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लालू कुनबे में रिश्तों का 'उत्तरायण', लेकिन 5 सवाल अब भी 'दक्षिणायन'

कोई बिखरा हुआ परिवार एक होता है, तो सहज ही खुशी होती है. लालू यादव ने पहली बार तेज प्रताप यादव की घर वापसी के संकेत दिए हैं. तेजस्वी यादव की तरफ से तो कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आरजेडी को अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल में विलय की सलाह देकर तेज प्रताप यादव ने नई मुसीबत मोल ली है.

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तेज प्रताप को साथ रहने की लालू यादव की बात से तेजस्वी यादव कितने सहमत होंगे? (Photo: PTI)
तेज प्रताप को साथ रहने की लालू यादव की बात से तेजस्वी यादव कितने सहमत होंगे? (Photo: PTI)

पिछले छह महीनों में लालू यादव परिवार ने कई कड़वे घूंटे पिए हैं. अपनी निजी जिंदगी के कारण तेज प्रताप यादव विवादों में आए. परिवार से अलग होना पड़ा. विधानसभा चुनाव में तेज प्रताप और तेजस्‍वी के बीच अनबन सा‍र्वजनिक हुई. चुनाव हारने के बाद तेजस्‍वी और बहन रोहिणी के बीच तकरार को सबने देखा. लेकिन, जैसी क‍ि मान्‍यता है मकर संक्रांति से सूर्य जब उत्‍तर दिशा की ओर रुख करता है तो सब शुभ होना शुरू हो जाता है. कम से कम लालू परिवार ऐसे शुभ को अनुभव कर रहा होगा. लेकिन, कुछ बातें अब भी ऐसी हैं, जिससे कसर बाकी रह जाती है.

मकर संक्रांति पर तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज का सबसे बड़ा फल तो उन्‍हें मिला पिता लालू यादव का आशीर्वाद ही माना जाएगा. लंबे समय बाद उनके पिता लालू यादव का साथ आना तेज प्रताप के लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है. तेज प्रताप के आयोजन में लालू यादव का सबसे पहले पहुंचना और पूरे परिवार के मतभेदों के बावजूद साथ रहने की बात करना परिवार के हिसाब से बड़ी बात है. 

लेकिन तेजस्वी यादव का रुख न बदलना, और दही चूड़ा भोज के बाद अब तेज प्रताप यादव का तेजस्वी यादव को राजनीति में साथ आने का न्योता देना - ये तो अलग दिशा में ही जा रहा है. लालू यादव का बड़े बेटे के प्रति रुख नरम हो जाने के बावजूद छोटे बेटे की तल्खी, बता रही है कि अभी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है. 

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क्या तेज प्रताप की घर वापसी हो गई?

बिहार चुनाव के काफी पहले से ही तेज प्रताप यादव अलग थलग पड़ गए थे. चुनाव कैंपेन के दौरान बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती के भी बयान आए, लेकिन तेज प्रताप के मामले में लालू यादव चुप्पी साधे रहे. चुनाव भी खत्म हो चुका है, चुप्पी भी टूट चुकी है. दही-चूड़ा भोज के दौरान मीडिया से बातचीत में आरजेडी नेता लालू यादव ने कहा, परिवार में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब दूरी नहीं होती.

लालू यादव ने साफ तौर पर कहा, तेज प्रताप अब परिवार के साथ ही रहेगा. तेज प्रताप के भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के शामिल होने के बाद उनके बीजेपी के साथ जाने को लेकर भी सवाल पूछे जाने लगे हैं. विजय सिन्हा और तेज प्रताप यादव दोनों की तरफ से इस बारे में सही वक्त आने पर बताए जाने की बात कही गई है. लेकिन, इस मुद्दे पर लालू यादव का बयान भी वैसे ही इशारे करता है, बेटे को हमेशा हमारा आशीर्वाद मिलेगा, वो जहां भी रहेगा. खुश और सफल रहे, यही कामना है.

अब भी जवाब खोज रहे हैं ये 5 सवाल

1. क्‍या एक ही घर से चलेंगी दो पार्टियां, या विलय होगा?

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अगर लालू यादव के कहे मुताबिक तेज प्रताप यादव घर लौट आते हैं, तो सवाल है कि लालू परिवार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी? एक ही दिशा में आगे बढ़ेगी, या अलग अलग दिशाओं में?

तेज प्रताप ने तेजस्वी यादव को अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल में विलय कर लेने की सलाह दी है. अपनी बात समझाने के लिए तेज प्रताप यादव कहते हैं, ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जनशक्ति जनता दल ही लालू यादव की असली पार्टी है - और यही वजह है कि वो दही चूड़ा भोज में पहुंचे हैं. कई लोग तो इसे उलटी गंगा बहाने जैसा मान रहे हैं. ऐसे मानने वालों को लगता है कि पुरानी और बड़ी पार्टी में तो नई पार्टी का विलय होता है, लेकिन नई पार्टी में पुरानी पार्टी के विलय का भला क्या मतलब है?

वास्तव में क्या होगा, ये भी तेजस्वी यादव पर लालू यादव और राबड़ी यादव के प्रभाव पर निर्भर करता है. चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव पर अहंकार से भरे होने के आरोप लगते थे. लेकिन अब तो वो चुनाव भी हार चुके हैं - और जैसे तैसे नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी बचा पाए हैं. 

2. तेजस्‍वी-तेजप्रताप की सुलह में रोहिणी का क्‍या बना?

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दोनों भाइयों के झगड़े में बहनों के बीच भी बंटवारा हो गया है. पहली बार ये बंटवारा 2025 में रक्षाबंधन के मौके पर सार्वजनिक तौर पर सामने आया. और, अब भी यथास्थिति बरकरार है. 

ये ठीक है कि बिहार चुनाव के दौरान मीसा भारती भी तेज प्रताप को भाई होने की वजह से शुभकामनाएं और आशीर्वाद दे रही थीं. लेकिन, तेज प्रताप ने रक्षाबंधन के मौके पर जिन बहनों की राखी मिलने की जानकारी सोशल मीडिया पर दी थी, उसमें मीसा भारती का नाम नहीं था.

ये जरूर देखा गया है कि रोहिणी आचार्य हमेशा ही तेज प्रताप के साथ खड़ी नजर आई हैं. असल में, रोहिणी आचार्य का स्टैंड भी तेज प्रताप यादव जैसा ही है. तेज प्रताप ने भी आरजेडी में राज्यसभा सांसद संजय यादव के दखल देने पर ऐतराज जताया है. और, रोहिणी यादव भी संजय यादव पर हमलावर रही हैं - तेज प्रताप तो संजय यादव को 'जयचंद' कह कर ही बुलाते हैं.

3. क्‍या तेजस्‍वी के हाथ ही रहेगी कमान, या नए सिरे से बंटवारा होगा?

चुनाव के बाद आरजेडी की स्थिति बिहार की राजनीति में ही नहीं, लालू परिवार के भीतर भी बदल चुकी है. हार की समीक्षा के नाम पर सवाल उठने लगे हैं. 

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लालू यादव की राजनीतिक विरासत का मामला बहुत पहले ही तय और साफ हो चुका था, लेकिन बिहार चुनाव 2025 के नतीजों ने मामला नए सिरे से उलझा दिया है. लालू यादव ने काफी पहले ही तेजस्वी यादव को अपना राजनीतिक वारिस और आरजेडी का नेता घोषित कर दिया था. और, सब कुछ ठीक ही चल रहा था. 

तेज प्रताप यादव भी तेजस्वी यादव का नेतृत्व स्वीकार कर चुके थे. वो तो तेजस्वी यादव को अर्जुन और खुद को कृष्ण भी बताते रहे हैं. झगड़ा बढ़ने से पहले वो तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की बात भी करते रहे हैं - लेकिन एक वाकये के बाद सब कुछ बदल गया, जो सबके सामने है.

4. तेजप्रताप की 'निजी जिंदगी' को लेकर भी कुछ तय हुआ है क्‍या?

तेज प्रताप की जो हालत हुई है, उसमें उनकी निजी जिंदगी की भी विशेष भूमिका है. तेज प्रताप और उनकी पत्नी ऐश्वर्या का कोर्ट में तलाक का मामला चल रहा है. और, इसी बीच सोशल मीडिया पर उनकी दोस्त अनुष्का यादव के साथ कुछ निजी तस्वीरें आ जाती हैं. तस्वीरों के साथ तेज प्रताप की ही तरफ से कहा जाता है कि वो 12 साल से रिलेशनशिप में हैं - बाद में वो अपना एकाउंट हैक होने की बात जरूर कर रहे थे, लेकिन तब तक बाजी हाथ से निकल चुकी थी.

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तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप की साली करिश्मा को भी विधानसभा का टिकट दिया था - जो राजनीति के साथ साथ एक बड़ा सामाजिक संदेश भी था. तेज प्रताप की घर वापसी की सूरत में ये सब किस दिशा में जाएगा, ये भी सवाल है. 

5. 'जयचंदों' का हिसाब कैसे होगा?

तेजस्वी यादव के बेहद भरोसेमंद और करीबी सहयोगी संजय यादव को तेज प्रताप यादव 'जयचंद' संबोधित करते आए हैं. पहले तो बगैर नाम लिए ऐसा होता था, लेकिन एक वायरल वीडियो में उनके मुंह से भी सुना जा चुका है. 

दही चूड़ा भोज के बीच प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भी तेज प्रताप ने कहा कि आरजेडी अब जयचंद की पार्टी हो गयी है. और, उसी क्रम में यहां तक कह डाला कि जो हाल है उसमें तेजस्वी यादव को भी उनके साथ आ जाना चाहिए. तेजस्वी यादव को आरजेडी का का उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल में विलय कर देना चाहिए. तेजप्रताप यादव ने ये भी दावा किया कि जयचंद की पार्टी से भी कई लोग उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल में भी शामिल हुए हैं.

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