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Radhashtami 2026 Date: 18 या 19 सितंबर, कब है राधा अष्टमी? यहां दूर करें तिथि का कंफ्यूजन

Radhashtami 2026 Date: ज्योतिष के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि श्री राधा रानी को समर्पित है. इस खास दिन श्री राधा रानी का अवतरण हुआ था, इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन श्री राधा रानी की पूजा की जाती है और उन्हें उनकी प्रिया चीजों का भोग लगाया जाता है. ऐसा करने से साधक को राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है और राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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राधा अष्टमी 2026 (Photo: Pixabay)
राधा अष्टमी 2026 (Photo: Pixabay)

Radhashtami 2026 Date: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बरसाने में राधा जी का जन्म हुआ था. जिस दिन राधा जी का प्राकट्य हुआ, उस दिन को राधाष्टमी के नाम से मनाया जाता है. इस बार राधाष्टमी का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा. मान्यता है कि राधा जी का जन्म भगवान श्रीकृष्ण के साथ सृष्टि में प्रेम भाव और प्रेम के माध्यम से भक्ति भाव को मजबूत करने के लिए हुआ था. कुछ लोगों का मानना है कि राधा एक भाव हैं, जो कृष्ण के मार्ग पर चलने से प्राप्त होता है. जो व्यक्ति कृष्ण के प्रेम में लीन होकर उनके मार्ग पर चलता है, उसे राधा भाव की प्राप्ति होती है.

कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति श्रीकृष्ण के प्रेम में लीन होता है, वह राधा भाव को प्राप्त करता है. वैष्णव परंपरा में राधा और कृष्ण का मिलन व्यक्ति के अंतिम आध्यात्मिक उद्देश्य से जोड़ा जाता है. कुछ आध्यात्मिक मान्यताओं में भगवान कृष्ण को सहस्रार चक्र और राधा को कुंडलिनी शक्ति के रूप में समझाया गया है. जब कुंडलिनी शक्ति सहस्रार चक्र में जाकर कृष्ण से मिलती है, तब व्यक्ति को मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होने की बात कही जाती है.

राधाष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त (Radha Astami 2026 Date)

द्रिक पंचांग के अनुसार, राधाष्टमी की तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा. यानी उदयातिथि के अनुसार, राधाष्टमी 19 अगस्त, शनिवार के दिन ही मनाना शुभ रहेगा. 

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राधाष्टमी पूजन मुहूर्त- दोपहर 11 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक

राधाष्टमी पर राधा जी की पूजा कैसे करें?

सबसे पहले राधा जी की धातु या पाषाण की प्रतिमा लेकर आएं. प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं और फिर उन्हें नए वस्त्र धारण करवाएं. फिर, दोपहर के समय पूजा के लिए मंडप बनाएं. मंडप के अंदर तांबे या मिट्टी का कलश रखें और उसमें जल भरें. इसके बाद दो वस्त्रों के बीच राधा जी की प्रतिमा स्थापित करें.

राधा जी को भोग लगाएं. धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें. इसके बाद राधा जी की आरती करें. संभव हो तो राधाष्टमी पर उपवास भी रखें. अगले दिन सुबह किसी सुहागन महिला को श्रृंगार की सामग्री और पूजा में इस्तेमाल की गई वस्तुओं का दान करें. इसके बाद भोजन ग्रहण करके व्रत का पारण करें. जिस प्रेम और भक्ति के साथ आप श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाते हैं और भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में मनाते हैं, उसी तरह राधा जी की जन्मतिथि यानी राधाष्टमी भी दोपहर के समय पूरे प्रेम और श्रद्धा के साथ मनाएं.

प्रेम में सफलता के लिए राधा-कृष्ण की पूजा

अगर आप प्रेम में सफलता चाहते हैं, तो राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा करें. भगवान कृष्ण को पीले और राधा जी को गुलाबी वस्त्र अर्पित करें.

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इसके बाद "राधा वल्लभाय नमः" मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें. मान्यता है कि राधा-कृष्ण की संयुक्त उपासना प्रेम और रिश्तों में सकारात्मकता के लिए विशेष मानी जाती है.

अखंड राधा-कृष्ण भक्ति के लिए उपाय

अगर आप श्री राधा और श्रीकृष्ण की अखंड भक्ति का वरदान पाना चाहते हैं, तो दोपहर के समय राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा करें. उनके सामने घी का दीपक जलाएं. भगवान कृष्ण को तुलसी दल और माता राधा को मिश्री अर्पित करें.

इसके बाद इस दोहे का 108 बार जाप करें -

"मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोई.
जा तन की झांई परे, श्याम हरित दुति होई."

दोहा पढ़ने के बाद भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी से अखंड भक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करें.

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