राजस्थान में एक ऐसा बिल लाया गया है जिसके कानून बन जाने पर राज्य के किसी भी इलाके को अशांत क्षेत्र घोषित किया जा सकता है. और, एक बार किसी इलाके को अशांत क्षेत्र के रूप में नोटिफाई कर दिए जाने के बाद वहां कई तरह की पाबंदियां लग जाएंगी - जाहिर है, पाबंदियों के न मानने पर कानून का उल्लंघन माना जाएगा, और फिर कानून के उल्लंघन के अपराध के हिसाब से सजा भी दी जाएगी. राजस्थान के कुछ इलाकों में सांप्रदायिक तनाव के चलते हिंदुओं के पलायन की खबरें आती रही हैं. और यह भी कि उन्हें औने-पौने दाम पर अपनी संपत्ति वहां रहने वाले दबंगों को बेचनी पड़ी है. अब राजस्थान अपने नए एक्ट के तहत ऐसे सभी मामलों को सख्ती से निपटना चाहती है.
राजस्थान की बीजेपी सरकार के ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026’ (Disturbed Areas Bill 2026) का मकसद, सूबे में संभावित सांप्रदायिक तनाव को काबू करने और जनसंख्या असंतुलन की स्थिति को रोकना बताया गया है. एक बार किसी जगह के अशांत क्षेत्र घोषित होने के बाद, वहां अचल संपत्ति जैसे मकान, दुकान और जमीन की खरीद-फरोख्त प्रस्तावित कानून के हिसाब से ही संभव हो सकेगा.
अशांत क्षेत्र घोषित करने वाले ऐसे प्रयास सबसे पहले 1983 में पंजाब और 1986 में गुजरात में हुए थे. असम कैबिनेट ने भी पिछले साल अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच जमीन की खरीद बिक्री को रेग्युलेट करने के लिए SOP यानी मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी दी थी.

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‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026’ में क्या है
1. सरकार की तरफ से बताया गया है कि बिल लाए जाने का मकसद किसी क्षेत्र विशेष में 'अनुचित जमावड़े' को रोकना है. मतलब, किसी एक समुदाय के दबाव या मजबूरी के हालात में किसी इलाके में ज्यादा संख्या में बसने के लिए जमा हो जाना, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है या उस इलाके की मिश्रित आबादी की पहचान कमजोर हो सकती है.
प्रस्तावित कानून राज्य के ऐसे अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक लगाने का प्रावधान होगा, और किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण देने के इंतजाम भी होंगे.
2. प्रस्तावित कानून लाकर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ऐसे इलाकों में संपत्ति की बिक्री पूरी सहमति से और उचित बाजार मूल्य पर ही हो. ऐसे मामलों में अशांत क्षेत्र में संपत्ति के हस्तांतरण के लिए सक्षम प्राधिकारी की एडवांस मंजूरी जरूरी होगी.
3. बिल में 'किसी एक समुदाय के लोगों के अनुचित जमावड़े (clustering)' की परिभाषा भी बताई गई है. बिल के अनुसार, किसी इलाके में या किसी जगह किसी समुदाय के लोगों का ऐसे इकट्ठा होना, जो किसी तरह के दबाव, मजबूरी या अन्य परिस्थितियों के कारण हुआ हो, या जिससे जनसंख्या संतुलन बिगड़ता हो या बिगड़ने की आशंका हो, अलगाव की स्थिति बने, सांप्रदायिक तनाव पैदा हो, या सार्वजनिक व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द या इलाके की मिली जुली आबादी की पहचान प्रभावित होती हो - किसी क्षेत्र को अशांत घोषित किया जा सकेगा.
4. राज्य के किसी ऐसे इलाके को भी अशांत क्षेत्र घोषित किया जा सकता है, अगर किसी एक समुदाय के लोगों का अनुचित जमावड़ा हो चुका हो या होने की संभावना हो, और उसके पीछे अलग-अलग समुदायों के लोगों के जनसंख्या संतुलन को गड़बड़ करने की गलत मंशा हो, जिससे उस इलाके में अलग-अलग समुदायों के बीच आपसी सौहार्द और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व प्रभावित हो सकता हो.
5. बिल के प्रावधानों के मुताबिक, किसी क्षेत्र को अधिकतम तीन साल की अवधि के लिए, या अधिसूचना में तय अवधि के लिए, जो भी कम हो, अशांत क्षेत्र घोषित किया जा सकता है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रस्तावित कानून के दायरे में पुराने मामले भी आ सकते हैं. बिल के प्रावधान हैं कि जिन मामलों में संपत्ति का हस्तांतरण अमान्य घोषित किया जाएगा, उनमें बेचने वाले को, खरीदार को छह महीने के भीतर पूरी रकम वापस करनी होगी. अगर ऐसा मामला कानून लागू होने से पहले का है, तो कानून लागू होने की तारीख से छह महीने के भीतर रकम लौटानी होगी. और, अगर कानून लागू होने के बाद हुआ है, तो संपत्ति के हस्तांतरण की तारीख से छह महीने के भीतर राशि लौटानी होगी - कुल मिलाकर मुद्दे की बात यह है कि खरीदने वाले को छह महीने के भीतर संपत्ति वापस हस्तांतरित करने वाले व्यक्ति को लौटानी ही होगी.
कानून बना, और तोड़ा गया तो सजा भी होगी
1. ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026’ में प्रावधान है कि कानून तोड़ने पर 3 से 5 साल की जेल की सजा हो सकती है. साथ ही, कम से कम 1 लाख रुपये का जुर्माना या संपत्ति के उचित मूल्य की 10 फीसदी राशि, जो भी ज्यादा हो, लगाया जाएगा - और हां, कानून के तहत सभी अपराध गैर-जमानती और संज्ञेय होंगे.
2. किसी इलाके में अनुचित जमावड़े की शिकायत मिलने की सूरत में सरकार को SIT यानी एक विशेष जांच दल बनाना होगा. एसआईटी में सक्षम प्राधिकारी, एक पुलिस अफसर जो डिप्टी एसपी या सहायक पुलिस आयुक्त से कम रैंक का न हो, और संबंधित नगर निगम के आयुक्त या नगरपालिका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल होंगे.
और कहां कहां बने ऐसे कानून
राज्य के किसी खास इलाके को अशांत क्षेत्र घोषित करने को लेकर सबसे पहले 1983 में पंजाब ऐसा कानून बना था. और, 1991 से गुजरात में भी लागू है. ध्यान देने वाली बात है कि राजस्थान वाला बिल भी गुजरात वाले कानून पर ही आधारित है.
लेकिन, 2016 में तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यह कहते हुए प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि पंजाब अब अशांत क्षेत्र नहीं है. किरेन रिजिजु का कहना था, स्थिति में सुधार हो गया है... पंजाब अब पंजाब डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट और सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत नहीं आता है.
बिल पर राजस्थान में राजनीति
विधानसभा में बिल लाए जाने से पहले ही राजनीति शुरू हो चुकी है. राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा कहते हैं, हम सड़क पर भी लड़ेंगे, और सदन में भी... सत्ता के नशे में चूर बीजेपी नेता सिर्फ राज करना चाहते हैं, चाहे राज्य में कितनी भी अशांति क्यों न फैल जाए... वे लोग राजस्थान पर डर और दहशत का गुजरात मॉडल थोपना चाहते हैं. वैसे जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की तरफ से नफरत के खिलाफ बिल लाया गया था, तो बीजेपी की भी ऐसी ही प्रतिक्रिया थी.
हाल ही में आए राजस्थान के कानून मंत्री जोगाराम पटेल का एक बयान भी गौर करने लायक है, जिससे राज्य सरकार के ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026’ लाए जाने की मंशा को समझा जा सकता है. राजस्थान के मंत्री का कहना था, हमारे राज्य के कई इलाकों में एक खास समुदाय की बढ़ती आबादी का व्यापक असर, जनसंख्या असंतुलन, सांप्रदायिक तनाव और सौहार्द की कमी समाज में काफी समय से देखी जा रही है.
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा था, कुछ इलाकों में दंगे, हिंसा और अशांति पैदा की जाती है, और कई पुराने बाशिंदे अपनी संपत्ति औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं.
जयपुर से करीब दो घंटे दूर कल्याणी मालपुरा में ऐसे मामले पाए गए हैं. पास में बसे मोहल्ला सादात की कहानी भी मिलती जुलती ही है. आज तक से बातचीत में वहां एक वकील का सवाल था, आपको क्या लगता है, कश्मीरी पंडित रातोरात भागे होंगे?
अगर समस्या गंभीर है, और मौजूदा कानूनों से बात नहीं बन पा रही है, तो नया और सख्त कानून जरूरी हो सकता है. बशर्ते, दहेज से जुड़े और उस तरह के कानूनों की तरह दुरुपयोग न होने लगे, और कानून की आड़ में पुलिस को भ्रष्टाचार के लिए आपदा में नया अवसर न ढूंढ ले.