अमेरिका के अपोलो-11 मिशन के जरिए जब इंसान पहली बार चांद पर पहुंचा, तब इस कामयाबी में एक महिला का भी बड़ा योगदान था. उनका नाम मार्गरेट हैमिल्टन था. उन्होंने उस टीम का नेतृत्व किया, जिसने अंतरिक्ष यात्रियों को चांद तक पहुंचाने वाले मिशन के लिए सॉफ्टवेयर बनाया था. मार्गरेट हैमिल्टन का 90 साल की उम्र में निधन हो गया है. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके निधन की जानकारी दी. उनका निधन 30 सितंबर को हुआ था.
मार्गरेट उस दौर में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का काम कर रही थीं, जब सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को आज जैसी पहचान नहीं मिली थी. उन्होंने NASA के अपोलो मिशन के लिए सॉफ्टवेयर बनाने में अहम भूमिका निभाई. इन्होंने ही 'सॉफ्टवेयर इंजीनियर' शब्द दिया. उनके काम के लिए 2016 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया था. यह अमेरिका का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है.
यह भी पढ़ें: धरती लगभग पूरी लाल! ‘सुपर-डुपर अल-नीनो’ ने बढ़ाई टेंशन, 3.7 डिग्री तक गर्म होगा समुद्र
कैसे शुरू हुआ मार्गरेट का सफर?
मार्गरेट हैमिल्टन ने MIT की एक लैब में प्रोग्रामिंग सीखी. शुरुआत में उन्होंने ऐसे सॉफ्टवेयर पर काम किया, जो दुश्मन के विमानों का पता लगाने में मदद करता था. बाद में जब MIT को NASA के अपोलो मिशन के लिए अंतरिक्ष यान का सॉफ्टवेयर बनाने का काम मिला, तो मार्गरेट भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ गईं.

2019 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि उन्हें इस काम में इसलिए दिलचस्पी थी, क्योंकि यह बिल्कुल नया था और इससे पहले किसी ने ऐसा काम नहीं किया था. वह इस प्रोजेक्ट से जुड़ने वाली पहली प्रोग्रामर थीं. इस काम के लिए रखी गई वह पहली महिला भी थीं.
मार्गरेट ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को एक अलग क्षेत्र के रूप में पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई. उनके काम ने दिखाया कि अंतरिक्ष मिशन में कंप्यूटर को सही निर्देश देना और मुश्किल हालात में उसे काम करते रहने लायक बनाना कितना जरूरी है.
यह भी पढ़ें: बहादुरी को सम्मान... कैप्टन स्मित मछार को इजरायल देगा वीरता पुरस्कार
चांद पर उतरते समय कंप्यूटर में आई थी गड़बड़ी
20 जुलाई 1969 को अपोलो-11 मिशन के दौरान नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन चांद पर उतरने की तैयारी कर रहे थे. इसी दौरान अंतरिक्ष यान के कंप्यूटर में अलार्म बजने लगा. कंप्यूटर पर एक साथ कई कामों का दबाव था. ऐसे में मिशन को रोकने का खतरा पैदा हो गया था.
लेकिन कंप्यूटर में मौजूद सॉफ्टवेयर ने जरूरी कामों को प्राथमिकता दी. उसने कम जरूरी कामों को पीछे कर दिया, ताकि कंप्यूटर जरूरी निर्देशों पर काम करता रहे. सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी का पता लगाने और उससे निपटने की व्यवस्था पहले से थी.
इसी वजह से कंप्यूटर में समस्या आने के बाद भी मिशन आगे बढ़ सका और इंसान चांद की सतह पर उतर पाया. इस घटना ने दिखाया कि अंतरिक्ष मिशन में सॉफ्टवेयर कितना जरूरी है. अगर कंप्यूटर जरूरी निर्देशों पर काम नहीं कर पाता, तो चांद पर उतरने की प्रक्रिया में परेशानी आ सकती थी.

बराक ओबामा ने भी किया था सम्मानित
2016 में मार्गरेट को सम्मानित करते समय तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी उनके काम का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि एस्ट्रोनॉट्स के पास ज्यादा समय नहीं था, लेकिन उनके पास मार्गरेट हैमिल्टन थीं. प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम अमेरिका का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है. यह उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने देश और समाज के लिए खास योगदान दिया हो.
मार्गरेट हैमिल्टन अपने पीछे बेटी, दामाद, दो नाती और चार परनाती छोड़ गई हैं. 2009 में MIT को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपोलो मिशन के दिनों को याद करते हुए कहा था कि उस समय उनके पास नए काम को करने और आगे बढ़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था, क्योंकि ऐसा काम पहले किसी ने नहीं किया था.
मार्गरेट का काम अंतरिक्ष विज्ञान और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के इतिहास में अहम रहेगा. उन्होंने दिखाया कि चांद पर इंसान को पहुंचाने में सिर्फ रॉकेट और एस्ट्रोनॉट्स ही नहीं, बल्कि उनके लिए सॉफ्टवेयर बनाने वाले लोगों की भी बड़ी भूमिका होती है.