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साइंस न्यूज़

दुनिया में घट रहे जानवर, लेकिन इस समुद्री कछुए ने पलटी बाजी, 50 साल की मेहनत लाई रंग

Green Sea Turtle
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दुनिया भर में जंगली जानवरों की संख्या घट रही है. लेकिन समुद्र में रहने वाले ग्रीन टर्टल यानी हरे समुद्री कछुए के लिए अच्छी खबर है. कई सालों तक इसे बचाने के लिए किए गए प्रयासों से इसकी स्थिति में सुधार हुआ है. 2025 में इसे IUCN की रेड लिस्ट में 'एंडेंजर्ड' श्रेणी से हटाकर 'लीस्ट कंसर्न' में रखा गया. Photo: AFP

Green Sea Turtle
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इसका मतलब है कि फिलहाल दुनिया भर में इस कछुए के विलुप्त होने का खतरा पहले से कम है. इसके अंडों को सुरक्षित रखने, समुद्र तटों को बचाने और शिकार पर रोक लगाने जैसे कदमों से इसे फायदा मिला है. यह खबर ऐसे समय में आई है, जब दुनिया के कई वन्यजीवों की संख्या घट रही है. Photo: AFP

Green Sea Turtle
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WWF की लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, 1970 से 2022 के बीच जिन जंगली जानवरों की आबादी पर नजर रखी गई, उनके औसत आकार में 73 फीसदी की गिरावट आई है. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, निगरानी में शामिल करीब आधी आबादियां स्थिर हैं या बढ़ रही हैं. ग्रीन टर्टल इसका उदाहरण है कि अगर किसी प्रजाति को बचाने के लिए लंबे समय तक सही कदम उठाए जाएं, तो उसकी स्थिति में सुधार हो सकता है. Photo: AFP

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Green Sea Turtle
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ग्रीन टर्टल को बचाने के लिए करीब पांच दशकों से काम किया जा रहा है. इसके अंडों और रहने की जगहों को सुरक्षित रखने के लिए करीब 80 देशों में प्रयास किए गए. इसमें समुद्र तटों की सुरक्षा, अंडों की देखभाल और कछुओं के शिकार पर रोक लगाने जैसे कदम शामिल हैं.  Photo: AFP

Green Sea Turtle
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मादा ग्रीन टर्टल अंडे देने के लिए समुद्र से निकलकर किनारे पर आती है. ऐसे में अगर समुद्र तट पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाए या अंडों को नुकसान पहुंचे, तो इनकी संख्या पर असर पड़ सकता है. इसलिए अंडे देने वाली जगहों को सुरक्षित रखने पर ध्यान दिया गया. समुद्र तटों पर तेज रोशनी को कम करने की कोशिश भी की गई, क्योंकि इसकी वजह से छोटे कछुए समुद्र तक पहुंचने का रास्ता भटक सकते हैं. Photo: AFP

Green Sea Turtle
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ग्रीन टर्टल के लिए मछली पकड़ने वाले जाल भी बड़ा खतरा हैं. कई बार कछुए इन जालों में फंस जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाते. इससे उनकी मौत हो सकती है. इस परेशानी को कम करने के लिए ऐसे जालों और उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाने पर काम किया गया, जिनसे कछुए फंसने पर बाहर निकल सकें. Photo: AFP
 

Green Sea Turtle
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इसके अलावा, कछुओं का शिकार करने और उनके अंडे निकालने पर रोक लगाने के प्रयास भी किए गए. ग्रीन टर्टल का शिकार उसके मांस और शरीर के दूसरे हिस्सों के लिए किया जाता रहा है. समुद्र में बढ़ता कचरा और प्रदूषण भी इनके लिए खतरा है. इसलिए इन्हें बचाने के लिए शिकार रोकने के साथ-साथ समुद्र और समुद्र तटों को साफ और सुरक्षित रखना भी जरूरी है. Photo: AFP

Green Sea Turtle
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WWF की लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 में 5,790 कशेरुकी प्रजातियों की 35,803 आबादियों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया. इनमें स्तनधारी, पक्षी, मछली, सरीसृप और उभयचर शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 1970 से 2022 के बीच इन आबादियों के औसत आकार में 73 फीसदी की गिरावट आई. Photo: AFP 

Green Sea Turtle
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इस आंकड़े का मतलब यह नहीं है कि दुनिया के कुल 73 फीसदी जानवर खत्म हो गए. इसका मतलब है कि जिन आबादियों पर नजर रखी गई, उनके औसत आकार में इतनी गिरावट आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब आधी आबादियां स्थिर थीं या बढ़ रही थीं. लेकिन जिन आबादियों में गिरावट आई, उनमें कमी ज्यादा होने के कारण कुल औसत घट गया. Photo: AFP

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Green Sea Turtle
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रिपोर्ट में मीठे पानी में रहने वाले जीवों की आबादी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद जमीन और समुद्र में रहने वाले जीवों की आबादी में कमी देखी गई. जंगलों और दूसरे प्राकृतिक ठिकानों का खत्म होना, शिकार, प्रदूषण और क्लाइमेट चेंज इसके बड़े कारण हैं. Photo: AFP

Green Sea Turtle
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ग्रीन टर्टल की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन समुद्र में रहने वाले दूसरे कछुओं के सामने अब भी कई खतरे हैं. मछली पकड़ने के जाल, शिकार और समुद्र तटों पर बढ़ता निर्माण इनके लिए परेशानी पैदा करते हैं. समुद्र तटों पर इमारतें बनने से कछुओं के अंडे देने की जगह कम हो सकती है. वहीं, पानी में फैला प्लास्टिक और दूसरा कचरा भी इन्हें नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में इन कछुओं को बचाने के लिए समुद्र और उनके रहने की जगहों की सुरक्षा जरूरी है. Photo: AFP

Green Sea Turtle
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ग्रीन टर्टल की कहानी बताती है कि लगातार कोशिश करने से वन्यजीवों की स्थिति सुधारी जा सकती है. लेकिन इसे मिली राहत को बनाए रखने के लिए शिकार रोकना, अंडों को सुरक्षित रखना और समुद्र को प्रदूषण से बचाना जरूरी है. संरक्षण के ये प्रयास जारी रहेंगे, तभी इस कछुए की आबादी को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी. Photo: AFP

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