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जहां कभी कोई इंसान नहीं पहुंचा... आज रात चांद के करीब इतिहास रचेगा Artemis-2

आर्टेमिस-2 मिशन के चारों एस्ट्रोनॉट्स आज रात 9.41 बजे चांद की ग्रैविटी फील्ड में एंटर करेगा. 11.26 बजे एस्ट्रोनॉट्स धरती से सबसे दूर जाने वाले इंसान बन जाएंगे. इसी दौरान पहली बार चंद्रमा के डार्क साइड पर स्थित 965 किलोमीटर चौड़े ओरिएंटेल बेसिन गड्ढे को अपनी आंखों से देख रहे होंगे.

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आज रात पौने दस बजे के आसपास ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के पास पहुंचेगा. (Photo: NASA)
आज रात पौने दस बजे के आसपास ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के पास पहुंचेगा. (Photo: NASA)

नासा के आर्टेमिस-2 मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स पहली बार चंद्रमा के दूर वाले हिस्से (डार्क साइड) का एक बहुत बड़ा गड्ढा देख रहे होंगे. यह गड्ढा ओरिएंटेल बेसिन (Orientale Basin) नाम का है. यह लगभग 965 किलोमीटर चौड़ा है. तीन बड़े घेरे से बना हुआ है. 

38 अरब साल पहले एक बहुत बड़े उल्कापिंड (लगभग 64 किलोमीटर चौड़े एस्टरॉयड) के टकराने से यह बना था. इससे पहले इसे सिर्फ रोबोट स्पेसक्राफ्ट की तस्वीरों से देखा गया था. लेकिन अब आर्टेमिस-2 के एस्ट्रोनॉट्स अपनी आंखों से पूरा गड्ढा देख रहे हैं. नासा ने इसे इतिहास रचने वाला पल बताया है.

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भारतीय समयानुसार ओरियन कब कहां होगा?

Artemis-2 Mission

  • 9.41 बजे रात: ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के ग्रैविटी फील्ड में एंटर करेगा. इस समय यह चंद्रमा से 66 हजार किलोमीटर दूर दूर होगा. 
  • 10.30 बजे रात: मिशन कंट्रोल का साइंस ऑफिसर क्रू को आने वाले फ्लाईबाय के बारे में जानकारी देगा.
  • 11.26 बजे रात: आर्टेमिस-2 क्रू अपोलो-13 के 1972 के रिकॉर्ड को तोड़ देगी. यह इंसानों द्वारा पृथ्वी से सबसे दूर जाने का नया रिकॉर्ड होगा.
  • 12.15 बजे रात: चंद्रमा की निगरानी शुरू होगी. 
  • 4.14 बजे सुबह: ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के पीछे से गुजरते समय मिशन कंट्रोल से क्रू का संपर्क करीब 50 मिनट के लिए टूट जाएगा.
  • 4.15 बजे सुबह: अर्थसेट के दौरान पृथ्वी ओरियन के नजरिए से चंद्रमा के पीछे छिप जाएगी.
  • 4.32 बजे सुबह: ओरियन चंद्रमा के सबसे करीब पहुंचेगा. इस समय यह चंद्रमा की सतह से सिर्फ 6550 किलोमीटर ऊपर होगा.
  • 4.37 बजे सुबह: क्रू इस मिशन के दौरान पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूर पहुंच जाएगा.
  • 5.00 बजे सुबह: अर्थराइज होगा, यानी पृथ्वी चंद्रमा के दूसरी तरफ से फिर दिखने लगेगी. नासा का मिशन कंट्रोल दोबारा एस्ट्रोनॉट्स से संपर्क स्थापित कर लेगा.
  • 6.05 से 7.02 बजे सुबह: सोलर एक्लिप्स के दौरान सूरज क्रू के नजरिए से चंद्रमा के पीछे छिप जाएगा.
  • 7.50 बजे सुबह: चंद्रमा दिखना बंद हो जाएगा. 

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ओरिएंटेल बेसिन गड्ढा कैसे बना और क्यों खास है?

ओरिएंटेल बेसिन चंद्रमा के पास और दूर वाले हिस्से की सीमा पर स्थित है. यह चंद्रमा के सबसे बड़े और सबसे अच्छी तरह बचे हुए मल्टी-रिंग बेसिन में से एक है. वैज्ञानिकों का मानना है कि 38 अरब साल पहले एक विशाल एस्टरॉयड टकराया. इससे लाखों क्यूबिक मील चट्टान पिघल गई और आकाश में उछल गई.

Artemis-2 Mission

फिर यह सामग्री वापस गिरकर दो घंटे तक इधर-उधर हिलती रही और आखिर में तीन घेरे बना दिए. यह गड्ढा चंद्रमा पर सबसे युवा बेसिन में से एक है. पृथ्वी पर इतना बड़ा और इतने घेरों वाला कोई गड्ढा नहीं मिला है. 

आर्टेमिस-2 मिशन के एस्ट्रोनॉट्स कौन हैं और क्या कर रहे हैं?

आर्टेमिस मिशन के चार सदस्य हैं – कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और कनाडियन एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसन. यह मिशन 1 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा से लॉन्च हुआ. एस्ट्रोनॉट्स ने पहले 25 घंटे पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाए और पृथ्वी की खूबसूरत तस्वीरें लीं. अब वे चंद्रमा की ओर बढ़ रहे हैं. 

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ओरियन कब चंद्रमा के पास पहुंचेगा और कितनी दूर जाएगा?

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ओरियन स्पेसक्राफ्ट 6 अप्रैल 2026 को चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करेगा. यह चंद्रमा के बहुत करीब से गुजरेगा और चंद्रमा के डार्क साइड को देखेगा. मिशन के दौरान ओरियन चंद्रमा के चारों ओर पूरा चक्कर नहीं लगाएगा बल्कि फ्लाई-बाय करेगा यानी पास से गुजरकर आगे बढ़ जाएगा. 

Artemis-2 Mission

एस्ट्रोनॉट्स पृथ्वी से सबसे दूर लगभग 4 लाख किलोमीटर तक जाएंगे. यह 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद इंसानों द्वारा किया गया सबसे दूर का अंतरिक्ष यात्रा रिकॉर्ड होगा. 

आर्टेमिस-2 मिशन 1972 के बाद पहला मैन्ड चंद्रमा मिशन है. यह सिर्फ यात्रा नहीं बल्कि भविष्य की तैयारी है. इससे नासा ओरियन स्पेसक्राफ्ट की जांच कर रहा है कि लंबी यात्रा में यह कितना सुरक्षित है. एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा की सतह के 30 जगहों की तस्वीरें और जानकारी लेंगे. यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की लैंडिंग (आर्टेमिस-3) और उसके बाद मंगल ग्रह पर जाने की राह तैयार करेगा. 

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