इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर के सबसे बड़े विश्व रिकॉर्ड को चुनौती दे रहे हैं. वह टेस्ट इतिहास में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं और मास्टर ब्लास्टर के रिकॉर्ड से अब सिर्फ 1643 रन दूर हैं. इसी बीच सचिन ने रूट की प्रतिभा को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि इंग्लिश बल्लेबाज के करियर की शुरुआत में ही उन्हें अंदाजा हो गया था कि यह खिलाड़ी आगे चलकर बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगा.
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर नेReddit पर आयोजित 'आस्क मी एनीथिंग' (AMA) सेशन में रूट की रिकॉर्ड की ओर बढ़ती दावेदारी पर सवाल का जवाब दिया. उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा उन्हें बहुत ऊंचे स्तर का खिलाड़ी माना है. उनके पहले टेस्ट मैच में ही मुझे यकीन हो गया था कि वह आगे चलकर बड़ा नाम कमाएंगे.'
रूट ने भारत के खिलाफ किया था डेब्यू
जो रूट ने दिसंबर 2012 में भारत के खिलाफ नागपुर टेस्ट से अपने करियर का आगाज किया था. उस मुकाबले में सचिन तेंदुलकर भी भारतीय टीम का हिस्सा थे. रूट ने पहली पारी में 229 गेंदों का सामना करते हुए 73 रन बनाए थे, जबकि दूसरी पारी में 20 रन बनाकर नाबाद रहे थे. वो मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ था.
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जो रूट अब तक 169 टेस्ट मैचों की 309 पारियों में 14278 रन बना चुके हैं. उनके सामने अब सचिन तेंदुलकर का 15921 रनों का रिकॉर्ड है. सचिन ने 200 टेस्ट मैचों की 329 पारियों में यह मुकाम हासिल किया था. टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने का यह रिकॉर्ड अब तक सचिन के नाम है.
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वनडे क्रिकेट को लेकर सचिन का खास सुझाव
एएमए सेशन के दौरान सचिन तेंदुलकर से उनके पसंदीदा गैर-भारतीय बल्लेबाजों के बारे में भी पूछा गया. उन्होंने इंग्लैंड के हैरी ब्रूक और जो रूट के अलावा ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज स्टीव स्मिथ का नाम लिया. सचिन ने वनडे क्रिकेट को और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अपने पुराने सुझाव को भी दोहराया. उनका प्रस्ताव है कि 50 ओवर के मुकाबले को दो हिस्सों में बांटा जाए और हर टीम को 25-25 ओवर की दो पारियों में बल्लेबाजी का मौका मिले.
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इस व्यवस्था में पूरे 50 ओवर के लिए टीम के पास कुल 10 विकेट ही हों और मुकाबले में एक ही गेंद का इस्तेमाल किया जाए. सचिन के मुताबिक, इससे बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच संतुलन बना रहेगा. साथ ही दोनों टीमों को ओस के प्रभाव वाली परिस्थितियों में बल्लेबाजी और गेंदबाजी करने का अवसर मिलेगा.
उन्होंने गेंदबाजों की घटती भूमिका पर चिंता जताते हुए कहा कि खेल में संतुलन बनाए रखने के लिए समय रहते बदलाव करना जरूरी है, वरना गेंदबाजों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.