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Sawan Somwar Vrat Katha 2026: सावन सोमवार पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, मां पार्वती और भोलेनाथ करेंगे हर मनोकामना पूरी

Sawan Somwar Vrat Katha 2026: सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की भक्ति का सबसे पवित्र रूप माना जाता है. इस व्रत को करने से भक्तों को सुख-शांति और जीवन में सफलता मिलती है. इसी कारण सावन सोमवार की पूजा और कथा सुनना भी अत्यंत शुभ माना जाता है.

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सावन (Photo: Pexels)
सावन (Photo: Pexels)

Sawan Somwar Vrat Katha 2026: भगवान शिव की भक्ति के लिए सावन का महीना बहुत ही पवित्र माना जाता है. इस दौरान भक्त पूरी श्रद्धा के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन इनमें सावन के सोमवार का व्रत सबसे ज्यादा खास माना जाता है. मान्यता है कि जो लोग अपने जीवन में परेशानियों का सामना कर रहे हैं, जैसे धन की कमी, करियर में रुकावट या किसी प्रकार की मानसिक चिंता, वे सावन सोमवार का व्रत रखकर और उसकी कथा सुनकर राहत पा सकते हैं. कहा जाता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. तो आइए पढ़ते हैं सावन सोमवार की व्रत कथा.

सावन सोमवार व्रत कथा

बहुत समय पहले एक नगर में एक धनी व्यापारी रहता था. उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान सुख न मिलने के कारण वह अंदर से बहुत दुखी रहता था. अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए वह हर सोमवार को व्रत रखता और पूरे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करता था. उसकी सच्ची भक्ति देखकर एक दिन माता पार्वती प्रसन्न हो गईं. उन्होंने भगवान शिव से उस व्यापारी की मनोकामना पूरी करने के लिए कहा. तब शिवजी ने समझाया कि हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है और भाग्य में जो लिखा होता है, वही मिलता है. फिर भी माता पार्वती के आग्रह को देखते हुए उन्होंने उस व्यापारी को पुत्र का वरदान दे दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उस बच्चे की आयु केवल 12 वर्ष होगी.

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कुछ समय बाद व्यापारी के घर पुत्र का जन्म हुआ. बेटा बड़ा होने लगा और जब वह करीब 11 साल का हुआ तो उसे पढ़ाई के लिए काशी भेजने का निर्णय लिया गया. व्यापारी ने अपने बेटे के मामा को उसके साथ भेजा और रास्ते में यज्ञ कराने व जरूरतमंदों को दान देने की बात कही. यात्रा के दौरान वे एक नगर में रुके, जहां एक राजकुमारी का विवाह हो रहा था. जिस राजकुमार से शादी होनी थी, वह एक आंख से कमजोर था और इस बात को छिपाया जा रहा था. राजकुमार के पिता ने चाल चलते हुए व्यापारी के सुंदर बेटे को दूल्हा बनाकर राजकुमारी से विवाह करा दिया.

लेकिन वह लड़का बहुत सच्चा और ईमानदार था. उसने मौका पाकर राजकुमारी को सच्चाई बता दी और लिखकर समझा दिया कि उसका असली दूल्हा कोई और है. यह बात जानकर राजकुमारी के परिवार ने उसे विदा नहीं किया और बारात लौट गई. इसके बाद वह लड़का और उसका मामा काशी पहुंच गए और वहां शिक्षा के साथ-साथ यज्ञ करते रहे. समय बीतता गया और जिस दिन लड़के की आयु 12 वर्ष पूरी हुई, उसी दिन उसकी तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही समय में उसकी मृत्यु हो गई. मामा अपने भांजे के जाने से बहुत दुखी होकर रोने लगे.

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उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती वहां से गुजर रहे थे. माता पार्वती को उस व्यक्ति का दुख देखा नहीं गया और उन्होंने शिवजी से उस बालक को जीवन देने का आग्रह किया. पहले तो शिवजी ने कहा कि उसकी आयु पूरी हो चुकी है, लेकिन माता पार्वती के प्रेम और करुणा को देखकर उन्होंने उस बालक को फिर से जीवन दे दिया. भगवान शिव की कृपा से वह बालक जीवित हो गया. शिक्षा पूरी करने के बाद वह अपने मामा के साथ घर लौटने लगा. रास्ते में वे उसी नगर में रुके, जहां उसका विवाह हुआ था. वहां राजकुमारी के पिता ने उसे पहचान लिया और अपनी पुत्री को उसके साथ विदा कर दिया.

जब वह अपने घर पहुंचा तो उसके माता-पिता उसे जीवित देखकर बहुत खुश हुए. उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उसी रात भगवान शिव ने व्यापारी को स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि उसके सोमवार व्रत और सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर उन्होंने उसके पुत्र को नया जीवन और लंबी आयु दी है. इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि जो भी सच्चे मन से सावन सोमवार का व्रत करता है और भगवान शिव की आराधना करता है, उसके जीवन के दुख दूर होते हैं और उसकी इच्छाएं पूरी होती हैं.

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