संसद का मॉनसून सत्र में अगर आप पक्ष निपक्ष की बहस देखना चाहते थे और ये सोच रहे थे कि जवाबदेही तय होगी तो आपको ज्यादा निराशा नहीं हुई होगी क्योंकि अब तक तो हम सबको आदत हो ही चुकी है. सत्र आएगा सत्र जाएगा. मगर काम नहीं हो पाएगा. 19 दिन के संसद सत्र में से 18 दिन हंगामे की भेंट चढ़ गए... पूरे सत्र में मुद्दा गरम रहा.. लेकिन चर्चा हजम हो गई. देखें हल्ला बोल.