भारतीय टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपनी कप्तानी, टीम चयन, संजू सैमसन, हार्दिक पंड्या, जसप्रीत बुमराह और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं. आकाश चोपड़ा के खास शो ‘बैठ&बोल’ (Baith&Bol) के पहले एपिसोड में सूर्यकुमार बेहद बेबाक और भावुक अंदाज में नजर आए. शो का पहला एपिसोड 28 अगस्त 2026 को रिलीज होगा.
बातचीत के दौरान आकाश चोपड़ा ने सूर्या के सामने कप्तानी से जुड़ा बेहद सीधा सवाल रखा. उन्होंने कहा, 'आप कप्तान हैं. अगली बार जब टीम चुनी जाती है तो आपका नाम नहीं ...'
सूर्यकुमार ने इस सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया. उन्होंने कहा कि जब उनका नाम टीम में नहीं था, तब भी उन्होंने इसी तरह मुस्कुराया था.
सूर्या ने कहा, 'ऐसे ही स्माइल किया था मैंने जब मेरा नाम नहीं था. अगर उन्होंने सोचा कि आगे बढ़ने के लिए यह बेहतर फैसला है, तो उन्होंने वह फैसला लिया.'
यानी चयनकर्ताओं के फैसले को लेकर सूर्या ने किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई और साफ किया कि अगर टीम के हित में कोई दूसरा फैसला बेहतर समझा गया, तो वह उसे स्वीकार करेंगे.
Surya spoke his heart out — honest, emotional and straight from the heart. Baith&Bol Episode-1 releasing on 28 August 2026, 6 P.M. pic.twitter.com/7TDoCX0OvS
— Aakash Chopra (@cricketaakash) August 23, 2026
‘एक होता है हो जाएगा और एक होता है करना पड़ेगा’
सूर्यकुमार ने टीम की मानसिकता पर भी बात की. उन्होंने बताया कि कब टीम को महसूस हुआ कि वह कुछ खास करने जा रही है.
उन्होंने कहा, 'एक होता है हो जाएगा और एक होता है करना पड़ेगा.'
सूर्या के मुताबिक, जब आप किसी मुकाबले में थोड़ा हारते हैं या रास्ते में कोई छोटी-सी बाधा आती है, तो कई बार उससे टीम को अपनी असली ताकत और लक्ष्य का एहसास होता है.
उन्होंने अहमदाबाद में भारत-दक्षिण अफ्रीका मुकाबले का जिक्र करते हुए कहा कि उस मैच के बाद टीम को महसूस हुआ कि अब वह कुछ खास करने वाली है.
बातचीत के दौरान आकाश चोपड़ा ने संजू सैमसन से जुड़ा दिलचस्प किस्सा छेड़ा.
उन्होंने सूर्या से कहा, 'संजू सैमसन को तुमने कहा- ‘सात मैच जा, जी ले अपनी जिंदगी संजू.’
इसके बाद आकाश ने कप्तान सूर्या के सामने असली दुविधा रखी- 'आखिरकार भारतीय टीम में चयन तो हो जाता है, लेकिन आप उसे खिला नहीं सकते.'
यानी खिलाड़ी टीम में चुन लिया जाता है, लेकिन प्लेइंग इलेवन में जगह देना संभव नहीं होता. इस पर सूर्यकुमार ने माना कि संजू को लेकर फैसला लेना उनके लिए बेहद मुश्किल था.
सूर्या ने कहा, 'वो वास्तव में मेरा सबसे मुश्किल फैसला था.'
इसके बाद सूर्यकुमार ने उस खिलाड़ी के सफर की तारीफ करते हुए कहा, 'आप टूर्नामेंट के बीच में शुरुआत करते हैं, फाइनल खेलते हैं और फिर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बन जाते हैं.'
सूर्या कहते है, 'उसके लिए पहले भी सम्मान था, लेकिन इसके बाद उसके लिए मेरा सम्मान और भी बढ़ गया.'
यानी सूर्या ने खुद माना कि जिस खिलाड़ी को टूर्नामेंट के बीच में मौका मिला, उसने फाइनल तक पहुंचकर और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनकर उनके मन में अपने लिए सम्मान और बढ़ा लिया.
पाकिस्तान के खिलाफ मैच में कब महसूस हुआ असली दबाव?
इसके बाद बातचीत पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले पर पहुंची. आकाश चोपड़ा ने पूछा कि क्या इस मैच की वजह से दबाव ज्यादा था.
सूर्या ने कहा कि उन्हें शुरुआत में बिल्कुल दबाव महसूस नहीं हुआ. उनके मुताबिक, 10वें या 11वें ओवर तक सब सामान्य था.
लेकिन असली दबाव करीब 13वें ओवर के आस-पास महसूस हुआ, जब हार्दिक पंड्या बल्लेबाजी कर रहे थे और वह आउट हो गए.
सूर्या ने कहा, 'मैं आपको बता नहीं सकता कि उस वक्त पसीना कहां-कहां से निकल रहा था.'
यानी हार्दिक के विकेट ने कप्तान सूर्या की धड़कनें बढ़ा दी थीं और यहीं से उन्हें मैच का असली दबाव महसूस हुआ.
'बुमराह की 24 गेंदें ‘सोने’ जैसी'
इसके बाद बातचीत जसप्रीत बुमराह पर हुई. आकाश ने पूछा कि कप्तान के नजरिए से टीम में बुमराह जैसा खिलाड़ी होना कितना बड़ा फायदा है.
सूर्या ने बुमराह की 24 गेंदों को बेहद कीमती बताया.
उन्होंने कहा, 'उसके पास 24 गेंदें हैं, वे सोने जैसी हैं. उनका समझदारी से इस्तेमाल करना होता है.'
सूर्या ने यह भी बताया कि टीम में बुमराह को लेकर एक मजेदार बात कही जाती है कि वह 24 गेंदों के लिए बल्लेबाजी नहीं करते, बल्कि 16 गेंदों के लिए बल्लेबाजी करते हैं.
‘वह आकर कहता था- मैं आपका काम कर दूंगा’
सूर्यकुमार ने बुमराह के नेतृत्व वाले पहलू पर भी बात की. उन्होंने बताया कि कई मौकों पर बुमराह को असहजता महसूस होती थी, लेकिन वह अपनी परेशानी को लेकर ज्यादा बात करने के बजाय टीम के काम को प्राथमिकता देते थे.
वह आकर कहते थे, 'मैं आपका काम कर दूंगा.'
सूर्या के लिए यही बुमराह की खासियत है- वह सिर्फ अपनी भूमिका निभाने वाला खिलाड़ी नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर कप्तान का बोझ भी साझा करने वाला साथी है.
2023 की याद और अहमदाबाद का ‘कर्स’
बातचीत का एक बेहद भावुक हिस्सा अहमदाबाद के उसी मैदान से जुड़ा था, जहां 2023 में भारतीय टीम को निराशा मिली थी.
सूर्यकुमार ने कहा कि इस बार उनके दिमाग में यह बात थी कि शायद उन्हें दोबारा ऐसा मौका न मिले.
उन्होंने बताया कि लोग उस स्टेडियम को लेकर काफी बातें कर रहे थे. कहा जा रहा था कि बड़े टूर्नामेंट में भारतीय टीम यहां नहीं जीतती और यह मैदान जैसे ‘कर्स्ड’ है.
लेकिन सूर्या के दिमाग में इस बार एक अलग ही बात चल रही थी.
उन्होंने कहा, 'मुझे कुछ ऐसा करना है जिससे यह बदल जाए.'
यानी सूर्या सिर्फ मुकाबला जीतना नहीं चाहते थे, बल्कि अहमदाबाद के मैदान से जुड़ी उस नकारात्मक कहानी को बदलने का जुनून उनके अंदर था.
‘लोग मुझे कैसे याद रखें?’
बातचीत के अंत में सूर्या से बेहद दिलचस्प सवाल पूछा गया- आप चाहते हैं कि आपको किस तरह याद किया जाए?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘बैठ&बोल’ के पहले एपिसोड में सूर्या और कौन से पर्दे के पीछे के राज खोलते हैं.