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CCTV कैमरे को लेकर सरकार का नया नियम, हो रही थी जासूसी, पाकिस्तान पहंच रहा था डेटा

भारत में CCTV कैमरों की सिक्योरिटी पर हाल ही में गंभीर सवाल उठे. रिपोर्ट्स आईं की भारत के कई रेलवे स्टेशन्स पर पाकिस्तानी ISI के सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और डेटा पाकिस्तान जा रहा है. अब सरकार हरकत में लग रही है. लेकिन सवाल ये है कि करोड़ों सीसीटीवी कैमरों का क्या जो सुरक्षित नहीं हैं? सरकार ने गाइडलाइन जारी कर दी है.

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CCTV को लेकर सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है
CCTV को लेकर सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है

भारत सरकार CCTV कैमरों को लेकर सख्त हो गई है.  देश में सीसीटीवी कैमरों को लेकर बड़ा खतरा सामने आया है. अब यह सिर्फ निगरानी का मामला नहीं रहा, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा बन गया है.

हाल ही में जांच एजेंसियों ने एक नेटवर्क पकड़ा है, जिसमें सीसीटीवी कैमरों से रिकॉर्ड डेटा पाकिस्तान भेजा जा रहा था. कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है. सरकार ने एक गाइडलाइन जारी की है. 

यह भी पढ़ें: PAK की नापाक साजिश! सेना की जासूसी के लिए दिल्ली से कश्मीर तक लगवा रहा था CCTV कैमरे

CCTV की सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं. कंपनियों को अगाह कर दिया गया है कि जो मार्केट में सीसीटीव कैमरे बेचे जा रहे हैं उसमे स्टैंडर्ड फॉलो किए जाएं. सरकार ने ये भी कहा है कि सराकरी डिपार्टमेंट क्राटेरिया मैच ना करने वाली कंपनियों से सीसीटीवी नहीं खरीदें.

भारत में कमजोर है सीसीटीवी की सिक्योरिटी!

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पहले से ही विदेशी सीसीटीवी और सर्विलांस सिस्टम पर सवाल उठते रहे हैं. खासकर चीनी डिवाइस को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि इंटरनेट से जुड़े कैमरों को दूर बैठकर कंट्रोल किया जा सकता है और डेटा बाहर भेजा जा सकता है.

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अब सवाल ये है कि क्या भारत में लगे सीसीटीवी कैमरे सुरक्षित हैं. जवाब थोड़ा चिंता बढ़ाने वाला है. साइबर रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश में हजारों सीसीटीवी कैमरे खुले इंटरनेट पर एक्सपोज्ड हैं और उनमें बेसिक सिक्योरिटी की कमी है. ऐसे कैमरे हैकिंग और डेटा लीक के लिए आसान टारगेट बन जाते हैं.

CERT-In और दूसरी साइबर एजेंसियों ने भी कई बार चेतावनी दी है कि IP कैमरों में सिक्योरिटी खामियां पाई जाती हैं. डिफॉल्ट पासवर्ड, कमजोर सॉफ्टवेयर और अपडेट की कमी सबसे बड़ी वजह है. ऐसे डिवाइस को इंटरनेट पर स्कैन करके हैक किया जा सकता है.

दूर से हैक हो सकते हैं कैमरे

एजेंसियों का कहना है कि हैकर्स इन कैमरों को बॉटनेट में बदल सकते हैं. यानी हजारों कैमरे एक साथ कंट्रोल किए जा सकते हैं. Cyber Swachhta Kendra के तहत भी ऐसे खतरों को लेकर अलर्ट जारी किया जाता है. 

इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. PIB की प्रेस रिलीज में सीसीटीवी को लेकर बड़े फैसले बताए गए हैं. सरकार ने कहा है कि अब सीसीटीवी के लिए सख्त सिक्योरिटी नियम लागू होंगे. हर डिवाइस के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की पूरी जानकारी देनी होगी.

इसमें चिप, फर्मवेयर और सोर्स तक की डिटेल शामिल होगी. ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई संदिग्ध सोर्स तो नहीं है. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी कैमरे में बैकडोर नहीं होना चाहिए. यानी ऐसा कोई रास्ता नहीं होना चाहिए जिससे डेटा बाहर भेजा जा सके.

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सीसीटीवी खरीदने से पहले जरूर देखें सर्टिफिकेशन

हर सीसीटीवी कैमरे को सर्टिफिकेशन से गुजरना होगा. यह टेस्टिंग सिर्फ सरकारी मान्यता प्राप्त लैब में होगी. बिना टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के कोई भी कैमरा भारत में नहीं बिक सकेगा.

सरकारी विभागों को भी निर्देश दिए गए हैं. वे सिर्फ उन्हीं कैमरों को खरीदेंगे जो इन नियमों को फॉलो करते हैं. साथ ही सभी मंत्रालयों को अपने CCTV सिस्टम की सिक्योरिटी जांचने के निर्देश दिए गए हैं.

चीनी सीसीटीवी कैमरों पर अपना स्टिकर लगा कर बेचती हैं कई भारतीय कंपनियां

चिंता वाली बात ये है कि देश में करोड़ों सीसीटीवी कैमरे पब्लिक प्लेस पर लगे हैं. सीसीटीवी की सिक्योरिटी पर काफी समय से उतना ध्यान नहीं दिया गया. हैकर्स या क्रिमिनल्स समय समय पर सीसीटीवी हैक करके सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं. भले ही सरकार ने नए खरीद पर सख्ती लगाई है, लेकिन उन पुराने कैमरों का क्या? 

दरअसल सीसीटीवी की सिक्योरिटी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनें पर टिकी होती है. कंपनियां आम तौर पर चीन से कैमरा इंपोर्ट करके अपनी ब्रांडिंग करके भारत में बेचती हैं. उनके पास अपना सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन तक नहीं होता है. इसके लिए भी वो चीनी सॉफ्टवेयर पर भरोसा करती हैं. ऐसे में बैकडोर एंट्री यानी हैकिंग के चासेस बढ़ जाते हैं. 

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भारत में सीसीटीवी कैमरे बेचने वाली कंपनियों पर सरकार को शिकंजा कसना होगा. खास तौर पर ऐसी कंपनियां जो चीन से कैमरा इंपोर्ट करके अपनी ब्रांडिंग के साथ बेचते हैं और सॉफ्टवेयर तक अपना नहीं बनाते हैं. इस तरह के चीनी कैमरे सस्ते मिलते हैं और सर्विस कॉस्ट भी कम होती है. इसलिए ये बाजार में सबसे सस्ते और ज्यादा एवेलेबल होते हैं. 

दिलचस्प ये है कि कई भारतीय ब्रांड चीनी कैमरों पर अपना स्टिकर लगा कर, सॉफ्टवेयर या फर्मवेयर में थोडे़ बदलाव करके ऑनलाइन-ऑफलान धड़ल्ले से बेच रही हैं. सोचिए आप घर के अंदर इन कैमरों को लगाते हैं और वो फुटेज चीनी हैकर्स को मिल रहा हो?

CP Plus ने क्या कहा?

इस बीच इंडस्ट्री ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है. CP PLUS के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य खेमका ने कहा, 'भारत ने सीसीटीवी सिक्योरिटी के लिए सख्त नियम लागू करके बड़ा कदम उठाया है. जब कई देश अभी भी कमजोरियों से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने लीडरशिप दिखाई है'

हमारे हिसाब से यह बहुत अहम कदम है. हार्डवेयर की पूरी जानकारी, सिक्योरिटी टेस्टिंग और सरकारी जांच जैसे नियम CCTV सिस्टम को डिजाइन से ही सुरक्षित बनाएंगे. इससे आम लोगों और संस्थानों का भरोसा भी बढ़ेगा.

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एक जैसी राष्ट्रीय पॉलिसी से पूरा सिस्टम स्टैंडर्ड बनेगा. हर कैमरा एक ही नियम पर चलेगा. इससे कमजोर कड़ी खत्म होगी और साइबर खतरे कम होंगे. इंडस्ट्री भी इसके लिए तैयार है. सैकड़ों सर्टिफाइड मॉडल पहले ही बाजार में आ चुके हैं.

अब जब AI, IoT और क्लाउड के साथ सर्विलांस आगे बढ़ रहा है, तो सिक्योरिटी सबसे जरूरी है. यह कदम भारत को ग्लोबल लेवल पर मजबूत बनाएगा और सुरक्षित सर्विलांस का भविष्य तय करेगा.
 

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