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परमा एकादशी व्रत कथा (Parama Ekadashi Vrat Katha)

परमा एकादशी व्रत कथा

परमा एकादशी का दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस पावन अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु की आराधना के साथ परमा एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

परमा एकादशी व्रत कथा
परमा एकादशी व्रत कथा

प्राचीन समय में कांपिल्य नगर में सुमेध नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ रहता था. दोनों धर्मनिष्ठ, सदाचारी और भगवान विष्णु के परम भक्त थे. किंतु उनके जीवन में अत्यंत गरीबी थी। घर में भोजन तक का अभाव रहता था. कई-कई दिन उन्हें भूखे रहकर बिताने पड़ते थे.

 

ब्राह्मण सुमेध अपनी पत्नी की दशा देखकर अत्यंत दुःखी रहता था. वह सोचता था कि किसी दूसरे देश में जाकर धन कमाए, जिससे परिवार का पालन-पोषण ठीक प्रकार से हो सके. एक दिन उसने अपनी पत्नी से कहा, "मैं परदेश जाकर धन अर्जित करना चाहता हूं, क्योंकि यहां रहने से हमारी दरिद्रता समाप्त नहीं होगी."

 

यह सुनकर पवित्रा ने विनम्रता से कहा, "हे स्वामी! मनुष्य को वही प्राप्त होता है जो उसके पूर्वजन्मों के कर्मों से निर्धारित होता है. यदि भाग्य में धन लिखा होगा तो वह यहीं मिल जाएगा. परदेश जाने से मुझे आपसे वियोग का दुःख सहना पड़ेगा. इसलिए आप यहीं रहकर भगवान की भक्ति करें." पत्नी की बात सुनकर सुमेध ने परदेश जाने का विचार त्याग दिया. दोनों पति-पत्नी जैसे-तैसे जीवन व्यतीत करने लगे.

 

एक दिन उनके घर महान तपस्वी कौण्डिन्य ऋषि पधारे. घर में कुछ भी न होते हुए भी पवित्रा ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ उनका सत्कार किया. उसने यथाशक्ति भोजन और सेवा का प्रबंध किया. ऋषि उनकी सेवा-भावना से बहुत प्रसन्न हुए. जब ऋषि भोजन करके विश्राम करने लगे, तब पवित्रा ने उनके चरणों में प्रणाम कर कहा, "भगवन्! हम अत्यंत निर्धन हैं. कृप्या ऐसा कोई उपाय बताइए जिससे हमारी दरिद्रता दूर हो जाए और हमारा कल्याण हो."

 

कौण्डिन्य ऋषि ने कहा, "हे साध्वी! अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परमा एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है. जो मनुष्य श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे धन, वैभव तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है."

 

ऋषि ने आगे बताया कि इस एकादशी के साथ पांच दिनों तक किए जाने वाले पंचरात्रि व्रत का भी विशेष महत्व है. उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु की पूजा, जप, दान और उपवास करने से मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है.

 

ऋषि के उपदेश के अनुसार सुमेध और पवित्रा ने परमा एकादशी का व्रत किया. उन्होंने पूरे मन से भगवान विष्णु का पूजन किया, रात्रि में जागरण किया और द्वादशी के दिन विधिपूर्वक पारण किया. व्रत के प्रभाव से शीघ्र ही उनकी दरिद्रता दूर होने लगी. उन्हें धन, अन्न और सुख-समृद्धि प्राप्त हुई. समाज में उनका सम्मान बढ़ा और उनका जीवन आनंदमय हो गया. अंत समय में दोनों को भगवान विष्णु के धाम की प्राप्ति हुई.

 

विष्णु जी आरती 

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

 

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥

 

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥

 

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥

 

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥

 

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥

 

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥

 

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥

 

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

 

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥

 

 

परमा एकादशी व्रत पूजा सामग्री

  • श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति
  • दूध, दही, घी, शहद, और गंगाजल
  • फल और फूल
  • तुलसी के पत्ते
  • धूप, दीप, अगरबत्ती
  • रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत
  • तिल, जनेऊकलावा रक्षा सूत्र, मौसमी वस्त्र

 

परमा एकादशी व्रत पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • पीले कपड़े पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें
  • पीले फूल, ऋतुफल, धूप, दीप, भोग अर्पित करें
  • मंत्र का जाप करें
  • अंत में आरती करें

 

परमा एकादशी व्रत के मुख्य लाभ और महत्व

  • दरिद्रता का नाश
  • पापों से मुक्ति
  • मोक्ष की प्राप्ति

-------समाप्त-------

समाप्त

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