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Bhadrapada Purnima 2021: भाद्रपद पूर्णिमा व्रत आज, सुख-समृद्धि के लिए करें भगवान सत्यनारायण की पूजा

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा की तिथि का विशेष महत्व है. आज के दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है और उमा-महेश्वर व्रत भी रखा जाता है. भादो मास की पूर्णिमा से ही पितृपक्ष की शुरुआत हो जाती है. पितृपक्ष (Pitrupaksha 2021)आज से शुरू होकर 06 अक्टूबर तक रहेंगे.

पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भाद्रपद की पूर्णिमा आज
  • भगवान सत्यनारायण की पूजा से लाभ
  • घर में आती है सुख-समृद्धि

आज भाद्रपद पूर्णिमा (Bhadrapada Purnima 2021) है. हिन्दू धर्म में पूर्णिमा की तिथि का विशेष महत्व है. आज के दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है और उमा-महेश्वर व्रत भी रखा जाता है. भादो मास की पूर्णिमा से ही पितृ पक्ष की शुरुआत हो जाती है. पितृपक्ष (Pitrupaksha 2021)आज से शुरू होकर 06 अक्टूबर तक रहेंगे. आज के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. इसलिए इस दिन व्रत रखकर चंद्रमा की भी विशेष उपासना की जाती है.

भाद्रपद पूर्णिमा व्रत पूजा विधि- किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें. इसके बाद विधिवत तरीके से भगवान सत्यनारायण की पूजा करें. उन्हें फल-फूल अर्पित करें. आज के दिन पूजन के बाद भगवान सत्यनारायण की कथा जरूर सुननी चाहिये. इसके बाद लोगों में पंचामृत और प्रसाद वितरण करें. प्रसाद में पंजीरी, पंचामृत, फल और तुलसी दल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.  आज के दिन किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को दान देना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. 

पूजा का शुभ मुहूर्त- पूर्णिमा तिथि सुबह 05 बजकर 28 मिनट से आरंभ होगी, जिसका समापन 21 सितंबर 2021 को सुबह 05 बजकर 24 मिनट पर होगा.

सत्यनारायण पूजन का महत्व- ज्योतिष के जानकारों की मानें तो सनातन सत्यरूपी विष्णु भगवान कलियुग में अलग-अलग रूप में आकर लोगों को मनवांछित फल देते हैं. लोगों के कल्याण के लिए ही श्री हरि ने सत्यनारायण रूप लिया. इनकी पूजा से घर में शान्ति और सुख समृद्धि आती है. ये पूजा शीघ्र विवाह के लिए और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए भी लाभकारी है. विवाह के पहले और बाद में सत्यनारायण की पूजा बहुत शुभ फल देती है.

भाद्रपद पूर्णिमा की व्रत कथा- एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार महर्षि दुर्वासा भगवान शंकर के दर्शन करके लौट रहे थे. रास्ते में उनकी भेंट भगवान विष्णु से हो गई. महर्षि ने शंकर जी द्वारा दी गई विल्व पत्र की माला भगवान विष्णु को दे दी. भगवान विष्णु ने उस माला को स्वयं न पहनकर गरुड़ के गले में डाल दी. इससे महर्षि दुर्वासा क्रोधित हो गए और विष्णु जी को श्राप दिया, कि लक्ष्मी जी उनसे दूर हो जाएंगी, क्षीर सागर छिन जाएगा, शेषनाग भी सहायता नहीं कर सकेंगे. इसके बाद विष्णु जी ने महर्षि दुर्वासा को प्रणाम कर मुक्त होने का उपाय पूछा. इस पर महर्षि दुर्वासा ने बताया कि उमा-महेश्वर का व्रत करो, तभी मुक्ति मिलेगी. तब भगवान विष्णु ने यह व्रत किया और इसके प्रभाव से लक्ष्मी जी समेत समस्त शक्तियां भगवान विष्णु को पुनः मिल गईं.

 

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