छाछ (Buttermilk) भारत का एक पारंपरिक डेयरी पेय है, जिसे दही और पानी को मिलाकर तैयार किया जाता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है. उत्तर भारत में इसे छाछ, गुजरात में छास, दक्षिण भारत में मजीगे या मोर और राजस्थान में मठा कहा जाता है. यह भारतीय खानपान और ग्रामीण संस्कृति का लंबे समय से हिस्सा रहा है.
छाछ बनाने की प्रक्रिया काफी सरल होती है. पहले दही को अच्छी तरह मथा जाता है, फिर उसमें आवश्यकतानुसार पानी मिलाया जाता है. कई जगहों पर इसमें स्वाद के लिए भुना जीरा, काला नमक, पुदीना, धनिया, करी पत्ता या हरी मिर्च भी मिलाई जाती है. अलग-अलग राज्यों में इसे बनाने का तरीका और स्वाद थोड़ा अलग हो सकता है.
भारत में छाछ का उपयोग मुख्य रूप से गर्मियों के मौसम में अधिक किया जाता है, हालांकि कई क्षेत्रों में इसे पूरे वर्ष भोजन के साथ परोसा जाता है. ग्रामीण इलाकों में यह दैनिक भोजन का हिस्सा होती है, जबकि शहरों में भी पैक्ड छाछ की मांग लगातार बढ़ रही है. आज कई डेयरी कंपनियां बोतल और पाउच में तैयार छाछ बाजार में उपलब्ध करा रही हैं.
छाछ का उपयोग केवल पेय के रूप में ही नहीं, बल्कि कई पारंपरिक व्यंजनों में भी किया जाता है. कढ़ी, ढोकला, कुछ प्रकार की रोटियां, मसालेदार ग्रेवी और कई क्षेत्रीय व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा कुछ जगहों पर आटा गूंथने और मेरिनेशन के लिए भी छाछ का उपयोग किया जाता है.
भारत दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल है, इसलिए छाछ का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है. डेयरी उद्योग में यह एक महत्वपूर्ण उत्पाद माना जाता है और इसकी मांग घरेलू बाजार के साथ-साथ खाद्य सेवा क्षेत्र में भी बनी रहती है.
कभी-कभी कुछ हल्का और हेल्दी खाने का मन करता है, ऐसे में आप छाछ और ज्वार के आटे से गुजरात की मशहूर डिश छासियो लोट बना सकते हैं. यह गुजरात की एक पारंपरिक, स्वादिष्ट और पौष्टिक डिश है, जो कम समय और कम सामग्री में तैयार हो जाती है.आइए आपको इसे बनाने का आसान तरीका बताते हैं.