पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने नेशनल टीम के ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है. बोर्ड का लक्ष्य भविष्य में टेस्ट, वनडे और टी20 इंटरनेशनल के लिए अलग-अलग टीमों का गठन करना है. इस दिशा में पहला कदम फॉर्मेट-आधारित सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को माना जा रहा है.
PCB के सीनियर सेलेक्टर और हाई परफॉर्मेंस सेंटर के प्रमुख आकिब जावेद ने 'जियो न्यूज' को दिए इंटरव्यू में बताया कि आधुनिक क्रिकेट की मांग को देखते हुए सभी फॉर्मेट में एक ही खिलाड़ियों पर निर्भर रहना अब व्यावहारिक नहीं है. उन्होंने कहा कि फॉर्मेट-आधारित सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट भविष्य में अलग-अलग टीमों के गठन की शुरुआत है.
आकिब जावेद के मुताबिक- यह सिर्फ शुरुआत है. आने वाले समय में हर फॉर्मेट की अपनी अलग टीम हो सकती है. खासकर टेस्ट और टी20 टीमों को तुरंत अलग किया जाना चाहिए, क्योंकि दोनों फॉर्मेट पूरी तरह अलग सोच और शैली की मांग करते हैं.
PCB ने अभी तक नए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट पाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट जारी नहीं की है, लेकिन बोर्ड ने इसके लिए विस्तृत प्लानिंग तैयार कर ली है. इस नए मॉडल का उद्देश्य टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों को उचित महत्व और आर्थिक सुरक्षा देना है, ताकि वे सीमित ओवरों के खिलाड़ियों की तुलना में नुकसान में न रहें.
पाकिस्तान क्रिकेट में क्या बदलाव हुआ?
नई व्यवस्था के तहत केवल टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों का मूल्यांकन अन्य टेस्ट खिलाड़ियों के मुकाबले किया जाएगा. सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले टेस्ट विशेषज्ञ खिलाड़ियों को हर महीने 40 लाख पाकिस्तानी रुपये तक वेतन मिल सकता है, जबकि अन्य खिलाड़ियों को 30 लाख से 35 लाख पाकिस्तानी रुपये के बीच भुगतान किया जाएगा.
इसी तरह टेस्ट-वनडे और वनडे-टी20 श्रेणियों के खिलाड़ियों के लिए भी प्रदर्शन आधारित कैटेगरी बनाई जाएगी. आकिब जावेद ने बताया कि टेस्ट-वनडे कैटेगरी के खिलाड़ियों का मासिक वेतन 48 लाख पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच सकता है.
सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के लिए पात्रता नियम भी तय किए गए हैं. टेस्ट श्रेणी में शामिल होने के लिए किसी खिलाड़ी को कम से कम छह प्रथम श्रेणी मैच खेलने होंगे. ऐसे खिलाड़ियों को विदेशी चार दिवसीय प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए एनओसी (No Objection Certificate) भी दिया जाएगा.
वहीं टेस्ट-वनडे श्रेणी के खिलाड़ियों को एक फ्रेंचाइजी लीग में खेलने की अनुमति मिल सकती है. वनडे-टी20 श्रेणी के खिलाड़ियों को कम से कम दो लिस्ट-ए मैच और 10 घरेलू टी20 मुकाबले खेलने होंगे. इस श्रेणी के खिलाड़ियों को दो एनओसी दिए जा सकेंगे.
सिर्फ टी20 में शामिल खिलाड़ियों के लिए घरेलू टी20 टूर्नामेंट में भाग लेना अनिवार्य होगा. इसके अलावा वे दुनिया भर की फ्रेंचाइजी लीगों में खेलने के लिए स्वतंत्र होंगे.
आकिब जावेद ने कहा कि किसी खिलाड़ी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह दो-तीन साल तक सिर्फ टी20 क्रिकेट खेलने के बाद अचानक टेस्ट क्रिकेट में सफल हो जाए. उनका मानना है कि प्रत्येक फॉर्मेट के लिए विशेषज्ञ खिलाड़ियों को तैयार करना ही भविष्य का रास्ता है और पाकिस्तान क्रिकेट इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है.