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नेपाल का 'किलर' हाथी फरार! 14 साल में एक ही परिवार पर दो बार हमला किया, अब तक 25 लोगों को मारा

नेपाल के एक जंगली हाथी ने 14 साल में एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत 25 लोगों को मार डाला. इसे मारने का सरकारी आदेश था और फिर भी हाथी पकड़ से बाहर है.

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नेपाल के चितवन में इस समय उस जंगली हाथी की वजह से खौफ का माहौल है. (Photo: Representative/Pexel)
नेपाल के चितवन में इस समय उस जंगली हाथी की वजह से खौफ का माहौल है. (Photo: Representative/Pexel)

नेपाल के चितवन नेशनल पार्क के पास एक जंगली हाथी के हमले में दो लोगों की मौत हो गई. 5 जुलाई की रात हाथी ने एक घर पर हमला कर 25 साल की महिला और उसके 4 साल के बेटे को कुचल दिया. यह वही हाथी है, जिसे नेपाल का सबसे खतरनाक 'किलर हाथी' माना जाता है. चितवन नेशनल पार्क के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह हाथी अब तक 25 लोगों की मार चुका है. हमले के बाद हाथी फिर जंगल की ओर भाग गया और वन विभाग उसकी तलाश कर रहा है.

यह घटना चितवन नेशनल पार्क के पास जगतपुर इलाके की है. जिस परिवार पर हमला हुआ, वह पहले भी इसी हाथी का शिकार हो चुका है. परिवार के मुताबिक, साल 2012 में भी इसी हाथी ने उनके माता-पिता की जान ले ली थी. इसके बाद उन्होंने अपना घर और जमीन छोड़कर दूसरी जगह रहने का फैसला किया था. परिवार को लगा था कि अब वे सुरक्षित रहेंगे, लेकिन कई साल बाद हाथी फिर उनके नए घर तक पहुंच गया. 

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इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर का माहौल है. चितवन के आसपास जंगल और गांव एक-दूसरे के काफी करीब हैं. इसी वजह से जंगली हाथी कई बार गांवों तक पहुंच जाते हैं. लेकिन इस हाथी का नाम कई जानलेवा हमलों से जुड़ा होने के कारण इसे सबसे खतरनाक हाथियों में गिना जाता है.

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Nepal killer elephant

पहले भी मचा चुका है कहर

चितवन नेशनल पार्क के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह हाथी साल 2010 से अब तक कम से कम 25 लोगों की मौत  का जिम्मेदार माना जाता है. साल 2012 में इसने एक ही दिन में 68 घरों को नुकसान पहुंचाया था. लगातार हमलों के बाद नेपाल सरकार ने इस हाथी को मारने के लिए विशेष अनुमति यानी लाइसेंस जारी किया था. 

सेना और वन विभाग की टीम ने इसे ढूंढ़ने के लिए अभियान भी चलाया, लेकिन हाथी जंगल में भाग गया. पकड़ में नहीं आया. बाद में लाइसेंस भी खत्म हो गया. इसके बाद हाथी पर नजर रखने के लिए उसके गले में ट्रैकिंग कॉलर भी लगाया गया था.

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क्यों बढ़ जाता है हाथियों का गुस्सा?

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़े नर हाथियों में साल के कुछ समय 'मस्ट' (Musth) की स्थिति आती है. इस दौरान उनके शरीर में हार्मोन का स्तर काफी बढ़ जाता है. ऐसे समय में उनका स्वभाव पहले से ज्यादा आक्रामक हो सकता है. अगर खाने की तलाश में वे गांवों की ओर निकल आते हैं, तो लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है. यह हाथी कई बार खाने और शराब की गंध की वजह से भी बस्तियों की ओर पहुंच जाता है.

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नेपाल में बढ़ रहा है इंसान और वन्यजीवों का टकराव

नेपाल में जंगलों के पास रहने वाले लोगों का अक्सर जंगली जानवरों से सामना होता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में वन्यजीवों से जुड़े 12 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे. इनमें 58 लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जंगल कम होने, हाथियों के पुराने रास्तों पर बस्तियां बसने और भोजन की कमी की वजह से ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं.

चितवन की यह घटना दिखाती है कि इंसानों और जंगली हाथियों के बीच टकराव कितना बड़ा होता जा रहा है. हमले के बाद यह हाथी फिर जंगल में भाग गया है. फिलहाल वन विभाग उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए सिर्फ निगरानी ही नहीं, बल्कि हाथियों के प्राकृतिक रास्तों और जंगलों को भी सुरक्षित रखना जरूरी है.

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