चैत्र नवरात्रि का अनुष्ठान जारी है. इन नौ दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दौरान लोग आरती की विधि के दौरान बड़ी गलतियां करते हैं. इसके साथ ही कई लोगों को आरती की सही विधि भी नहीं पता है. कभी भी किसी देवता की आरती करना सिर्फ उनके सामने अग्नि का दीपक घुमाना नहीं है, बल्कि आरती खुद भी उसी देवी-देवता का स्वरूप बन जाती है, जिनकी हम पूजा कर रहे होते हैं.
असल में आरती करने की सही विधि तीन भागों में बंटी होती है.
पहला चरण:
आरती दो प्रकार की होती है, एक घी के दीपक से और दूसरी कपूर (कर्पूर) दीप से. ध्यान रखें कि कर्पूर दीप हमेशा दूसरे स्टेप में अर्पित किया जाता है.
आरती अर्पित करते समय एक विशेष क्रम का पालन किया जाता है,
सबसे पहले भगवान के चरणों में 4 बार आरती करें.
फिर नाभि के सामने 2 बार आरती घुमाएं
उसके बाद मुख पर 1 बार आरती घुमाएं
इसके बाद पूरे देवी-देवता के पूरे शरीर को केंद्र में रखते हुए ऊपर सिर से नीचे पांव तक पूरे पूरे शरीर पर 7 बार आरती करें.
इस तरह से कुल 14 बार घुमाने पर आरती पूरी होती है.
आप घी या तेल के दीपक से आरती करने के बाद, आखिरी स्टेप में कपूर के दीपक की आरती घुमाएं. इस तरह आरती के दोनों स्टेप पूरे हो जाते हैं.
आरती कर लेने के बाद, उसकी आचमनि करें. यानी आरती के चारों ओर घुमाकर जल के छींटे दें. इसके बाद सबसे पहले आरती भगवान को अर्पित करें, उसके बाद खुद आरती लें और फिर पूजा मे मौजूद अन्य लोगों को आरती लेने के लिए कहें. आरती पूरी होने के बाद शांत होकर बैठें और श्रद्धा के साथ इस मंत्र का जाप करें.
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर:
यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे॥
अगर आप देवी की पूजा कर रहे हैं तो मंत्र पढ़ें...
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरी
यत्पूजितं मया देवी! परिपूर्ण तदस्तु मे॥
इस विधि से ही अपने घर में आरती करें तभी आरती पूर्ण और सफल मानी जाती है और इसक लाभ भी मिलता है. तो अगली बार आप जब भी आरती करें, तो इन बातों का ध्यान रखें.