राजस्थान में कोटा के अनंतपुरा थाना क्षेत्र की बरड़ा बस्ती में रविवार सुबह बारिश के बीच 33 केवी हाईटेंशन लाइन का इंसुलेटर टूटने से बड़ा हादसा हो गया. अंबेडकर चौक के पास दो मकानों के बीच लगे बिजली टावर से अचानक करंट पूरे इलाके में फैल गया. बारिश के कारण गीली जमीन और दीवारों के जरिए करीब 200 मीटर के दायरे में स्थित 50 से अधिक घरों में करंट दौड़ गया. इस दौरान 40 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आए और पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई.
सलमा ने सबको बचाया और दे दी खुद की जान
हादसे के दौरान 30 साल की सलमा अपने बच्चों और परिजनों को बचाने के लिए दौड़ी. उसने सभी को किसी तरह बाहर निकाल लिया, लेकिन घर का लोहे का गेट बंद करते समय खुद करंट की चपेट में आ गई. गंभीर रूप से झुलसी सलमा की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई. हादसे में दो पशुओं की भी करंट लगने से मौत हो गई.
करंट की चपेट में आए 40 लोग, 9 झुलसे
घटना में कुल 9 लोग झुलस गए, जिनका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज चल रहा है. घायलों में सलमा का 33 साल के पति अफाक, 60 साल के ससुर इशाक बेग, 50 साल की सास नशीवन बेग, 14 साल की भूरी बाई, जीया, 12 साल की आलिया, 9 साल के अर्शिल के अलावा 35 साल की सीमा कंवर और 48 साल कीअयोध्या बाई शामिल हैं.
प्रत्यक्षदर्शी सावन कुमार ने बताया कि वह सामान लेने जा रहा था, तभी देखा कि पूरी बस्ती में करंट फैल गया है. लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे. कई लोगों को लगातार तीन-चार बार तेज झटके लगे. जो मदद के लिए आगे बढ़ा, उसे भी करंट लगने लगा. बाद में स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग को सूचना देकर सप्लाई बंद करवाई.
'बिजली विभाग पर लापरवाही से ये हाल'
स्थानीय लोगों और पूर्व पार्षद कमलकांत शर्मा ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना है कि सालों से हाईटेंशन लाइन और टावर रिहायशी इलाके के बीच बने हुए हैं. विभाग हर साल केवल नोटिस देकर औपचारिकता पूरी करता है, लेकिन लाइन हटाने या सुरक्षा के स्थायी इंतजाम नहीं किए गए.
वहीं, जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एक्सईएन आशीष जौहरी ने बताया कि बारिश के दौरान तकनीकी खराबी से इंसुलेटर टूट गया. जब यह लाइन डाली गई थी, तब वहां कोई मकान नहीं था, लेकिन अब टावर के चारों ओर घनी आबादी बस चुकी है. घटना के बाद क्षतिग्रस्त इंसुलेटर बदलकर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है. पुलिस ने मर्ग दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. वहीं, पीड़ित परिवार को मुआवजा देने और हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है.