महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का विधान परिषद का कार्यकाल 13 मई को खत्म होने जा रहा है. उद्धव ठाकरे के रिटायर होने के साथ ही महाराष्ट्र विधान परिषद की 9 सीटें खाली होने जा रही हैं. चुनाव चाहे जब भी कराए जाएं, लेकिन जोड़ तोड़ अभी से शुरू हो गया है.
उद्धव ठाकरे सहित कार्यकाल पूरा कर रहे सभी सदस्यों को महाराष्ट्र विधान परिषद में विदाई दी गई. जैसे राज्यसभा के सदस्यों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभकामनाएं दी थीं, महाराष्ट्र विधान परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी वैसा ही किया. लेकिन, सबसे ज्यादा ध्यान खींचा उद्धव ठाकरे ने.
देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के साथ वक्त के साथ बदलते रिश्तों पर शेर पढ़कर अपनी भावना जाहिर तो की ही, उद्धव ठाकरे की तारीफ कुछ ऐसे की जो उनके गठबंधन साथी डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा होगा. देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'मैं एक बात पूरी निश्चितता के साथ कहना चाहता हूं... राजनीति में काम करते हुए मैंने अक्सर ऐसे उदाहरण देखे हैं जहां फैसले बिना किसी संभावित परिणाम की परवाह किए ले लिए जाते हैं... एक मिसाल जो हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे ने कायम की थी... सबसे आम लोगों को राजनीतिक पहचान देने की क्षमता... ऐसे व्यक्ति जिनका कोई राजनीतिक चेहरा नहीं होता और उनके भीतर से ही राजनीतिक नेतृत्व को पोषित करना... बालासाहेब ने यह गुण हम सभी को दिया, और उद्धव ठाकरे ने इसे पूरी लगन से पोषित किया है.'
शरद पवार के फिर से राज्यसभा जाने में सबसे बड़ा योगदान तो शिवसेना (यूबीटी) का ही था, क्या एक्सचेंज ऑफर में अब वैसा ही तोहफा उद्धव ठाकरे को मिलेगा - और क्या कांग्रेस फिर से मन मसोसकर रह जाएगी?
उद्धव ठाकरे को पवार जैसा तोहफा मिलेगा क्या
विधान परिषद की खाली हो रही 9 सीटों में से 8 पर महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति की जीत तो पक्की है. नंबर के हिसाब से विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी के हिस्से में एक सीट आ सकती है. बशर्ते, महायुति की तरफ से एक और उम्मीदवार न उतार दिया जाए, और क्रॉस वोटिंग न हो.
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में भी महाविकास आघाड़ी की ऐसी ही स्थिति थी, एक से ज्यादा सीट संभव नहीं था. राज्यसभा की सीटें तो कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को भी चाहिए थीं, लेकिन शरद पवार की शख्सियत सब पर भारी पड़ी - और शरद पवार निर्विरोध फिर से राज्यसभा पहुंच गए.
उद्धव ठाकरे के लिए विधान परिषद की राह आसान बनाने के लिए शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक फॉर्मूला सुझाया था, शरद पवार राज्यसभा में गठबंधन का प्रतिनिधित्व करें, और उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र विधान परिषद में.
शरद पवार तो राज्यसभा पहुंच गए, अब उद्धव ठाकरे की बारी है. उसी तरीके से विधान परिषद के लिए. शरद पवार तो निर्विरोध राज्यसभा पहुंच गए, क्या उद्धव ठाकरे के मामले में भी ऐसा संभव है?
बेशक उद्धव ठाकरे के पास महाविकास आघाड़ी में सबसे ज्यादा विधायक हैं, लेकिन राज्यसभा वाले फार्म्युले से थोड़ा भी इधर उधर हुआ, तो बात बिगड़ जाएगी. जैसे शरद पवार की जगह कोई और होता, तो कांग्रेस वैसे नहीं तैयार होती. अगर उद्धव ठाकरे भी अपने कोटे से किसी और के बारे में सोचें, तो कुछ भी हाथ नहीं आने वाला है. विधान परिषद की सीट के लिए कांग्रेस में दावेदार भी कई नेता हैं.
एमवीए में उद्धव ठाकरे के पास 20 विधायक, कांग्रेस के पास 16 विधायक और शरद पवार के पास 10 विधायक हैं. अगर एक सीट के लिए 29 वोट होते हैं, तो 17 वोट ज्यादा हैं, लेकिन उससे दूसरी सीट मिलने से रही.
लेकिन, क्या उद्धव ठाकरे भी विधान परिषद वैसे ही जा सकते हैं, शरद पवार को मौका मिल गया. महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में तो निर्विरोध चुनाव होने की कम ही संभावना बनती है. जैसे एकनाथ शिंदे को घेरने का कोई मौका उद्धव ठाकरे नहीं छोड़ते, एकनाथ शिंदे भी तो वैसा ही करेंगे.
तब क्या होगा, अगर एकनाथ शिंदे अपना तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतार देते हैं?
कांग्रेस के हाथ तो कुछ नहीं लगने वाला है
राज्यसभा चुनाव में शरद पवार का सपोर्ट करने के एवज में कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधान परिषद की एक सीट की डिमांड रखी है. कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा है, एमवीए के सहयोगी दलों को विधान परिषद की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि कांग्रेस ने शरद पवार का राज्यसभा के लिए सपोर्ट किया था.
अगर कांग्रेस की मांग शिवसेना (यूबीटी) ठुकरा दे, तो क्या कांग्रेस उद्धव ठाकरे के सामने फिर से विधान परिषद जाने के रास्ते में अड़ंगा लगा सकती है?
1. नंबर गेम तो यही कहता है कि कांग्रेस गेम में है ही नहीं. उद्धव ठाकरे के पास 20 विधायक हैं, और शरद पवार के पास 10. शरद पवार के सपोर्ट के बाद उद्धव ठाकरे को कांग्रेस के सपोर्ट की जरूरत भी नहीं होगी. और, उद्धव ठाकरे की राज्यसभा चुनाव में मदद ले चुके शरद पवार के लिए कदम पीछे खींचना सही नहीं होगा.
2. कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं. अगर शरद पवार की तरफ से कांग्रेस को समर्थन मिल भी जाए, तो उद्धव ठाकरे के साथ दिए बगैर नंबर पूरा नहीं हो पाएगा. ऐसे में राज्यसभा की तरह कांग्रेस को विधान परिषद चुनाव में भी मायूस होकर रहना पड़ेगा.