देश में इन दिनों LPG यानी कुकिंग गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. मिडिल ईस्ट में चल रहे वॉर और सप्लाई चेन में आई मुश्किलों का असर अब भारत में भी दिखने लगा है.
हालांकि इस संकट का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है. टेलीकॉम सेक्टर ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति ज्यादा समय तक बनी रही तो इसका असर मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर भी पड़ सकता है.
टेलीकॉम कंपनियों को LPG नहीं मिल रहा
दरअसल, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली कंपनियों ने सरकार को बताया है कि उन्हें मिलने वाली LPG सप्लाई अचानक रोक दी गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 मार्च 2026 से कई टेलीकॉम टावर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को LPG की आपूर्ति बंद कर दी गई है.
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सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि पहले घरेलू उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराई जाए. ऐसे में इंडस्ट्री के सामने नया संकट खड़ा हो गया है.
टेलीकॉम कंपनियों को क्यों चाहिए LPG?
टेलीकॉम टावर बनाने की प्रक्रिया में गैल्वनाइजेशन जैसी तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिसमें LPG या गैस बेस्ड ईंधन की जरूरत पड़ती है. अगर यह सप्लाई बंद रहती है तो टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों का प्रोडक्शन धीमा पड़ सकता है या कुछ यूनिट्स को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ सकता है.
इसका सीधा असर देश में नए टेलीकॉम टावर लगाने और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर पड़ सकता है.
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भारत में मोबाइल नेटवर्क का बड़ा हिस्सा टेलीकॉम टावरों पर डिपेंड करता है. देश भर में लाखों टावर मोबाइल कॉल, इंटरनेट और डेटा सेवाओं को चलाते हैं.
अगर नए टावर लगना स्लो हो जाता है या नेटवर्क अपग्रेड रुक जाता है तो आने वाले समय में कनेक्टिविटी पर असर दिख सकता है. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से नेटवर्क कमजोर है, वहां स्थिति और मुश्किल हो सकती है.
टेलीकॉम बॉडी ने की सरकार से अपील
टेलीकॉम इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने सरकार से अपील की है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को जरूरी सेवाओं में शामिल किया जाए और टावर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योगों को LPG सप्लाई में प्राथमिकता दी जाए.
उनका कहना है कि भारत तेजी से डिजिटल इकॉनमी की तरफ बढ़ रहा है और ऐसे में नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित होना पूरे डिजिटल सिस्टम के लिए चुनौती बन सकता है.
पैनिक की स्थिति नहीं है
एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद होने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन अगर LPG सप्लाई में रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है तो नेटवर्क विस्तार और 5G रोलआउट की गति धीमी पड़ सकती है.
इससे टेलीकॉम कंपनियों की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और कुछ क्षेत्रों में नेटवर्क क्षमता बढ़ाने का काम भी रुक सकता है.
गौरतलब है कि LPG संकट का असर सिर्फ टेलीकॉम सेक्टर तक सीमित नहीं है. कई शहरों में होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार भी गैस की कमी से जूझ रहे हैं.
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं. सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया है.
भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर सीधे सप्लाई चेन पर पड़ता है.