फुटबॉल में साजिश की कहानियां नई नहीं हैं, लेकिन जब बात लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना की होती है तो यह बहस खत्म होने का नाम नहीं लेती. 2022 के कतर विश्व कप में शुरू हुई 'रेफरी की मेहरबानी' वाली चर्चा अब 2026 फीफा विश्व कप में फिर भड़क उठी है. इस बार वजह बना प्री-क्वार्टर फाइनल, जहां अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई. लेकिन मुकाबले के बाद जीत से ज्यादा चर्चा रेफरी और VAR (Video Assistant Referee) के फैसलों की होने लगी.
मिस्र का आरोप- FIFA मेसी को बाहर नहीं होने देना चाहता था
मुकाबले में मिस्र ने 2-0 की बढ़त बनाने वाला गोल कर दिया था. 58वें मिनट में मुस्तफा जिको ने गेंद नेट में पहुंचाई, लेकिन VAR ने बिल्ड-अप में मारवान अटिया द्वारा लिसांद्रो मार्टिनेज पर कथित फाउल दिखाया. रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सियर ने ऑन-फील्ड रिव्यू के बाद गोल रद्द कर दिया.
यहीं से विवाद शुरू हुआ. अर्जेंटीना ने इसके बाद अंतिम 13 मिनट में तीन गोल दागकर मैच पलट दिया.
मैच के बाद मिस्र के कोच होसम हसन ने बेहद गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था, 'शायद वे चाहते थे कि विश्व चैम्पियन टूर्नामेंट में बना रहे. शायद वे चाहते थे कि मेसी की दौड़ जारी रहे.' उन्होंने यहां तक कह दिया, 'अब मैं कभी विश्व कप नहीं देखूंगा, क्योंकि इस प्रतियोगिता में न्याय नहीं है.'

गोल करने वाले मुस्तफा जिको भी रेफरी पर भड़क उठे. उनका कहना था कि रेफरी के फैसलों ने मिस्र की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया और टूर्नामेंट को अर्जेंटीना की ओर मोड़ दिया गया.
क्या VAR प्रोटोकॉल का गलत इस्तेमाल हुआ?
विवाद सिर्फ गोल रद्द होने तक सीमित नहीं है. पूर्व प्रीमियर लीग रेफरी ग्राहम स्कॉट ने माना कि यह सामान्य फुटबॉल संपर्क था और इतनी दूर हुई घटना पर VAR को दखल नहीं देना चाहिए था. उनके अनुसार जिस फाउल के आधार पर गोल रद्द किया गया, उसके बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के पास गेंद वापस हासिल करने के कई मौके थे. ऐसे में इसे Attacking Possession Phase (APP) का हिस्सा मानना VAR प्रोटोकॉल के खिलाफ था.
पूर्व FIFA रेफरी फर्नांडो ग्युरेरो ने भी इसी राय का समर्थन किया. उनका कहना था कि रेफरी और VAR दोनों ने प्रोटोकॉल की गलत व्याख्या की, जिसका सीधा नुकसान मिस्र को हुआ.
Cancelled it for Egypt but VAR didn’t even check when it was Argentina 🤣 pic.twitter.com/5ewemLIjRv https://t.co/UrI7A7660K
— AB⚕ (@AbsoluteBruno) July 7, 2026
यही नियम बाकी टीमों पर क्यों नहीं?
यहीं से बहस और गहरी हो जाती है. कुछ ही दिन पहले FIFA के रेफरिंग प्रमुख पियरलुइजी कोलिना ने कहा था कि अधिकारियों को सामान्य शारीरिक संपर्क पर खेल नहीं रोकने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मैच की रफ्तार बनी रहे.
लेकिन अगर यही मानक है, तो फिर मिस्र का गोल क्यों रद्द हुआ? इसी सवाल ने पुराने विवाद भी फिर जिंदा कर दिए हैं.
कतर से शुरू हुई बहस, 2026 में फिर भड़की
इन सभी घटनाओं को जोड़कर सोशल मीडिया पर लंबे समय से यह नैरेटिव बनाया जाता रहा है कि अर्जेंटीना को अहम मौकों पर रेफरी का फायदा मिलता है.
मिस्र को पेनल्टी भी नहीं मिली
मिस्र का दावा है कि मैच के अंतिम दौर में मोहम्मद सलाह बॉक्स के अंदर संपर्क के बाद गिरे थे, जबकि एक अन्य खिलाड़ी की जर्सी भी खींची गई थी. इसके बावजूद VAR ने समीक्षा तक नहीं की.
पूर्व इंग्लैंड स्टार इयान राइट ने कहा कि यदि अर्जेंटीना के खिलाफ दूर हुई घटना पर गोल वापस लिया जा सकता है, तो मिस्र की पेनल्टी अपील की भी कम से कम समीक्षा होनी चाहिए थी.
🚨GRAVE - Veja todos os lances em que a Argentina foi favorecida contra o Egito pic.twitter.com/d9LEdxQ3ES
— SPACE LIBERDADE (@NewsLiberdade) July 8, 2026
क्या सचमुच अर्जेंटीना को मिल रही है विशेष छूट?
फिलहाल इसका कोई ठोस सबूत नहीं है कि FIFA किसी टीम का पक्ष ले रहा है. बड़े टूर्नामेंटों में विवादित फैसले हमेशा बहस का विषय रहे हैं. लेकिन जब एक जैसी परिस्थितियों में अलग-अलग फैसले दिखते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है.
मिस्र की हार के बाद यह बहस पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है. अब अर्जेंटीना के हर बड़े मैच में रेफरी और VAR के फैसले पहले से ज्यादा बारीकी से परखे जाएंगे. सवाल सिर्फ इतना है कि यह महज संयोग है या फिर वास्तव में विश्व चैम्पियन टीम को बाकी देशों से अलग नजरिए से देखा जा रहा है.