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TMC में 'बगावत'... हार का ठीकरा कैसे ममता, अभ‍िषेक और i-pac पर आ ग‍िरा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार की वजह एक सप्ताह में 180 डिग्री घूम गई है. पार्टी चुनाव नतीजों के तत्काल बाद निर्वाचन आयोग पर दोष मढ़ रही थी. लेकिन, अब तृणमूल कांग्रेस के भीतर का झगड़ा खुलकर सामने आ गया है. अभिषेक बनर्जी, ममता बनर्जी और चुनाव प्रबंधन करने वाली संस्था आईपैक पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है.

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तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी. (Photo: PTI)
तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी. (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल में पांच साल पहले बीजेपी को 100 सीटों तक न पहुंचने देने वाली ममता बनर्जी को इस बार तृणमूल कांग्रेस को भी सौ से कम सीटों पर सिमटते देखना पड़ा. बीजेपी की सीटों लेकर 2021 में दावा प्रशांत किशोर की तरफ से किया गया था. 2026 के चुनाव में प्रशांत किशोर तो नहीं थे, लेकिन उनकी ही बनाई संस्था आईपैक जरूर काम कर रही थी. 

प्रशांत किशोर को ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी साथ लाए थे, और इस बार आईपैक भी टीएमसी महासचिव के कारण ही काम कर रही थी. 2021 में भी टीएमसी नेताओं ने प्रशांत किशोर और उनकी टीम के काम के तौर-तरीके पर नाराजगी जताई थी. ऐसे टीएमसी नेताओं में तब शुभेंदु अधिकारी (मौजूदा मुख्यमंत्री) भी शामिल थे. शुभेंदु अधिकारी को मनाने और टीएमसी छोड़ने से रोकने के लिए तब प्रशांत किशोर उनके घर भी गए थे. 

चुनाव से पहले आईपैक के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी को लेकर खूब बवाल हुआ. ममता बनर्जी पर बतौर मुख्यमंत्री जांच में बाधा डालने का आरोप लगा, और मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदान से पहले आईपैक ने कामकाज समेट लिया था - और इस बात की भी काफी चर्चा रही. 

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जीत हर गलती ढक देती है, और हार सवालों के घेरे में खड़ा कर देती है. 2021 की जीत के बाद किसी की नाराजगी की कोई बात सामने नहीं आई. तब टीएमसी छोड़ बीजेपी गए कई नेता भी लौट आए थे, इस बार उलटी गंगा बह रही है. सीनियर टीएमसी नेता आईपैक के बहाने अभिषेक बनर्जी पर तो सवाल उठा ही रहे हैं, ममता बनर्जी को भी नहीं बख्शा जा रहा है.

निशाने पर अभिषेक बनर्जी, ममता को भी नहीं बख्शा

पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ लेने के कुछ ही देर बाद तृणमूल कांग्रेस के कई दफ्तरों में अविश्वास और बेचैनी का माहौल देखने को मिला. टीएमसी के सामने आ पड़ा संकट महज चुनावी शिकस्त के पोस्टमार्टम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठन के स्तर पर और अस्तित्व से जुड़ा संकट भी खड़ा हो गया है. 

जो नेता नतीजे आने से पहले तक तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व का लगातार बचाव कर रहे थे, अब वे खुल कर नाराजगी जताने लगे हैं, और नेतृत्व पर ही हार का ठीकरा फोड़ने लगे हैं. निशाने पर सबसे आगे तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी हैं, और उनके साथ ही चुनाव कैंपेन संभाल रही संस्था आईपैक के अधिकारी और कर्मचारी. टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और ममता बनर्जी के बाद दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता बनकर उभरे थे, लेकिन एक चुनावी हार ने उनको कठघरे में खड़ा कर दिया है. 

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नेताओं की बयानबाजी के मामले में तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी उनके बयानों से सहमत नहीं है. पार्टी विरोधी बयान और गतिविधियों को लेकर टीएमसी ने रिजू दत्ता, पापिया घोष, कोहिनूर मजूमदार और कार्तिक घोष जैसे नेताओं और प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा है.

कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि शीर्ष नेतृत्व के करीबी लोग जिला और स्थानीय स्तर के नेताओं से नियमित रूप से पैसे की मांग करते थे. मालदा जिले के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने तो टीएमसी की हार के लिए सीधे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है. 

कृष्णेंदु नारायण चौधरी का दावा है कि जमीनी स्तर की कई समस्याओं के बारे में उन्होंने ममता बनर्जी को भी बताने की कोशिश की थी. व्हाट्सऐप पर भी मैसेज भेजे थे, लेकिन हालात नहीं बदले. महाभारत की मिसाल देते हुए कृष्णेंदु नारायण चौधरी तो यहां तक कहने लगे हैं कि ममता बनर्जी 'धृतराष्ट्र' के रोल में उनको नजर आईं, सब कुछ देखते हुए भी अनदेखा किया.

टीएमसी की हार को लेकर मीडिया से कृष्णेंदु नारायण चौधरी का कहना था, सिर्फ एक शख्स है जिसने पार्टी को धीरे-धीरे खत्म कर दिया... वो अभिषेक बनर्जी हैं... जिस तरह उन्होंने पार्टी को चलाया, किसी कॉरपोरेट हाउस की तरह था... बंगाल की राजनीति कॉरपोरेट हाउस की तरह नहीं चलती.

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अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर टीएमसी उम्मीदवार आतिन घोष ने मीडिया से एक इंटरव्यू में कहा, अभिषेक बनर्जी आधुनिक नेता हैं... पार्टी को संगठित करने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद ली है. लेकिन, आधुनिक तकनीक टीएमसी के साथ लोगों की नब्ज को नहीं समझ सकती.

सीनियर टीएमसी नेता असित मजूमदार के निशाने पर भी अभिषेक बनर्जी ही लगते हैं. असित मजूमदार नेतृत्व के एक हिस्से पर अहंकार और प्रशासनिक निष्क्रियता का आरोप लगाते हैं. कहते हैं, गुटबाजी के कारण शासन और विकास परियोजनाएं ठप हो गयीं. और नतीजा सामने है. 
 
टीएमसी के सबसे सीनियर नेताओं में शुमार कल्याण बनर्जी भी हार के लिए आईपैक के चुनाव प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हैं, जाहिर है निशाने पर अभिषेक बनर्जी ही हैं. कहते हैं, कोई भी राजनीतिक ताकत हमेशा अपने चरम पर नहीं रह सकती... जब उभार चरम तक पहुंच जाता है, तो पतन भीतर से शुरू होता है... तृणमूल को तृणमूल ने ही हराया है. 

i-pac पर फोड़ा हार का ठीकरा

कल्याण बनर्जी का कहना है कि आईपैक को संगठन की कीमत पर ज्यादा अहमियत दी गई. कल्याण बनर्जी का मानना है, टीएमसी की हार के लिए इस पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म का चुनावी मैनेजमेंट जिम्मेदार था. कहते हैं, हर ग्राम पंचायत सदस्य खुद को टिकट का हकदार मान रहा था... अंदरूनी दरारों ने हमारी हार में बड़ी भूमिका निभाई.

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बयानबाजी को लेकर टीएमसी से निलंबित हो चुके रिजु दत्ता ने आईपैक, पार्टी की कार्यप्रणाली और संगठन के भीतर बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. रिजु दत्ता का सवाल है, आज प्रतीक जैन कहां हैं? वह भाग गए... उनको क्या नुकसान हुआ? टीएमसी से पैसा कमाया और बाजार से भी फंड जुटाया.

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में रिजु दत्ता सवाल उठाते हैं, जब दूसरे फेज का पोल खत्म हुआ तो आईपैक के डायरेक्टर विनेश चंदेल को बेल मिल गई! 

रिजु दत्ता का कहना है कि आईपैक ने टीएमसी को अंदर से खत्म कर दिया. कहते हैं, दीदी और अभिषेक दा को पार्टी के इस नुकसान की जिम्मेदारी लेनी होगी. रिजु दत्ता के मुताबिक, टीएमसी के निचले स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जनता के खिलाफ अत्याचार और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया, जिससे आम लोगों में पार्टी की छवि खराब हुई. 

गुस्सा तो ममता बनर्जी से भी है, लेकिन रिजु दत्ता को उनकी ईमानदारी पर शक नहीं है, कोई भी दीदी पर उंगली नहीं उठा सकता... उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कोई भ्रष्टाचार नहीं किया.

रिजु दत्ता कहते हैं, बाहर की एक संस्था ने पूरी पार्टी को कैप्चर कर लिया है. आज दीदी के नाम पर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है. केस का कुछ इधर उधर हो गया तो दीदी को जेल भी हो सकती है. 

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पूर्व विधायक खगेश्वर रॉय बीबीसी से कहते हैं, 'मैं इस नतीजे के लिए 98 फीसदी आई पैक को जिम्मेदार ठहराऊंगा. मैं 1998 से पार्टी के लिए काम कर रहा हूं. मैंने पंचायत से विधानसभा तक कई चुनाव देखे हैं. लेकिन, 2021 से आईपैक हम पर हावी होने लगा.'

मीडिया के सामने आकर पूर्व विधायक खगेश्वर रॉय ने टिकट के बदले पैसे मांगे जाने का भी आरोप लगाया था. खगेश्वर राय ने एक बार कहा था कि उम्मीदवार बनने की दौड़ में वह पैसे से हार गए. विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के 74 विधायकों के टिकट काट दिए गए थे. लीडरशिप की तरफ से तर्क दिया गया था कि उम्मीदवारों की सूची प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गई.

ममता बनर्जी के लिए और मुश्किल हुई आगे की लड़ाई

विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार से हारने के बाद बैरकपुर से टीएमसी उम्मीदवार राज चक्रवर्ती ने राजनीति से संन्यास लेने का एलान किया है. फिल्म निर्देशक राज चक्रवर्ती का कहना है, 2021 में मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई. लोगों ने मुझे काम करने का मौका दिया. पांच साल तक मैंने उसी तरह विधायक की जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की. 2026 में वह अध्याय समाप्त हो गया. साथ ही, मेरा राजनीतिक सफर भी खत्म हो गया.

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पूर्व खेल राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने कुछ दिन पहले कहा था, पार्टी ने उन्हें लॉलीपॉप की तरह राज्य मंत्री पद जिम्मेदारी दे दिया था... दफ्तर में चाय-बिस्किट खाने के अलावा उनके पास कोई काम नहीं था. एक वीडियो मैसेज में पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा था, जब मुझे राज्य मंत्री बनाया गया, तब मैंने सोचा था कि मैं बहुत विकास और सुधार कर पाऊंगा. 

मनोज तिवारी का आरोप है कि उनके बॉस रहे अरूप बिश्वास उनको काम ही नहीं करने देते थे. अरूप बिश्वास पिछली पश्चिम बंगाल सरकार में खेल मंत्री थे. मनोज तिवारी ने कोलकाता गए लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में अव्यवस्था और अफरा-तफरी के लिए अरूप बिश्वास को ही जिम्मेदार बताया.

रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के मौके पर एक कार्यक्रम में ममता बनर्जी का कहना था, मैं खुद वकील हूं, और अब बीजेपी के खिलाफ यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई खुलकर लड़ी जाएगी. 

विधानसभा चुनाव हारने के बाद टीएमसी नेताओं को डर है कि अब नगर महापालिका और पंचायत स्तर पर भी दल-बदल का खेल शुरू हो सकता है. ममता बनर्जी ने संगठन को संभालने के लिए अपनी टीम के अनुभवी और भरोसेमंद लोगों को मोर्चे पर लगाया है. 80 साल के शोभनदेव चट्टोपाध्याय को बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया है. 1998 में तृणमूल कांग्रेस के गठन के समय से ही ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में शामिल शोभनदेव चट्टोपाध्याय एकमात्र ऐसे विधायक हैं जो लगातार अपना 10वां कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं, जबकि ममता बनर्जी चुनाव हार गई हैं.

शोभनदेव चट्टोपाध्याय के साथ ही असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उप-नेता प्रतिपक्ष, और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम को चीफ व्हीप बनाया गया है. नियुक्तियों पर टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ही हस्ताक्षर किए हैं, जबकि ये सभी नेता ममता बनर्जी के करीबी बताए जाते हैं.

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