चुनावी माहौल ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को भी करीब करीब दिल्ली जैसा बना दिया है. ममता बनर्जी के सामने भी अरविंद केजरीवाल जैसी चुनौती खड़ी हो गई है. कुछ हद तक हेमंत सोरेन जैसी भी समझ सकते हैं.
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और बीजेपी के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी है. कोलकाता में I-PAC और प्रतीक जैन के ठिकानों पर ED यानी प्रवर्तन निदेशालय की रेड के खिलाफ, दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है. गृह मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे डेरेक ओ'ब्रायन, शताब्दी रॉय और महुआ मोइत्रा सहित सभी टीएमसी सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. ममता बनर्जी भी विरोध मार्च निकालने वाली हैं.
बंगाल के राजनीतिक समीकरण भी दिल्ली जैसे ही हैं. बीजेपी और ममता बनर्जी आमने सामने हैं. ममता बनर्जी को भी लड़ाई अकेले ही लड़नी है. 2025 के बिहार या 2024 के झारखंड की तरह तो कतई नहीं. बंगाल में एक फर्क ये भी है कि कांग्रेस और लेफ्ट दोनों ही ममता बनर्जी के खिलाफ हैं - और बेहद प्रतिकूल हालात में ममता बनर्जी को बीजेपी से जंग लड़नी है.
ममता बनर्जी की मुश्किल ये है कि राजनीतिक रूप से दुरुस्त होने के बावजूद वो कानूनी मुसीबतों की तरफ कदम बढ़ा चुकी हैं. ये लड़ाई अब महज राजनीतिक नहीं रह गई है, बल्कि कानून का पेच भी राजनीति में शामिल हो गया है. मामला अदालत में भी पहुंच चुका है.
कोलकाता में ED की छापे पर ममता का छापा
ED ने सॉल्ट लेक सेक्टर V में I-PAC के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर पर रेड डाली थी. ये रेड कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस के सिलसिले में हुई थी. सूचना पाते ही ममता बनर्जी I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं, और फौरन ही कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा भी मौके पर पहुंच गए. ममता बनर्जी करीब 20-25 मिनट तक अंदर रहीं और फिर हरे रंग का एक फोल्डर हाथ में लिए बाहर आते ही प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों पर हदें पार कर जाने का इल्जाम लगाया.
मीडिया के सामने आकर ममता बनर्जी ने कहा, 'उन्होंने हमारे IT सेल के इंचार्ज के घर और ऑफिस पर छापा मारा है... वे मेरी पार्टी के डॉक्यूमेंट्स और हार्ड डिस्क जब्त कर रहे थे, जिनमें विधानसभा चुनावों के लिए हमारी पार्टी उम्मीदवारों की डिटेल्स हैं... मैं उन्हें वापस ले आई हूं. ईडी के रेड के कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़े होने के दावों को खारिज करते हुए बोलीं, इन चीजों का किसी भी फाइनेंशियल जांच से कोई लेना-देना नहीं है.
राजनीतिक लड़ाई अब कानून के अखाड़े में
1. पश्चिम बंगाल में ED की रेड से शुरू हुई राजनीति अब कानूनी लड़ाई का रूप लेकर अदालत पहुंच चुकी है. ED ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, और जांच में दखलंदाजी का आरोप लगाने हुए याचिका दायर करने की अनुमति मांगी है. ED का दावा है कि रेड और तलाशी कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस के सिलसिले में हुई है, और ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया है. ममता बनर्जी पर रेड के दौरान 'अहम सबूत' जबरदस्ती हटा दिए जाने का भी आरोप है.
2. सड़क पर उतरने और राजनीतिक लड़ाई शुरू करने के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ED के अफसरों के खिलाफ भी मुकदमा भी दर्ज करवा दिया है.
3. I-PAC ने भी हाई कोर्ट का रुख किया है, और ED की कार्रवाई का विरोध करते हुए रेड की वैधता पर सवाल उठाया है. I-PAC, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को पॉलिटिकल कंसल्टेंसी देने के साथ ही पार्टी के IT और मीडिया ऑपरेशंस को भी मैनेज करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतीक जैन टीएमसी की आईटी सेल के हेड भी हैं.
ममता के सामने केजरीवाल जैसी मुश्किल
ममता बनर्जी की राजनीतिक लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी उनकी कमजोर कड़ी हैं. अभिषेक बनर्जी को ममता बनर्जी के अघोषित वारिस के तौर पर भी देखा जाता है. प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा से कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूछताछ भी कर चुके हैं.
अभिषेक बनर्जी ईडी के समन को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी जा चुके हैं, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो चुकी है. अभिषेक बनर्जी चाहते थे कि ईडी पूछताछ कोलकाता में ही करे, जहां उनका रहना होता है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछताछ के लिए दिल्ली न बुलाए जाने वाली अर्जी खारिज कर दी थी.
ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वो अभिषेक बनर्जी को बचाएं, या खुद को. अपनी राजनीतिक जमीन को. कुर्बानी देने की नौबत आए, तो क्या करें. और, छोटी कुर्बानी देने से जंग जीत लें, ये भी जरूरी नहीं है. अरविंद केजरीवाल को जेल भेजे जाने के बाद ये भी साफ हो चुका है कि मुख्यमंत्री को भी गिरफ्तार किया जा सकता है.
बेशक गिरफ्तारी महज कानूनी आधार पर नहीं होने वाली है, राजनीतिक अप्रूवल भी जरूरी है. अगर ऐसा होता है तो गिरफ्तारी की नौबत आने पर तरीका अरविंद केजरीवाल की तरह भी हो सकता है, या फिर हेमंत सोरेन जैसा. गिरफ्तारी से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना.
अरविंद केजरीवाल जेल से भी सरकार चला चुके हैं, और चुनाव में सत्ता गंवा चुके हैं. हेमंत सोरेन जेल से जमानत पर छूटकर कमान संभाले थे, और चुनाव जीतकर सत्ता में वापसी भी की - ममता बनर्जी के सामने भी मिलती जुलती ही परिस्थितियां हैं, अगर अभी नहीं तो आने वाले दिनों में हो सकती हैं.