केरल लोक सेवा आयोग (PSC) में कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. पूर्व राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने आयोग के चेयरमैन और सदस्यों को पद से हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम आयोग की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच और चेयरमैन व सदस्यों के खिलाफ मिली शिकायतों के बीच उठाया गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, आयोग के चेयरमैन समेत कुल 16 सदस्यों को हटाने की सिफारिश की गई है. केरल के इतिहास में इस तरह की सिफारिश पहली बार किए जाने की बात कही जा रही है.
परीक्षा में गड़बड़ियों की हो रही जांच
केरल PSC की एक परीक्षा में मूल्यांकन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है. जांचकर्ताओं के मुताबिक, स्टेट प्लानिंग बोर्ड के एक पद की भर्ती परीक्षा में 58 अंकों वाले 10 सवालों का मूल्यांकन नहीं हुआ था. अब इस मामले में आयोग के अधिकारियों की भूमिका और संभावित गड़बड़ियों की भी पड़ताल की गई है. हालांकि, इससे पहले जांच टीम ने आयोग के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की थी. मामले में चेयरमैन और सदस्यों से पूछताछ की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी. हालांकि, आरोपों की जांच और किसी पदाधिकारी को हटाने का फैसला अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं.
PSC चेयरमैन और सदस्यों को हटाने का अधिकार किसके पास?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत लोक सेवा आयोग के चेयरमैन या सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया तय है. इस मामले में राष्ट्रपति की भूमिका अहम होती है. कथित दुर्व्यवहार के आधार पर हटाने के मामले में राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट से जांच कराने का संदर्भ दे सकते हैं और अदालत की रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला लिया जाता है. फिलहाल, राजेंद्र आर्लेकर की सिफारिश के बाद आगे की संवैधानिक प्रक्रिया और राष्ट्रपति के फैसले पर नजर रहेगी.