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Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी पर नहीं दिख रहे तारे तो कैसे खोलें व्रत? जानें क्या है सही तरीका

Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी 2026 पर अगर बादल या प्रदूषण के कारण तारे दिखाई न दें तो व्रत कैसे खोलें? जानें तारों को अर्घ्य देने का तरीका, पूजा विधि और चंद्रमा देखकर व्रत खोलने की परंपरा.

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जानें तारों को अर्घ्य देने का तरीका, पूजा विधि और चंद्रमा देखकर व्रत खोलने की परंपरा.
जानें तारों को अर्घ्य देने का तरीका, पूजा विधि और चंद्रमा देखकर व्रत खोलने की परंपरा.

Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली महिलाओं को शाम होते ही तारों के निकलने का इंतजार रहता है. पूरे दिन संतान की सलामती और लंबी उम्र की कामना के साथ व्रत रखने के बाद महिलाएं तारों को देखकर अर्घ्य देती हैं और फिर व्रत का पारण करती हैं. लेकिन अगर आसमान में बादल छाए हों या प्रदूषण की वजह से तारे दिखाई न दें तो क्या किया जाए? क्या तारों के दर्शन किए बिना व्रत खोलना ठीक है? इस स्थिति में व्रत रखने वाली महिलाओं को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.

तारे दिखाई न दें तो किस तरह करें व्रत का पारण?

अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देना व्रत की प्रमुख परंपराओं में शामिल है. लेकिन मौसम खराब होने पर कई बार आसमान साफ नहीं रहता. ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपने शहर में तारों के उदय का निर्धारित समय जान लें. अगर उस समय भी तारे बादलों के कारण दिखाई नहीं देते हैं, तो निर्धारित समय पर तारों का स्मरण करते हुए अर्घ्य देने की परंपरा अपनाई जा सकती है.

इसके लिए एक लोटे में जल भरें और उसमें थोड़ा दूध मिला लें. इसके बाद आसमान की ओर मुख करके अहोई माता का ध्यान करें, संतान की खुशहाली की प्रार्थना करते हुए जल अर्पित करें. इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत खोल सकती हैं. हालांकि, अलग-अलग परिवारों में इस स्थिति को लेकर अलग मान्यताएं हो सकती हैं.

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 वीडियो कॉल पर तारे देखकर खोल सकते हैं व्रत?

कई बार एक शहर में मौसम खराब होने के कारण तारे दिखाई नहीं देते, जबकि दूसरे शहर में आसमान साफ रहता है. ऐसी स्थिति में कुछ परिवार वीडियो कॉल के जरिए दूसरे स्थान से तारों के दर्शन करने का विकल्प अपनाते हैं. इसे एक प्रचलित वैकल्पिक मान्यता के रूप में देखा जाता है. हालांकि, शास्त्रीय रूप से इसे सभी के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जाता. इसलिए इस बारे में अपने घर की परंपरा का पालन करना बेहतर है.

अहोई अष्टमी पर कैसे करें तारों की पूजा?

अहोई अष्टमी के दिन शाम को पूजा की तैयारी कर लें. पूजा के लिए अहोई माता की तस्वीर या दीवार पर उनका चित्र बनाकर विधि-विधान से पूजा करें. इसके बाद दीपक जलाएं और फल, मिठाई तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.

तारों के दर्शन के समय एक लोटे में जल लेकर उसमें थोड़ा दूध मिला सकते हैं. इसके बाद तारों की ओर देखकर अर्घ्य दें.  संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी जीवन की कामना करें. पूजा के बाद अहोई माता की आरती करें,  परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लें.

 अहोई अष्टमी 2026: पूजा और तारों के दर्शन का समय

इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जा रहा है. पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगी.

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-  पूजा का शुभ मुहूर्त:  शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक
-  तारों के दर्शन का समय:  शाम करीब 6 बजे
चंद्रोदय का समय:  रात करीब 11:40 बजे

ये समय नई दिल्ली के लिए हैं. अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और तारों के उदय के समय में अंतर हो सकता है. इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय जरूर देख लें.

अहोई अष्टमी पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा

अहोई अष्टमी का व्रत सामान्य रूप से तारों को अर्घ्य देने के बाद खोला जाता है. हालांकि, कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी है. ऐसे में जिन महिलाओं के घर में चंद्रमा देखकर व्रत खोलने का रिवाज है, वे उसी परंपरा का पालन कर सकती हैं. चंद्रमा को अर्घ्य देने से पहले अपने शहर का चंद्रोदय समय जरूर पता कर लें.

अहोई अष्टमी के व्रत से जुड़े नियम और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं. इसलिए व्रत खोलने के लिए अपने परिवार की मान्यता को प्राथमिकता दें.

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