दुनिया भर में बढ़ते प्रदूषण, सूखे और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) की तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. इसे आर्टिफिशियल रेनफॉल, प्लुवीकल्चर या वेधर मॉडिफिकेशन भी कहा जाता है. इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य बादलों में विशेष रसायन डालकर बारिश की संभावना को बढ़ाना होता है.
वैज्ञानिक बादलों की संरचना और तापमान को देखते हुए हवाई जहाज या रॉकेट के जरिए बादलों में कुछ तत्व फैलाते हैं, जैसे सिल्वर आयोडाइड, ड्राई आइस (ठोस कार्बन डाइऑक्साइड) और नमक (सॉल्ट पाउडर). इन तत्वों की वजह से बादलों में नमी जमने लगती है और बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि इस प्रक्रिया की सफलता को लेकर वैज्ञानिकों में अभी भी विवाद है, क्योंकि यह तय करना मुश्किल है कि यदि सीडिंग न की गई होती तो वर्षा कितनी होती. इस तकनीक का उपयोग- सूखे से राहत, सिंचाई व पेयजल उपलब्धता बढ़ाने, जलविद्युत उत्पादन के लिए पानी स्तर सुधारने और वायु प्रदूषण कम करने के लिए किया जाता है.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुकाबले एक नए वैज्ञानिक हथियार के तौर पर क्लाउड सीडिंग आधारित कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) पर कदम उठाए जा रहे हैं. इस तकनीक के रिए बादलों में विशेष पदार्थों का छिड़काव कर वर्षा को प्रेरित करने का प्रयास किया जाता है, जिसका उद्देश्य वायु में तैरती धूल और सूक्ष्म कण (PM 2.5, PM 10) को नीचे लाना है.
Kal Ka Mausam: भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 3 अगस्त को उत्तर प्रदेश में मानसून सक्रिय रहेगा. लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, आगरा, गाजियाबाद, सहारनपुर, बरेली और आसपास के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं. पूर्वी यूपी के अनेक और पश्चिमी यूपी के कुछ स्थानों पर वर्षा होगी. दोनों क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है.
Kal Ka Mausam : कल 2 अगस्त को यूपी के सभी 75 जिलों में मौसम का बदला हुआ रूप देखने को मिलेगा. भारतीय मौसम विभाग (IMD) लखनऊ के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गरज-चमक के साथ बारिश और बौछारें पड़ सकती हैं. मौसम विभाग का कहना है कि मानसून फिर सक्रिय हो रहा है.
कल का मौसम (1 अगस्त): यूपी के अधिकांश जिलों में IMD के अनुसार 1 अगस्त को गरज-चमक के साथ बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है. हालांकि राहत की बात यह है कि किसी भी जिले के लिए येलो, ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी नहीं किया गया है. मौसम विभाग ने वज्रपात के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है.
यूपी में 30 जुलाई को मानसून सक्रिय रहेगा. मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी, मध्य और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है. लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, नोएडा समेत कई शहरों में बारिश का असर देखने को मिलेगा. लोगों को आकाशीय बिजली, जलभराव और तेज बारिश को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
हैदराबाद के मियापुर इलाके में तेज बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया। 70 वर्षीय बुजुर्ग बलैया खुले पड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेन में गिर गए और तेज बहाव में बह गए। आरोप है कि मरम्मत कार्य के दौरान मैनहोल खुला छोड़ दिया गया था, जहां न तो बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी बोर्ड।
UP Weather Today: यूपी में 28 जुलाई को मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा. IMD ने पश्चिमी और पूर्वी यूपी के लगभग सभी जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान जताया है. सोनभद्र, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर और बरेली में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. कई जिलों में वज्रपात का भी अलर्ट है.
23 जुलाई को पिछले दिनों की तुलना में मानसूनी गतिविधियां उत्तर प्रदेश में कमजोर रहने की संभावना है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, लेकिन किसी भी जिले के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है. मौसम विभाग का कहना है कि 26 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय हो सकता है.
उत्तर प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने लगी हैं, लेकिन 22 जुलाई को बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में भारी बारिश की संभावना है. IMD के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी यूपी के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होगी. 23 से 25 जुलाई तक कोई विशेष चेतावनी नहीं है, जबकि 26 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय हो सकता है.
UP Rains Weather Update: यूपी में मॉनसून फिर सक्रिय होने की उम्मीद है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 18 जुलाई से कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, गोरखपुर, बलिया, देवरिया समेत पूर्वी और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में झमाझम बारिश की संभावना है.
देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. IMD के अनुसार, जून के शुरुआती दिनों में बारिश सामान्य से 64% कम रही. एक्सपर्ट्स इसे अस्थायी ‘मॉनसून पॉज़’ मान रहे हैं और जल्द सुधार की उम्मीद जता रहे हैं. मौसम विभाग (IMD) लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए है.
गर्मी और बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है. ऐसे में घर के साथ-साथ गार्डन को भी मच्छरों से बचाना जरूरी है.मच्छर सबसे ज्यादा रुके हुए पानी में पनपते हैं इसलिए गमलों की ट्रे, बाल्टी, बर्ड बाथ और अन्य कंटेनरों में पानी जमा न होने दें.
दिल्ली-NCR में रविवार की रात बारिश, ओले और आंधी का अलर्ट है. मौसम विभाग के अनुसार यह असर पश्चिमी विक्षोभ की वजह से है. 7 से 9 अप्रैल के बीच इसका प्रभाव और बढ़ेगा, जिससे देश के बड़े हिस्से में भारी ओलावृष्टि हो सकती है. किसानों को तुरंत फसल कटाई की सलाह दी गई है.
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और हजारों व्हाट्सऐप ग्रुप्स में एक कहानी तेजी से फैलने लगी. सवाल उठाया गया-क्या यही वजह है कि पिछले हफ्ते इतनी तेज बारिश हुई? बताया जाने लगा कि साल 2007 से बिल गेट्स एक अलग तरह के विज्ञान यानी सोलर जियोइंजीनियरिंग में निवेश कर रहे हैं, और इसी को इस बारिश से जोड़कर देखा जाने लगा.जानें क्या है सच.
ईरान में महीनों के भयानक सूखे के बाद सोमवार को पश्चिमी इलाकों में तेज बारिश से बाढ़ आ गई. औसत से 85% कम बारिश से तेहरान में नल सूख गए हैं. जल संकट गहराया हुआ है. सरकार ने क्लाउड सीडिंग शुरू की, लेकिन विशेषज्ञ बोले – यह महंगी और अस्थायी राहत है. सूखी जमीन पानी सोख नहीं पाई, इसलिए फ्लैश फ्लड आया.
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश की चर्चा तेज है. इसी मुद्दे पर iFOREST के सीईओ चंद्रभूषण ने आईआईटी कानपुर के प्रयोग और इसकी सफलता की संभावनाओं पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. चंद्रभूषण ने कहा, 'जिस तरह से क्लाउड सीडिंग पे चर्चा हुई है, वो एक्सपेरिमेंट कम और पोलिटिकल थिएटर ज्यादा लग रहा है'.
दिल्ली में जहरीली हवा से राहत दिलाने के लिए की गई क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) की कोशिशें नाकाम रहीं. IIT कानपुर की मदद से दिल्ली सरकार ने अब तक तीन ट्रायल किए लेकिन एक बूंद बारिश भी नहीं हुई. करीब एक करोड़ रुपये खर्च करने के बाद सवाल ये उठ रहा है कि क्या सिर्फ फुहारों के लिए करोड़ों खर्च करना वाकई समझदारी है?
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) का प्रयोग विफल रहा. बिहार चुनाव में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह ने प्रचार किया, जबकि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंबाला में राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरी. अमेज़न की बड़ी छंटनी और नागपुर में किसानों के कर्जमाफी के लिए हुए विरोध प्रदर्शन भी प्रमुख रहे.
Delhi में क्यों फेल हुई 'Cloud Seeding'? IIT कानपुर के साइंटिस्ट से जानिए
क्लाउड सीडिंग जादू नहीं, विज्ञान है. बादलों में नमी के बिना यह सिर्फ आधी सफलता देती है. कई बार नहीं भी देती है. दिल्ली जैसे पॉल्यूशन वाले शहरों के लिए यह उम्मीद की किरण है. लेकिन असली समाधान नहीं है. वैज्ञानिक कहते हैं कि "सही बादल + सही नमी = सफल बारिश". अगली बार, शायद दिल्ली की हवा साफ हो जाए.
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने क्लाउड सीडिंग की. लेकिन यह कोशिश बेनतीजा रही. इस बीच मौसम वैज्ञानिक डॉ. अक्षय देओरास का कहना है कि फिलहाल मौसम की स्थिति इसके अनुकूल नहीं है. उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल रेन तभी संभव है जब बादलों में पर्याप्त नमी और ऊर्ध्वाधर विकास हो जो अभी दिल्ली में नहीं है.
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की दिशा में कदम बढ़ाया गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि राजधानी में पहली बार क्लाउड सीडिंग कराने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. इसकी सफल टेस्टिंग भी कर ली गई है.