टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिह धोनी ने Gen Z और Gen Alpha को फिटनेस को प्राथमिकता देने की सलाह दी है. लेखक जावेद अख्तर के साथ एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान धोनी ने कहा कि लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और फास्ट फूड का बढ़ता चलन भविष्य में सेहत से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है.
एमएस धोनी ने युवाओं की दिनचर्या में आए बदलावों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि पहले लोगों के जीवन में चलना-फिरना स्वाभाविक रूप से शामिल था. आज घर से ऑफिस तक सफर, घंटों बैठकर काम करना और फिर गाड़ी से घर लौटना आम हो गया है. ऐसे में शरीर को पर्याप्त व्यायाम नहीं मिल पाता.
धोनी ने दिया युवाओं को फिटनेस मंत्र
उन्होंने युवाओं को नियमित रूप से खेलकूद में हिस्सा लेने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की सलाह दी. एमएस धोनी के मुताबिक, निष्क्रिय जीवनशैली का असर तुरंत नजर नहीं आता, लेकिन 30 साल की उम्र के बाद इसकी परेशानियां सामने आ सकती
एमएस धोनी ने समझाया कि पहले लोगों की दिनचर्या में चलना-फिरना स्वाभाविक रूप से शामिल था. आज कई लोग घर से ऑफिस तक गाड़ी या दूसरी सुविधाओं से पहुंचते हैं, पूरा दिन बैठकर काम करते हैं और फिर उसी तरह घर लौट आते हैं. इस दौरान शरीर को पर्याप्त गतिविधि नहीं मिल पाती.
उन्होंने आगाह किया कि कम शारीरिक गतिविधि के साथ तला-भुना और ज्यादा चीनी वाला खाना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है. इसका असर तुरंत नजर ना आए, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ समस्याएं सामने आ सकती हैं.
इसी बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी कई मायनों में पिछली पीढ़ियों से बेहतर है. उन्होंने माना कि उनकी पीढ़ी कई बार अपने विचारों और सिद्धांतों में उलझी रहती थी, जबकि आज के युवाओं में नैतिक मूल्यों को लेकर सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं.
जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि बुजुर्गों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि हर बात का जवाब सिर्फ उनके पास है. उन्हें नई पीढ़ी से सीखने के लिए भी तैयार रहना चाहिए. एमएस धोनी और अख्तर की बातचीत में दो अलग पहलू सामने आए- युवा पीढ़ी के विचारों और मूल्यों को समझना, साथ ही ऐसी आदतें अपनाना जो लंबे समय तक सेहतमंद रहने में मदद करें.