28 फरवरी 2026 को शुरू हुई ईरान, इजरायल और अमेरिका की 40 दिन की जंग 7 अप्रैल को दो हफ्ते के सीजफायर के साथ थम गई. लेकिन दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज – अब भी खाली पड़ा है. जहाजों की आवाजाही लगभग बंद जैसी है लोग पूछ रहे हैं कि जंग तो खत्म हो गई, फिर क्यों स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सन्नाटा है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे संकरा और सबसे व्यस्त समुद्री रास्ता है. यह फारस की खाड़ी को खुली समुद्र से जोड़ता है. यहां से रोजाना औसतन 60 जहाज गुजरते हैं. इनमें से ज्यादातर तेल और एलएनजी के टैंकर होते हैं. पूरी दुनिया का 20% तेल और 30% एलएनजी इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यहां आवाजाही रुक जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. कई देशों में ईंधन की कमी हो जाती है.
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जंग के दौरान क्या हुआ था?
जंग शुरू होते ही ईरान ने होर्मुज को अपने नियंत्रण में ले लिया. उसने कहा कि बिना अनुमति कोई भी जहाज नहीं गुजर सकता. ईरानी नौसेना ने लारक द्वीप के आसपास एक टोल बूथ जैसा रूट बना दिया. मिसाइल हमलों और ड्रोन हमलों के डर से ज्यादातर जहाज कंपनियां रुक गईं.

बीमा कंपनियों ने युद्ध जोखिम का प्रीमियम 16 गुना बढ़ा दिया. नतीजा यह हुआ कि सैकड़ों जहाज खाड़ी के बाहर खड़े हो गए. 19 एलएनजी टैंकर तो पूरी तरह फंस गए. रोजाना 60 जहाजों की जगह सिर्फ मुट्ठी भर जहाज ही गुजर पा रहे थे.
सीजफायर हो गया, फिर भी सन्नाटा क्यों?
7 अप्रैल को सीजफायर शुरू हो गया, लेकिन ईरान ने अभी पूरी खाड़ी को नहीं खोला है. उसने कहा है कि पूरी तरह खुलने से पहले कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी. अब भी ईरान की सेना की अनुमति के बिना कोई जहाज नहीं गुजर सकता. जहाज कंपनियां डर रही हैं. बीमा प्रीमियम अभी भी बहुत ज्यादा है.
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कप्तान और मालिक सोच रहे हैं कि अगर एक भी हमला हुआ तो क्या होगा. इसलिए ज्यादातर कंपनियां इंतजार कर रही हैं. पाकिस्तान में 10 अप्रैल को होने वाली बातचीत का नतीजा आने तक कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा.
लाइव ट्रैकर क्या बता रहा है?
अभी आप खुद चेक कर सकते हैं. वेबसाइट https://hormuzstraitmonitor.com/ पर जाकर लाइव ट्रैकर देखिए. आज 8 अप्रैल 2026 को ट्रैकर बता रहा है...

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दुनिया पर क्या असर पड़ रहा है?
इस सन्नाटे की वजह से तेल की कीमतें 121 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है. कतर से एलएनजी ले जाने वाले 19 टैंकर फंस गए हैं. एशिया, यूरोप और भारत जैसे देशों में ऊर्जा की सप्लाई प्रभावित हो रही है. अर्थव्यवस्था पर रोजाना अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है.
अभी सबकी नजर 10 अप्रैल को पाकिस्तान में शुरू होने वाली बातचीत पर है. अगर ईरान और अमेरिका के बीच पूरा समझौता हो गया और होर्मुज पूरी तरह खुल गया तो जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ेगी. फिलहाल स्थिति नाजुक है.