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अहमदाबाद कॉमनवेल्थ में लौटेगी आर्चरी, बरसेंगे मेडल? भारतीय तीरंदाज दीपिका-तरुणदीप को कमबैक का भरोसा

2030 commonwealth games: भारत में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी से आर्चरी समेत कई खेलों की वापसी की उम्मीद बढ़ी है. दीपिका कुमारी और तरुणदीप राय ने कहा कि 2010 की तरह यह इवेंट खेलों को नई ऊंचाई देगा. ग्लासगो 2026 में सीमित खेल होंगे, लेकिन अहमदाबाद 2030 में बड़ा और बेहतर आयोजन देखने को मिल सकता है.

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दीप‍िका कुमारी (Photo: Reuters)
दीप‍िका कुमारी (Photo: Reuters)

Amdavad 2030 Commonwealth Games: भारत एक बार फिर कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए तैयार है. 2030 में गुजरात के अहमदाबाद में होने वाले इस मेगा इवेंट को 'बिगर और बेटर' बनाने की तैयारी है. खास बात यह है कि शूटिंग, रेसलिंग, बैडमिंटन और आर्चरी जैसे खेल, जो भारत के लिए बड़े मेडल लाते रहे हैं, उनकी वापसी की उम्मीद जताई जा रही है.

इससे पहले स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स का संस्करण छोटा रहेगा, जिसमें सिर्फ 10 खेल और 6 पैरा स्पोर्ट्स शामिल होंगे. ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों की नजर अब 2030 पर टिकी है.

भारतीय स्टार रिकर्व तीरंदाज दीप‍िका कुमारी और तरुणदीप रॉय ने आर्चरी की वापसी को लेकर भरोसा जताया है. दीपिका, जिन्होंने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए महिलाओं के व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में पहला गोल्ड जीता था, ने उस पल को अपने करियर का टर्निंग पॉइंट बताया.

दीपिका ने साई मीड‍िया से बातचीत में कहा कि 16 साल की उम्र में मिला यह गोल्ड उनके लिए बड़ा मौका था, जिसने न सिर्फ उनके करियर को दिशा दी बल्कि भारत में आर्चरी की पहचान भी बढ़ाई. उन्होंने कहा कि 2010 में देश में इस खेल को लेकर जागरूकता बढ़ी और लोग इसे करीब से समझ पाए.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह भारत ने 2010 में शानदार आयोजन किया था, उसी तरह 2030 में यह उससे भी बड़ा और बेहतर होगा और आर्चरी की वापसी जरूर होगी.
वहीं, तीन बार के ओलंपियन तरुणदीप राय ने 2010 के बाद आर्चरी में आए बदलावों पर रोशनी डाली. उन्होंने बताया कि उस समय देश में करीब 400 आर्चर्स थे, जो अब बढ़कर 30,000 से ज्यादा हो चुके हैं. साथ ही, करीब 100 ऐसे खिलाड़ी हैं जो किसी भी समय भारतीय टीम में जगह बना सकते हैं.

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तरुणदीप ने कहा कि बड़े इवेंट की मेजबानी से खेलों के इकोसिस्टम पर गहरा असर पड़ता है. उन्होंने लॉस एंजेल‍िस 2028 ओलंप‍िक में मेडल जीतने का लक्ष्य भी रखा है और कहा कि 2030 CWG से नई प्रतिभाओं को प्रेरणा मिलेगी.

पूर्व अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज जयंत तालुकादार ने भी भरोसा जताया कि 2010 के बाद जिस तरह अकादमियों और खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी, वैसा ही असर 2030 में भी देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि घरेलू दर्शकों के सामने खेलने से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है और बेहतर प्रदर्शन निकलकर आता है.

कुल मिलाकर, भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स को सिर्फ एक स्पोर्टिंग इवेंट नहीं बल्कि खेलों के भविष्य को नई दिशा देने वाले मौके के रूप में देख रहा है.

 

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