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साइंस न्यूज़

कहां जा रहे हैं जंगल के हाथी... अब DNA बताएगा कितने बचे?

World Elephant Day
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अफ्रीका के जंगलों में रहने वाले फॉरेस्ट एलिफेंट यानी जंगली हाथियों की संख्या लगातार घट रही है. वर्ल्ड वाइलडलाइफ फंड के रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक अब करीब 1.35 लाख अफ्रीकी फॉरेस्ट एलिफेंट ही बचे हैं. मध्य और पश्चिमी अफ्रीका के जंगलों में इन हाथियों को सबसे ज्यादा नुकसान अवैध शिकार से हुआ है. Photo: Mukesh Yadav

World Elephant Day
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अब इन्हें बचाने के लिए सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक के जांगा-सांघा प्रोटेक्टेड एरियास में DNA और डेटा की मदद ली जा रही है. वैज्ञानिक हाथियों के गोबर से DNA लेकर उनकी पहचान और संख्या का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. Photo: Mukesh Yadav

World Elephant Day
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हाथियों के गोबर से मिले DNA से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि जंगल में कितने अलग-अलग हाथी हैं और वे किस इलाके में घूम रहे हैं. वैज्ञानिक अलग-अलग जगहों से गोबर के सैम्पल लेकर उनकी जांच करेंगे. Photo: Mukesh Yadav

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World Elephant Day
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इस जानकारी को दूसरे डेटा के साथ मिलाकर हाथियों की संख्या का बेहतर अंदाजा लगाया जा सकेगा. साथ ही यह भी पता चलेगा कि हाथी किन इलाकों में ज्यादा जा रहे हैं. यह जानकारी जंगल की निगरानी करने वाली टीमों के लिए भी काफी काम की होगी. Photo: Mukesh Yadav

World Elephant Day
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इस सदी की शुरुआत में बड़े स्तर पर हुए अवैध शिकार की वजह से मध्य और पश्चिमी अफ्रीका के जंगलों में रहने वाले करीब दो-तिहाई फॉरेस्ट एलिफेंट मारे गए. हाथियों का शिकार मुख्य रूप से उनके हाथीदांत यानी आइवरी के लिए किया जाता था. अब आइवरी के लिए होने वाला शिकार पहले से कम हुआ है, लेकिन हाथियों का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है. अब उनके जंगल ही तेजी से कम हो रहे हैं. Photo: Mukesh Yadav

World Elephant Day
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हाथियों के जंगलों को ऑयल पाम, कोको और रबर की खेती के लिए काटा जा रहा है. इसके अलावा इंसानी बस्तियां और दूसरी विकास से जुड़ी गतिविधियां भी बढ़ रही हैं. जंगल कम होने से हाथियों के पास रहने और घूमने की जगह भी कम हो रही है. Photo: Mukesh Yadav

World Elephant Day
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जंगल के छोटे-छोटे हिस्सों में बंट जाने से हाथियों के एक जगह से दूसरी जगह जाने पर भी असर पड़ता है. ऐसे में यह पता लगाना जरूरी हो जाता है कि हाथी कहां हैं और उनकी संख्या कितनी है. Photo: Mukesh Yadav

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हाथियों के गोबर में उनके शरीर का DNA मौजूद होता है. वैज्ञानिक इसी DNA की मदद से अलग-अलग हाथियों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं. अगर अलग-अलग जगहों से लिए गए गोबर के सैम्प्ल्स में अलग DNA मिलता है, तो इससे पता लगाया जा सकता है कि वहां कितने अलग-अलग हाथी हैं. Photo: Mukesh Yadav

World Elephant Day
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कुछ समय बाद फिर से नमूने लेकर यह भी देखा जा सकता है कि हाथी किस इलाके में जा रहे हैं और उनकी संख्या में कोई बदलाव हुआ है या नहीं. इस तरह हर बार जंगल में जाकर सभी हाथियों को गिनने की जरूरत कम हो सकती है. लगातार मिलने वाला DNA डेटा हाथियों की संख्या पर नजर रखने में मदद करेगा. Photo: Mukesh Yadav

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World Elephant Day
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हाथियों को बचाने के लिए DNA के साथ-साथ शिकारियों को रोकने पर भी काम हो रहा है. सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और आसपास के इलाकों में सुरक्षा टीमों को मजबूत किया जा रहा है. एक तीन देशों की इको-गार्ड टीम अब सीमा पार जाकर भी शिकारियों का पीछा कर सकती है. Photo: Mukesh Yadav

World Elephant Day
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इसका मकसद यह है कि शिकारी एक देश से दूसरे देश में जाकर आसानी से बच न निकलें. कैमरून में स्थानीय लोगों को भी वन्यजीव अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में मदद दी जा रही है. Photo: Mukesh Yadav

World Elephant Day
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आज करीब 1.35 लाख फॉरेस्ट एलिफेंट बचे हैं. इन्हें बचाने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि जंगल में कितने हाथी हैं, वे कहां घूमते हैं और उन्हें सबसे ज्यादा खतरा कहां है.   रिपोर्टः साक्षी प्रजापति (ये तस्वीरें आजतक डॉट कॉम को वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर मुकेश यादव ने दी है.)

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