ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक डार्क मैटर की खोज में वैज्ञानिकों को एक अहम संकेत मिला है. अमेरिका की जमीन के करीब एक मील नीचे बनी लैब में लगे एक खास डिटेक्टर ने एक रहस्यमयी कण को रिकॉर्ड किया है. यह कण डार्क मैटर से जुड़ा हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिक अभी इसे पक्की खोज नहीं मान रहे हैं.
यह संकेत LZ डिटेक्टर में मिला है. करीब 250 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने दो साल तक इसके डेटा की जांच की. ये वैज्ञानिक 6 देशों के 39 संस्थानों से जुड़े हैं. जांच में एक ऐसा कण मिला, जो एक एटम से टकराया था. वैज्ञानिकों को शक है कि यह WIMP (Weakly Interacting Massive Particle) हो सकता है. WIMP को डार्क मैटर का संभावित कण माना जाता है.
यह भी पढ़ें: इसरो ने अंतरिक्ष में भेजा 'नॉटी बॉय', दुश्मन की हरकतों पर रखेगा नजर... आपदा में भी मदद
कहां मिला यह संकेत?
यह डिटेक्टर अमेरिका के साउथ डकोटा में सैनफोर्ड अंडरग्राउंड रिसर्च फैसिलिटी में लगाया गया है. यह लैब जमीन के करीब एक मील नीचे है. इतनी गहराई में डिटेक्टर लगाने से ऊपर से आने वाले दूसरे कणों का असर कम होता है. इससे वैज्ञानिकों को बहुत छोटे संकेत पकड़ने में मदद मिलती है.
LZ डिटेक्टर बेहद छोटे पार्टिकल्स इंटरएक्शन को पकड़ता है. आसान भाषा में समझें तो अगर डार्क मैटर का कोई कण किसी एटम से टकराता है, तो उससे पैदा होने वाले छोटे से संकेत को यह डिटेक्टर पकड़ने की कोशिश करता है.

क्या सच में मिला डार्क मैटर ?
अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा. वैज्ञानिकों को सिर्फ एक ऐसी घटना मिली है, जो डार्क मैटर से जुड़ी हो सकती है. सिर्फ एक घटना के आधार पर यह साबित नहीं किया जा सकता कि वह डार्क मैटर ही था. इस संकेत को 2.6 सिग्मा की रेटिंग मिली है. सिग्मा वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करता है कि कोई नतीजा कितना भरोसेमंद है.
यह भी पढ़ें: चीन की मिसाइल फेल हुई तो PAK ने बनाया अपना हथियार, JF-17 जेट में लगाया
बड़ी वैज्ञानिक खोज के लिए आम तौर पर 5 Sigma का स्तर जरूरी माना जाता है. यानी अभी मिले संकेत को पक्की खोज मानने के लिए और सबूत चाहिए. ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिक गैटस्कैल ने भी कहा कि वैज्ञानिक यह दावा नहीं कर रहे कि उन्होंने डार्क मैटर खोज लिया है. उनके मुताबिक, टीम ने कुछ दिलचस्प जरूर देखा है, लेकिन इसे समझने के लिए और जांच की जरूरत है.
डार्क मैटर क्या है?
डार्क मैटर ऐसा पदार्थ है जिसे हम सीधे देख नहीं सकते. यह रोशनी को न तो छोड़ता है और न ही उसे सामान्य तरीके से वापस भेजता है. इसलिए इसे सीधे देखना बेहद मुश्किल है. फिर भी वैज्ञानिक मानते हैं कि डार्क मैटर मौजूद है, क्योंकि इसका गुरुत्वाकर्षण दूसरी चीजों पर असर डालता है.

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ब्रह्मांड के कुल पदार्थ का करीब 85 फीसदी हिस्सा डार्क मैटर हो सकता है. इतना बड़ा हिस्सा होने के बावजूद वैज्ञानिक आज तक इसका कोई कण सीधे पकड़ नहीं पाए हैं. यही वजह है कि इस बार मिले संकेत को अहम माना जा रहा है.
अब आगे क्या होगा?
वैज्ञानिकों ने यह भी जांचा कि कहीं यह संकेत किसी और वजह से तो नहीं आया. यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के प्रोफेसर हैनिंग फ्लैचर के मुताबिक, टीम ने इसके दूसरे संभावित कारणों को तलाशने में काफी समय लगाया. अभी तक उन्हें ऐसा कोई कारण नहीं मिला है, जो इस घटना को पूरी तरह समझा सके.
अब वैज्ञानिक LZ डिटेक्टर से मिलने वाले और डेटा की जांच करेंगे. अगर आगे भी इसी तरह के कई संकेत मिलते हैं और उनके आंकड़े 5 सिग्मा तक पहुंचते हैं, तो डार्क मैटर की खोज का दावा मजबूत हो सकता है. फिलहाल वैज्ञानिकों को डार्क मैटर नहीं मिला है, बल्कि उसका एक संभावित सुराग मिला है. आगे की जांच से ही पता चलेगा कि यह सच में डार्क मैटर था या किसी दूसरे कण से जुड़ी घटना.