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Vastu Tips: क्यों रोटी बनाने से पहले किनारे से तोड़ देते हैं गूंथा हुआ आटा? जानें वजह

कुछ घरों में महिलाएं आटा गूंथने के बाद उसे किनारे से तोड़ देती हैं. इसके पीछे मान्यताएं हैं कि इससे घर की समृद्धि बंधकर नहीं रहती है, बल्कि वो टूटकर घर के हर हिस्से में फैल जाती है. इसलिए कहा जाता है कि जिस घर की रसोई में इस बात का ख्याल रखा जाता है, वहां कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती है.

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वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार आटा गूंथने की प्रक्रिया केवल भौतिक कार्य नहीं है, बल्कि यह घर की ऊर्जा से भी जुड़ी मानी जाती है. (Photo: ITG)
वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार आटा गूंथने की प्रक्रिया केवल भौतिक कार्य नहीं है, बल्कि यह घर की ऊर्जा से भी जुड़ी मानी जाती है. (Photo: ITG)

भारतीय घरों में रसोई केवल भोजन बनाने की जगह नहीं मानी जाती है, बल्कि इसे ऊर्जा, परंपरा और परिवार की समृद्धि का केंद्र भी माना गया है. इसी कारण आटा गूंथने से लेकर रोटी बनाने तक की प्रक्रिया से जुड़ी कई मान्यताएं और परंपराएं विकसित हुई हैं. एक सामान्य परंपरा यह भी देखी जाती है कि आटा गूंथने के बाद उसे तुरंत उपयोग में लाने के बजाय कुछ समय आराम देने या हल्का ढककर रखने की सलाह दी जाती है. कई क्षेत्रों में इसे आटे को पूरी तरह से बांधकर रखने के बजाय तोड़कर रखने की परंपरा है, जिसका संबंध व्यावहारिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से जोड़ा जाता है.

वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार आटा गूंथने की प्रक्रिया केवल भौतिक कार्य नहीं है, बल्कि यह घर की ऊर्जा से भी जुड़ी मानी जाती है. कहते हैं कि जब आटा सही तरीके से तैयार किया जाता है और उसे कुछ समय के लिए ढककर रखा जाता है तो उसमें एक प्रकार की स्थिरता और सात्विक ऊर्जा का विकास होता है. इससे बनने वाली रोटियां अधिक स्वादिष्ट और पचने में हल्की होती हैं. परम्पराओं के अनुसार, यह भी विश्वास है कि आटे को सही तरीके से संभालने से घर में अन्न की बरकत बनी रहती है और आर्थिक स्थिरता का संकेत मिलता है.

क्यों गूंथने के तुरंत बाद नहीं बनाते रोटी?
कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि आटे को खुला छोड़ देना या अनदेखा करना नकारात्मक प्रभाव ला सकता है. इसे स्वच्छता और ऊर्जा के अपव्यय से जोड़ा जाता है. रसोई को पवित्र स्थान मानने के कारण यहां गंदगी या लापरवाही को अशुभ माना गया है. इसी कारण आटे को ढककर रखने की परंपरा स्वच्छता और अनुशासन का भी प्रतीक मानी जाती है. आटे से जुड़ी वैज्ञानिक दृष्टि भी इसे पूरी तरह समर्थन देती है. जब आटा गूंथा जाता है और उसे कुछ समय के लिए रख दिया जाता है तो उसमें मौजूद ग्लूटेन को स्थिरता मिलती है, जिससे रोटी नरम और बेहतर बनती है. यह प्रक्रिया केवल मान्यता नहीं बल्कि एक व्यवहारिक पाक विज्ञान भी है.

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गूंथने के बाद क्यों तोड़ते हैं आटा?
कुछ घरों में महिलाएं आटा गूंथने के बाद उसे किनारे से तोड़ देती हैं. इसके पीछे मान्यताएं हैं कि इससे घर की समृद्धि बंधकर नहीं रहती है, बल्कि वो टूटकर घर के हर हिस्से में फैल जाती है. इसलिए कहा जाता है कि जिस घर की रसोई में इस बात का ख्याल रखा जाता है, वहां कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती है.

क्यों गृहिणी को ही बनाना चाहिए भोजन?
भोजन बनाते समय मन शांत और सकारात्मक होना चाहिए. गुस्से या तनाव में बनाया गया भोजन ऊर्जा के स्तर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. इसलिए कहा जाता है कि परिवार के सदस्यों के लिए भोजन घर की गृहणी को ही बनाना चाहिए, क्योंकि किसी अन्य के बजाय गृहणी ही अपने परिवार के लिए अच्छे मन से भोजन पका सकती है. यह बात मानसिक स्थिति और भोजन की गुणवत्ता के बीच संबंध को दर्शाती है. भोजन बनाते समय बार-बार झगड़ा या अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे घर का वातावरण प्रभावित होता है. साथ ही रसोई में जूठे बर्तन लंबे समय तक नहीं रखने चाहिए. इससे आपकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है.

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