड़ी संख्या में नौकरी को चुना गया. 53 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि नौकरी को उनका सबसे बड़ा मुद्दा है. 22 प्रतिशत युवाओं ने शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. देखें MOTN सर्वे.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के ताजा 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के अनुसार, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के लिए 49% लोगों की पहली पसंद हैं, जबकि राहुल गांधी को 27% समर्थन मिला है. वहीं तीसरे नंबर सबसे चौकानें वाला नाम सामने आया है. दरअसल, तीसरे नंबर में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 9% वोट के साथ हैं.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे में युवाओं ने रोजगार और अवसरों को लेकर अपनी राय रखी। 32% युवाओं का मानना है कि मेहनत और प्रतिभा अब भी मायने रखती है, जबकि 26% ने पैसा और संपर्क को ज्यादा प्रभावी माना।
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में देश की जनता से राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों को लेकर सवाल पूछे गए. सर्वे में सवाल पूछा गया कि प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी का कामकाज कैसा? 51 फीसदी लोगों ने कामकाज अच्छा बताया. तो 17 फीसदी ने औसत बताया. देखें Video.
अगस्त 2026 के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने देश का राजनीतिक मिजाज साफ कर दिया है. पेपर लीक, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर युवाओं में भारी गुस्सा है, लेकिन इसके बावजूद Gen-Z और एक बड़ी आबादी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा कायम है. सर्वे की यह रिपोर्ट सरकार के लिए बड़ी चुनौती, सबक और भरोसे की तस्वीर पेश करती है.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के नतीजे आ गए हैं. सर्वे में तमाम मुद्दों पर देश का मूड जानने की कोशिश की गई. जब सवाल किया गया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) चुनाव लड़ी तो क्या वोट करेंगे? इसके जवाब में कितने प्रतिशत लोगों ने हां कहा और कितनों ने नहीं, देखें वीडियो.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में युवाओं और जनता की राजनीतिक व सामाजिक चिंताओं का व्यापक विश्लेषण किया गया. सर्वे में 23 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी को देश की सबसे बड़ी समस्या बताया. तो 18 फीसदी ने महंगाई को सबसे बड़ी समस्या माना. देखें Video.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में जब पूछा गया कि Gen Z के लिए सबसे अहम मुद्दा क्या है, तो सबसे बड़ी संख्या में उन्होंने नौकरी को चुना. 53 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि नौकरी को उनका सबसे बड़ा मुद्दा है. 22 प्रतिशत युवाओं ने शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. देखें MOTN सर्वे.
इंडिया टुडे के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में जेन-जी के रुख और देश के बदलते मूड को समझने की कोशिश की गई है. जेन-जी प्रोटेस्ट के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा सर्वे है. सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता पर Gen-Z को कितना भरोसा है. इस पर भी युवाओं ने वोट किया. देश के 67 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनका भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर भरोसा कम या बिल्कुल नहीं है.
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