Bonalu Festival: तेलुगु एक्ट्रेस फारिया अब्दुल्ला इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. फारिया ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपना एक इमोशनल वीडियो शेयर किया है. वीडियो में वह हैदराबाद के बोनालु त्योहार में शामिल होने को लेकर हुई ट्रोलिंग पर बात करते हुए भावुक हो गईं. (Photo: ITG)
दरअसल, फारिया 10 अगस्त को मीरलम मंडी स्थित श्री महाकालेश्वर अम्मावारी मंदिर में बोनालु त्योहार में शामिल हुईं थी. इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया गया. (Photo: ITG)
इस बोनालु त्योहार में फारिया ने ट्रेडिशनल कपड़ों में तैयार होकर श्रद्धालुओं के साथ हिस्सा लिया था. हालांकि, फारिया का बोनालु त्योहार में शामिल होना कुछ लोगों को पसंद नहीं आया. सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि उन्होंने हिंदू त्योहार में हिस्सा क्यों लिया? इसके बाद फारिया ने अपनी आस्था और परवरिश के बारे में बात करते हुए ट्रोलिंग का जवाब भी दिया. लेकिन, जिस बोनालु उत्सव पर इतना विवाद उठ रहा है, उसके बारे में विस्तार से जानते हैं. (Photo: ITG)
बोनालु एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जिसमें देवी महाकाली की पूजा की जाती है. यह त्योहार हर साल हैदराबाद, सिकंदराबाद और तेलंगाना के कई हिस्सों में मनाया जाता है. यह उत्सव आमतौर पर आषाढ़ महीने में होता है और करीब एक महीने तक चलता है. (Photo: ITG)
इस दौरान महिलाएं पारंपरिक कपड़े पहनकर देवी को बोनम चढ़ाती हैं. बोनम मिट्टी के एक बर्तन में पकाए गए चावल, गुड़, दही और पानी से तैयार किया जाता है. इस बर्तन को फूलों से सजाया जाता है और महिलाएं इसे अपने सिर पर रखकर मंदिर में देवी को अर्पित करती हैं. (Photo: PTI)
मान्यता है कि इस त्योहार की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी. उस समय हैदराबाद में महामारी फैल गई थी. हैदराबाद की सेना की एक टुकड़ी ने देवी महाकाली से महामारी खत्म करने की प्रार्थना की थी. मान्यता है कि महामारी खत्म होने के बाद उन्होंने हैदराबाद में देवी महाकाली की मूर्ति स्थापित की. तभी से बोनालु मनाने की परंपरा शुरू हुई. (Photo: PTI)
मान्यता है कि सिर पर बोनम लेकर चलने वाली महिलाओं में देवी की शक्ति आ जाती है. इसलिए, जब वे मंदिर के पास पहुंचती हैं, तो श्रद्धालु उन पर पानी छिड़कते हैं. ऐसा देवी को शांत करने के लिए किया जाता है. (Photo: PTI)
बोनालु उत्सव में पोथुराजू की भी खास भूमिका होती है. उन्हें देवी महाकाली का भाई माना जाता है. पोथुराजू का रूप एक मजबूत और बिना शर्ट के पुरुष के रूप में होता है. वह लाल धोती पहनते हैं, पैरों में घुंघरू बांधते हैं और शरीर पर हल्दी और माथे पर सिंदूर लगाते हैं. ढोल-नगाड़ों की तेज आवाज के बीच पोथुराजू नृत्य करते हैं और पलाहारम बांडी नाम की शोभायात्रा के आगे-आगे चलते हैं. (Photo: PTI)