विराट कोहली और रोहित शर्मा ने भारतीय क्रिकेट को एक दशक से ज्यादा समय तक अपने कंधों पर उठाया है. दोनों ने मिलकर वर्ल्ड कप जिताए, रिकॉर्ड तोड़े और ऐसे मैच जिताए जिन्हें हार मान लिया गया था. लेकिन खेल का सबसे बड़ा सच यही है कि यहां अतीत नहीं, वर्तमान चलता है...और अगले महीने इंग्लैंड में होने वाली तीन वनडे मैचों की सीरीज इन दोनों महान बल्लेबाजों के वर्तमान और भविष्य पर बड़ा असर डाल सकती है.
यह सीरीज सिर्फ तीन मैचों की नहीं है. यह 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तरफ बढ़ते सफर का पहला बड़ा विदेशी इम्तिहान है.
पिछले साल अक्टूबर में भारत ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था. शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम सीरीज 2-1 से हार गई. उस दौरे में विराट कोहली ने पहले दो मैचों में शून्य पर विकेट गंवाया और फिर सिडनी में 74 रन बनाकर आलोचकों को जवाब दिया. रोहित शर्मा ने 8, 73 और नाबाद 121 रन की पारियां खेलीं, लेकिन टीम को सीरीज नहीं बचा सके.
असल कहानी आंकड़ों से आगे शुरू होती है....
भारत में वनडे क्रिकेट की पिचें बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग मानी जाती हैं. छोटी बाउंड्री, सपाट विकेट और तेज आउटफील्ड. लेकिन इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में तस्वीर अलग होती है. वहां गेंद हवा और पिच दोनों से मदद लेती है. उछाल ज्यादा होती है, गलती की गुंजाइश कम होती है और बड़े मैदानों पर टाइमिंग से निकला शॉट भी कई बार फील्डर के हाथों में समा जाता है.
ऑस्ट्रेलिया में कोहली की शुरुआती नाकामी इसी वजह से चर्चा का विषय बनी थी. मिचेल स्टार्क और जेवियर बार्टलेट ने उन्हें ऐसी परिस्थितियों में चुनौती दी, जहां जरा सी तकनीकी चूक महंगी पड़ गई. सोशल मीडिया से लेकर टीवी स्टूडियो तक सवाल उठने लगे. कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि कोहली का समय खत्म हो चुका है.
लेकिन क्रिकेट का इतिहास बताता है कि महान खिलाड़ी मुश्किल परिस्थितियों से ही अपना जवाब लिखते हैं. सिडनी की अपेक्षाकृत आसान पिच पर कोहली ने 74 रन बनाए और फिर भारत लौटकर दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के खिलाफ रन बनाकर सारी बहसों का रुख बदल दिया. रोहित भी घरेलू परिस्थितियों में लगातार प्रभावशाली रहे. मगर असली परीक्षा घर में नहीं, विदेश में है.
यही वजह है कि इंग्लैंड दौरा दोनों के लिए बड़ा इम्तिहान है. यहां रन बनाकर रोहित और विराट यह दिखा सकते हैं कि वे अभी भी विदेशी पिचों पर मैच जिताने का दम रखते हैं. 2027 वर्ल्ड कप में भी उन्हें दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की ऐसी ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना होगा, जैसी इंग्लैंड और न्यूजीलैंड में मिलती हैं.
हाल के महीनों में विराट का एक इंटरव्यू भी काफी चर्चा में रहा, जिसमें उनके बयान से यह संकेत मिला कि टीम मैनेजमेंट और सिस्टम के भीतर हर कोई उनके भविष्य को लेकर एकमत नहीं है. ऐसे माहौल में किसी भी खिलाड़ी का सबसे बड़ा हथियार सिर्फ और सिर्फ प्रदर्शन होता है.
रनों से बड़ी कोई दलील नहीं होती
भारत को इस साल घर में वेस्टइंडीज, श्रीलंका और उसके बाद जनवरी में जिम्बाब्वे जैसी टीमों के खिलाफ वनडे खेलने हैं. वहां रोहित और विराट से रन आने की उम्मीद लगभग तय मानी जा सकती है. लेकिन चयनकर्ताओं, आलोचकों और क्रिकेट जगत की नजरें उन पारियों पर रहेंगी जो इंग्लैंड, न्यूजीलैंड या दक्षिण अफ्रीका जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खेली जाएंगी.
इसीलिए अगले महीने की यह सीरीज साधारण द्विपक्षीय मुकाबला नहीं है. यह उन दो बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा है, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट का स्वर्णिम अध्याय लिखा है. अगर रोहित शर्मा और विराट कोहली इंग्लैंड में बल्ले से जवाब देते हैं और भारत को सीरीज जिताते हैं, तो 2027 वर्ल्ड कप तक का उनका रास्ता काफी हद तक साफ हो सकता है. क्योंकि महान खिलाड़ियों के करियर में कुछ सीरीज ट्रॉफी से बड़ी होती हैं. इंग्लैंड की यह सीरीज शायद उन्हीं में से एक है.
भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 14 जुलाई 2026 को बर्मिंघम में खेला जाएगा. इसके बाद दूसरा वनडे 16 जुलाई को कार्डिफ (डे-नाइट) में होगा, जबकि सीरीज का आखिरी मुकाबला 19 जुलाई को ऐतिहासिक लॉर्ड्स में खेला जाएगा. तीनों मुकाबलों में भारत की नजर सीरीज जीत के साथ 2027 वर्ल्ड कप की तैयारियों को मजबूत करने पर होगी.