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Beat Report: नौकरी के नाम पर चेहरा चोरी: AI और बायोमेट्रिक ठगी का नया साइबर जाल, साइबर विंग ने किया अलर्ट

साइबर ठगों ने लोगों को ठगने का नया तरीका तैयार कर लिया है और अब वे जॉब्स स्कैम के तहत लोगों को शिकार बना रहे हैं. इसमें वे आम लोगों की पहचान, डेटा और बायोमेट्रिक आदि को चोरी कर लेते हैं. फिर उस डेटा का गलत इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए गृह मंत्रालय के अंदर काम करने वाली एजेंसी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की एक यूनिट ने अलर्ट जारी किया है.

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साइबर ठगों का नया हथकंडा
साइबर ठगों का नया हथकंडा

देश में ऑनलाइन नौकरी की तलाश करने वाले लाखों युवाओं के लिए एक नया साइबर खतरा तेजी से सामने आ रहा है. गृह मंत्रालय (MHA) के तहत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की विशेष इकाई ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि साइबर अपराधी अब नकली नौकरी इंटरव्यू और फर्जी भर्ती प्रक्रियाओं के जरिए लोगों की बायोमेट्रिक पहचान चुराने की कोशिश कर रहे हैं. 

नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) ने कहा है कि अपराधी आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर जाल बिछा रहे हैं. यह देखने में पूरी तरह असली भर्ती प्रक्रिया जैसे लगते हैं. इनका मकसद नौकरी तलाश रहे लोगों से उनकी निजी और संवेदनशील जानकारी हासिल करना है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह खतरा सिर्फ ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं है. 

अब साइबर अपराधी फेस, आंखों और आवाज से जुड़ी पहचान का दुरुपयोग कर डिजिटल फ्रॉड, पहचान चोरी और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे अपराधों को अंजाम दे सकते हैं. 

कैसे शुरू यह साइबर फ्रॉड?

साइबर ठगी अक्सर एक आकर्षक नौकरी ऑफर से शुरू होती है, जिसके बाद अपराधी खुद को किसी प्रतिष्ठित कंपनी का HR अधिकारी या भर्ती एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर उम्मीदवारों से संपर्क करते हैं. 

कई मामलों में नौकरी से जुड़े ईमेल, वेबसाइट और दस्तावेज इतने असली दिखते हैं कि सामान्य व्यक्ति आसानी से धोखा खा सकते हैं. उम्मीदवारों को बताया जाता है कि उनका प्रोफाइल शॉर्टलिस्ट हो गया है और अगला चरण ऑनलाइन इंटरव्यू या डिजिटल वेरिफिकेशन का है. 

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इसके बाद वीडियो कॉल या विशेष ऐप के जरिए उम्मीदवारों से फेस स्कैन, लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग, आंखों की मूवमेंट टेस्ट या फेसियल वेरिफिकेशन जैसी प्रक्रियाएं पूरी करवाई जाती हैं. 

साइबर एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में इन वीडियो रिकॉर्डिंग्स और बायोमेट्रिक इनपुट्स को बाद में अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया. 

AI तकनीक ने बढ़ाई चुनौती?

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने इस तरह की धोखाधड़ी को बेहद खतरनाक बना दिया है. पहले अपराधी केवल बैंक डिटेल्स, OTP या पासवर्ड चोरी करने की कोशिश करते थे, लेकिन अब वे किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान को कॉपी करने में सक्षम हो रहे हैं. AI आधारित टूल्स की मदद से चेहरे के हावभाव, आंखों की गतिविधि और आवाज के पैटर्न का विश्लेषण किया जा सकता है. इसके जरिए अपराधी डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर नकली वीडियो और पहचान तैयार कर सकते हैं. 

एक्सपर्ट का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का साफ वीडियो और बायोमेट्रिक डेटा अपराधियों के हाथ लग जाए, तो उसका इस्तेमाल फर्जी KYC, बैंकिंग फ्रॉड या सरकारी पहचान दस्तावेजों में बदलाव के लिए किया जा सकता है. कुछ मामलों में मोबाइल नंबर को आधिकारिक पहचान पत्रों से जोड़ने या बदलने की कोशिश भी सामने आई है. 

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नौकरी तलाशने वाले क्यों बन रहे आसान निशाना?

देश में बड़ी संख्या में युवा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए नौकरी खोज रहे हैं। बेरोजगारी, बेहतर अवसरों की तलाश और जल्दी नौकरी पाने की चाहत कई बार लोगों को बिना जांच-पड़ताल के किसी भी ऑफर पर भरोसा करने के लिए मजबूर कर देती है. साइबर अपराधी इसी मानसिकता का फायदा उठाते हैं. 

साइबर ठग उम्मीदवारों को हाई सैलरी, वर्क फ्रॉम होम, तुरंत जॉइनिंग और गारंटीड सिलेक्शन जैसे लालच देते हैं. इसके अलावा उम्मीदवारों पर जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने का दबाव भी बनाया जाता है. 

कई बार कहा जाता है कि आज ही वेरिफिकेशन पूरा करें, सीट सीमित हैं या देरी होने पर मौका खत्म हो जाएगा आदि. विशेषज्ञों का मानना है कि यही जल्दबाजी लोगों को सबसे बड़ी गलती करने पर मजबूर करती है. 

किन तरीकों से होती है पहचान?

साइबर अपराधी कई स्तरों पर लोगों की निजी जानकारी इकट्ठा करते हैं. फेस स्कैन और लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग,आंखों की मूवमेंट और रेटिना वेरिफिकेशन,आधार और PAN कार्ड की कॉपी,बैंकिंग डिटेल्स,मोबाइल नंबर और ईमेल जानकारी,वॉइस सैंपल आदि इकट्ठे करते हैं. AI तकनीक की मदद से यह सारी जानकारी मिलाकर एक डिजिटल पहचान तैयार की जा सकती है. बाद में इसका इस्तेमाल बैंक अकाउंट खोलने, लोन लेने या ऑनलाइन फ्रॉड के लिए किया जा सकता है. 

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फर्जी भर्ती प्रक्रिया की पहचान कैसे करें?

गृह मंत्रालय की साइबर विंग ने कुछ महत्वपूर्ण तरीके बताए हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी. 

1.संदिग्ध ईमेल और डोमेन : अगर भर्ती से जुड़ा ईमेल किसी सामान्य Gmail या Yahoo अकाउंट से भेजा गया है, तो उसकी जांच जरूर करें. प्रतिष्ठित कंपनियां अधिकतर आधिकारिक डोमेन का उपयोग करती हैं. 

2.जरूरत से ज्यादा जानकारी मांगना: अगर इंटरव्यू के शुरुआती चरण में ही आधार, बैंक डिटेल्स या बायोमेट्रिक डेटा मांगा जा रहा है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है. 

3.अत्यधिक दबाव बनाना : फर्जी भर्ती करने वाले लोग उम्मीदवारों को सोचने का समय नहीं देते. वे जल्दी निर्णय लेने के लिए दबाव डालते हैं. 

4.कंपनी की जानकारी अस्पष्ट होना : अगर कंपनी की वेबसाइट अधूरी है, सोशल मीडिया उपस्थिति नहीं है या संपर्क जानकारी संदिग्ध लग रही है, तो सावधान रहें.

5.वीडियो वेरिफिकेशन पर जोर : अनावश्यक फेसियल स्कैनिंग या आंखों की पहचान की मांग साइबर जाल का हिस्सा हो सकती है. 

डीपफेक तकनीक बन रही नया हथियार

AI आधारित डीपफेक तकनीक साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बनती जा रही है. इस तकनीक से किसी व्यक्ति का नकली वीडियो या ऑडियो तैयार किया जा सकता है. अगर अपराधियों के पास किसी व्यक्ति की पर्याप्त वीडियो फुटेज और आवाज मौजूद हो, तो वे उसके नाम से फर्जी कॉल, वीडियो संदेश या वित्तीय अनुरोध कर सकते हैं।दुनिया भर में ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जहां डीपफेक का इस्तेमाल कर लोगों के बैंक खातों से पैसे निकाले गए या रिश्तेदारों को ठगा गया. 

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MHA I4C साइबर एजेंसियां क्यों चिंतित हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल भर्ती प्रक्रियाओं के विस्तार के साथ ऐसे अपराधों का दायरा भी बढ़ा है. वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन इंटरव्यू अब सामान्य प्रक्रिया बन चुके हैं. ऐसे में अपराधियों के लिए नकली इंटरव्यू सेटअप तैयार करना आसान हो गया है. वे वीडियो कॉलिंग ऐप्स, नकली वेबसाइट और AI टूल्स की मदद से लोगों को भ्रमित कर रहे हैं. गृह मंत्रालय की साइबर इकाइयां लगातार ऐसे मामलों की निगरानी कर रही हैं और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चला रही हैं. 

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

डिजिटल युग में ऑनलाइन नौकरी की प्रक्रिया तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ साइबर खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं. साइबर अपराधी अब केवल पैसों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों की डिजिटल पहचान और बायोमेट्रिक डाटा को निशाना बना रहे हैं. AI तकनीक ने जहां कामकाज को आसान बनाया है, वहीं अपराधियों को भी नए हथियार दे दिए हैं. 

हर नौकरी तलाशने वाले व्यक्ति के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह किसी भी ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता बरते. विशेषज्ञों का कहना है कि आज की डिजिटल दुनिया में आपका चेहरा, आवाज और बायोमेट्रिक पहचान सबसे मूल्यवान जानकारी है. यदि यह गलत हाथों में चली जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. इसलिए हर ऑनलाइन नौकरी ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसकी जांच-पड़ताल करना जरूरी है. थोड़ी सी सावधानी आपकी पहचान, करियर और आर्थिक सुरक्षा को बचा सकती है. 

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