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घर का धुला फर्श और दीवारों पर खून के छींटे बने सबूत, ऐसे खुला अजमेर हत्याकांड का राज

अजमेर के श्रीरामपुरा गांव में पूर्व सरपंच रामसिंह चौधरी समेत चार लोगों की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. इस वारदात को पहली पत्नी सुनीता, बेटी सरिता और नाबालिग बेटे ने अंजाम दिया था. घर में मिले खून के धब्बों और फोरेंसिक जांच ने पूरे मामले का राज खोल दिया. पुलिस ने मां-बेटी को गिरफ्तार कर लिया है.

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मां, बेटी और नाबालिग बेटे ने मिलकर रची थी पूरी साजिश. (Photo: Chandra Shekhar Sharma/ITG)
मां, बेटी और नाबालिग बेटे ने मिलकर रची थी पूरी साजिश. (Photo: Chandra Shekhar Sharma/ITG)

अजमेर जिले के बोराड़ा थाना क्षेत्र के श्रीरामपुरा गांव में हुए चार लोगों के सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. पूर्व सरपंच रामसिंह चौधरी, उनकी मां पुसी देवी, दूसरी पत्नी सुरज्ञान और महिमा की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या की गई थी. इस खौफनाक वारदात को किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं बल्कि रामसिंह की पहली पत्नी, बेटी और नाबालिग बेटे ने अंजाम दिया था.

अजमेर पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने हत्या के बाद पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की थी. लेकिन घर के अंदर मिले खून के धब्बों और फोरेंसिक जांच ने पूरे मामले का राज खोल दिया. पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी 43 वर्षीय सुनीता और उसकी 18 वर्षीय बेटी सरिता उर्फ एकता को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं एक किशोर को निरुद्ध किया गया है.

पुलिस को गुमराह करने के लिए रची झूठी कहानी

अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, जब पुलिस टीम श्रीरामपुरा स्थित रामसिंह चौधरी के घर पहुंची, तो पहली पत्नी सुनीता ने पुलिस को एक कहानी सुनाई. उसने दावा किया कि उसकी सास पुसी देवी की अचानक तबीयत खराब हो गई थी. इसके बाद रामसिंह, उसकी दूसरी पत्नी सुरज्ञान और महिमा उन्हें सुबह करीब 5:30 बजे स्कॉर्पियो गाड़ी से अस्पताल लेकर गए थे.

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हालांकि पुलिस को शुरुआत से ही इस कहानी पर शक था. जब पुलिस ने सुनीता, उसकी बेटी और बेटे से अलग-अलग पूछताछ की, तो तीनों के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे थे. हर किसी ने घटना को लेकर अलग कहानी बताई। इससे पुलिस का शक और गहरा हो गया.

संदेह के आधार पर पुलिस ने घर का बारीकी से निरीक्षण किया. जांच के दौरान सामने आया कि घर का फर्श पूरी तरह धुला हुआ था और मकान की सफाई की जा रही थी. इसके बावजूद घर के खुले चौक, दीवारों और कुछ बर्तनों पर खून के छींटे दिखाई दिए. मौके पर मौजूद एमओबी और मोबाइल फोरेंसिक यूनिट ने जब इन धब्बों की केमिकल जांच की, तो पुष्टि हुई कि यह मानव रक्त है. यही खून के निशान पूरे हत्याकांड की सबसे बड़ी कड़ी बने.

वैज्ञानिक सबूत सामने आने के बाद पुलिस ने तीनों से सख्ती से पूछताछ की. इसके बाद उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पूछताछ में सामने आया कि रामसिंह चौधरी ने साल 2016 में सुरज्ञान से दूसरी शादी की थी. इसके बाद घर में लगातार विवाद बढ़ने लगे थे. पुलिस के अनुसार रामसिंह अपनी पहली पत्नी सुनीता और बेटी सरिता के साथ आए दिन मारपीट और प्रताड़ना करता था. इतना ही नहीं, उन्हें रिश्तेदारों के यहां आने-जाने से भी रोक रखा था.

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लगातार हो रही प्रताड़ना से परेशान होकर सुनीता ने करीब 4 से 5 महीने पहले ऑनलाइन धारदार हथियार मंगवाए थे. पुलिस के मुताबिक 27 मई 2026 की शाम को भी रामसिंह और सुनीता के बीच विवाद हुआ था. इसके बाद 28 मई की सुबह करीब 4 बजे सुनीता, उसकी बेटी सरिता और नाबालिग बेटे ने मिलकर सो रहे चारों लोगों पर धारदार हथियार से हमला कर दिया. हमले में रामसिंह, उसकी मां पुसी देवी, दूसरी पत्नी सुरज्ञान और महिमा की मौत हो गई.

दूसरी शादी और पारिवारिक विवाद बना खूनी हत्याकांड की वजह
 

वारदात के बाद आरोपियों ने शवों को स्कॉर्पियो गाड़ी में रखा. फिर ट्रैक्टर से डीजल निकालकर कार को घर से करीब एक किलोमीटर दूर स्टेट हाईवे 7ई तक ले जाया गया. वहां सड़क किनारे कार और शवों पर डीजल डालकर आग लगा दी गई ताकि पूरा मामला हादसा लगे. फिलहाल पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए हैं। वहीं पूरे मामले में आगे की जांच जारी है.
 

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